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समाधि में बैठे महात्मा ब्रह्मलीन हो गए
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मोरना। शुकतीर्थ आश्रम में 21 दिन की समाधि में बैठे महात्मा भीमदास महाराज ब्रह्मलीन हो गए। सूचना पर उनके बड़े भाई महात्मा ओमदास व संत महात्मा पहुंच गए और उनके शरीर को विधि विधान से समाधि दी गई।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव सोंटा निवासी भीमदास महाराज करीब 20 वर्ष पहले गुरु वेदांती दास जी महाराज से दीक्षा लेने के बाद शुकतीर्थ आ गए और फिरोजपुर मार्ग पर आश्रम बनाकर रहने लगे। गत 23 जून की सुबह भीमदास जी महाराज आश्रम में अन्न जल त्याग कर 21 दिन की समाधि में बैठ गए थे। समाधि से बदबू फैलने से शुक्रवार की सुबह पड़ोसियों ने जाकर देखा तो समाधि के ऊपर मक्खियां मंडरा रही थी। शक होने पर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। समाधि के अंदर महाराज ब्रह्मलीन मिले। सूचना पर किरठल से महात्मा के बड़े भाई ओमदास महाराज भी पहुंच गए और उनके शरीर को विधि विधान से समाधि दी गई। इस मौके पर मां अन्नपूर्णा मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज, स्वामी परमेश्वर महाराज, रविदास आश्रम के महंत स्वामी सत्यानंद महाराज, सतीश दास महाराज, अजय दास, राजूदास , विक्रम दास आदि मौजूद रहे।
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मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव सोंटा निवासी भीमदास महाराज करीब 20 वर्ष पहले गुरु वेदांती दास जी महाराज से दीक्षा लेने के बाद शुकतीर्थ आ गए और फिरोजपुर मार्ग पर आश्रम बनाकर रहने लगे। गत 23 जून की सुबह भीमदास जी महाराज आश्रम में अन्न जल त्याग कर 21 दिन की समाधि में बैठ गए थे। समाधि से बदबू फैलने से शुक्रवार की सुबह पड़ोसियों ने जाकर देखा तो समाधि के ऊपर मक्खियां मंडरा रही थी। शक होने पर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। समाधि के अंदर महाराज ब्रह्मलीन मिले। सूचना पर किरठल से महात्मा के बड़े भाई ओमदास महाराज भी पहुंच गए और उनके शरीर को विधि विधान से समाधि दी गई। इस मौके पर मां अन्नपूर्णा मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज, स्वामी परमेश्वर महाराज, रविदास आश्रम के महंत स्वामी सत्यानंद महाराज, सतीश दास महाराज, अजय दास, राजूदास , विक्रम दास आदि मौजूद रहे।
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