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संसार में हरि का प्रेम ही आपकी भूख मिठा सकता है-महाराज

Wed, 12 Jun 2019 12:28 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2019 12:28 AM IST
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संसार में हरि का प्रेम ही आपकी भूख मिठा सकता है-महाराज
संसार में हरि का प्रेम ही आपकी भूख मिटा सकता है : देवकी नंदन
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मोरना। शुकदेव आश्रम में पांचवें दिन भागवत कथा को सुनाते हुए कथा व्यास देवकीनंदन ठाकुर महाराज जी ने कहा कि मानव जीवन में दया-धर्म के दान में ं भागीदार बनें। तीर्थ का यही लाभ है कि कथा और संत दोनों के दर्शन सहजता से हो जाते हैं। जिन्हें श्याम सुंदर के दर्शन करने हो, तो उन्हें शुद्धता का आवरण ओढ़ना पड़ेगा। भक्ति की आनंद की कोई सीमा नहीं।
विश्व शांति ट्रस्ट वृंदावन के तत्वावधान में शुकतीर्थ में भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें महाराज जी ने कहा कि मन बड़ा निक्कमा है, जिसे खाने से मना किया जाये, वह उसको जरूर खाने का मन करता है। संसार में हरि का प्रेम ही आपकी भूख को मिटा सकता है। ठाकुर के प्रेम वाले नामरस, अमृतरस पान करते हैं। हरिमिलन से अपने आपसे प्रेम हो जाता है। सनातन धर्म में बहुत विशेषता है। मानव दानपात्र का उपयोग सुंदर आयोजनों में हो। मनृुष्य योनी में प्राप्त करने के बाद भी जो मानव दान नहीं करता, वह आत्मा से दूषित होता है। वह पाप करता है, नरक जाता है, दान न करने वाला प्राणी नरक का भोगी बनता है। जरूरत से ज्यादा मत रखेें, जो समाज की सेवा न करे, वह चोर है। महादानी का हृदय सब लोगों के लिए धड़कता है, वृक्ष अपना फल कभी नहीं खाता। नदी कभी अपना नीर नहीं पीती। भागवत कथा मानव के मरण को सुधारकर भागवन के शरणागत करती है।
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धर्म सुधर गया तो देश सुधर जाएगा : महामंडलेश्वर
कथा में पधारे हनुधाम पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि देवी-देवताओं को भी जलन हो रही होगी कि हमें शुकतीर्थ में भागवत श्रवण करने को नहीं मिल रही है। गर्भ सुधर गया, तो धर्म सुधर जाएगा, धर्म सुधर गया तो देश सुधर जाएगा। भागवत गर्भ से ही संस्कारों को देना आरंभ कर देती है। भोजन में मात्रा है, भजन में कोई मात्रा नहीं होती। जितना मन करे करते जाए। भजन जितना करोगे, उतना ही जीवन में अग्रसर होंगे। कथा, सत्संग इसलिए सुने जाते हैं कि हमारी वासना समाप्त हो जाए। इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज व गीतानंद गिरि महाराज ने भगवान हनुमान की प्रतिमा कथा व्यास देवकी नंदन ठाकुर महाराज को भेंट की।
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