{"_id":"5cead93ebdec2207177168ab","slug":"15588949594-muzaffarnagar-news99","type":"story","status":"publish","title_hn":"सत्व गुणों से ही मानव का उत्थान: वेदप्रकाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सत्व गुणों से ही मानव का उत्थान: वेदप्रकाश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के पूर्व कुलपति प्रोफेसर वेद प्रकाश शास्त्री ने कहा कि जीवन का उत्थान और विस्तार सत्व गुण से होता है।
नई मंडी आर्य समाज भवन में हुए समारोह में प्रोफेसर वेद प्रकाश शास्त्री एवं उनकी पत्नी पुष्प लता का आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। शास्त्री ने कहा कि चार वेदों का मुख्य प्रयोजन परमात्मा की प्राप्ति है। ईश्वर को पाने का साधन सत्व गुण है। लोक में गमन करने का जो साधन रजो गुण है। तमो गुण पतन में ले जाता है। व्यक्ति के जीवन का उत्थान और विस्तार सत्व गुण से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत देव भाषा है, जो विद्यार्थी को देवत्व की ओर ले जाती है। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि प्रोफेसर वेद प्रकाश शास्त्री संस्कृत, प्राच्य विधा संकाय और पुरात्तव संग्रहालय गुरुकुल कांगड़ी के अध्यक्ष भी रहे है। स्वामी योगानंद ने कहा कि वैदिक संस्कृति के संवर्धन से ही देश की रक्षा होगी। पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ऋषि दयानंद के सिद्धांतों से समाज में सत्य, न्याय स्थापित होगा। आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह, अधिवक्ता राजपाल सिंह चाहल, इंजीनियर करण सिंह, आर पी शर्मा, मंगत सिंह आर्य ने विचार रखे। छात्रा खुशी आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। आनंद पाल सिंह आर्य, वेदपाल सिंह, डॉ. नीरज शास्त्री, सुधीर आर्य, सोम पाल आर्य, प्रमोद आर्य, गजेंद्र राणा , शिव कुमार आर्य, राजबीर सिंह आर्य, मंजू आर्या, प्रियंका आर्या, सतीश आर्य, विनीत कुमार, योगेश्वर दयाल, राकेश देवी, सुनीता आदि मौजूद रहे। संचालन आर पी शर्मा ने किया।
विज्ञापन
नई मंडी आर्य समाज भवन में हुए समारोह में प्रोफेसर वेद प्रकाश शास्त्री एवं उनकी पत्नी पुष्प लता का आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। शास्त्री ने कहा कि चार वेदों का मुख्य प्रयोजन परमात्मा की प्राप्ति है। ईश्वर को पाने का साधन सत्व गुण है। लोक में गमन करने का जो साधन रजो गुण है। तमो गुण पतन में ले जाता है। व्यक्ति के जीवन का उत्थान और विस्तार सत्व गुण से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत देव भाषा है, जो विद्यार्थी को देवत्व की ओर ले जाती है। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि प्रोफेसर वेद प्रकाश शास्त्री संस्कृत, प्राच्य विधा संकाय और पुरात्तव संग्रहालय गुरुकुल कांगड़ी के अध्यक्ष भी रहे है। स्वामी योगानंद ने कहा कि वैदिक संस्कृति के संवर्धन से ही देश की रक्षा होगी। पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ऋषि दयानंद के सिद्धांतों से समाज में सत्य, न्याय स्थापित होगा। आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह, अधिवक्ता राजपाल सिंह चाहल, इंजीनियर करण सिंह, आर पी शर्मा, मंगत सिंह आर्य ने विचार रखे। छात्रा खुशी आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। आनंद पाल सिंह आर्य, वेदपाल सिंह, डॉ. नीरज शास्त्री, सुधीर आर्य, सोम पाल आर्य, प्रमोद आर्य, गजेंद्र राणा , शिव कुमार आर्य, राजबीर सिंह आर्य, मंजू आर्या, प्रियंका आर्या, सतीश आर्य, विनीत कुमार, योगेश्वर दयाल, राकेश देवी, सुनीता आदि मौजूद रहे। संचालन आर पी शर्मा ने किया।
विज्ञापन