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प्रदर्शन-उपद्रव की घटना के बाद भाजपा में बैचेनी
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:36 AM IST
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उपद्रव की घटना के बाद भाजपा में बेचैनी
मुजफ्फरनगर। भारत बंद के दौरान दलितों के प्रदर्शन और उपद्रव की घटना के बाद से बीजेपी की बेचैनी बढ गई है। भाजपा नेता अदूरदर्शिता के चलते जिस तरह अति उत्साह में दिखाई दे रहे हैं, यह पार्टी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हो सकता है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दलितों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला था।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर दलितों के प्रदर्शन और उसके बाद हुए उपद्रव की घटना के बाद बीजेपी की बेचैनी बढ़ गई है। उपद्रव को रोकने में प्रशासन की नाकामयाबी और बीजेपी नेताओं की अदूरदर्शिता पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। जिले में 2013 के दंगे के बाद हुए लोकसभा चुनाव में दलित समाज का बड़ा हिस्सा भाजपा की झोली में चला गया था। वाल्मीकि, खटीक, हिंदू जुलाहा वोटंो के साथ हरिजन वोट भी भाजपा को मिले। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी दलितों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की झोली में गया। जिले में जिस तरह के हालात बनते जा रहे है और भाजपा नेता अदूरदर्शिता के चलते जिस तरह सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, इससे पार्टी को हरिजनों में तो नुकसान उठाना ही पड़ेगा, लेकिन दलित समाज के अपने परंपरागत वोट वाल्मीकि, खटीक, धोबी, हिंदू जुलाहा को रोकना भी मुश्किल हो जाएगा। भाजपा के पुरकाजी विधायक प्रमोद ऊटवाल दलित समाज से ही है। हाल ही में कैराना लोकसभा का और नूरपुर विधानसभा का उपचुनाव हैे, यदि दलित वोट बीजेपी के खिलाफ एकजुट हो गया तो पार्टी के लिए विकट स्थिति बन जायेगी। हालाकि पार्टी हाईकमान ने दलितों को लेकर कोई स्टेटमेंट नहीं दिया है।
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मुजफ्फरनगर। भारत बंद के दौरान दलितों के प्रदर्शन और उपद्रव की घटना के बाद से बीजेपी की बेचैनी बढ गई है। भाजपा नेता अदूरदर्शिता के चलते जिस तरह अति उत्साह में दिखाई दे रहे हैं, यह पार्टी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हो सकता है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दलितों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला था।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर दलितों के प्रदर्शन और उसके बाद हुए उपद्रव की घटना के बाद बीजेपी की बेचैनी बढ़ गई है। उपद्रव को रोकने में प्रशासन की नाकामयाबी और बीजेपी नेताओं की अदूरदर्शिता पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। जिले में 2013 के दंगे के बाद हुए लोकसभा चुनाव में दलित समाज का बड़ा हिस्सा भाजपा की झोली में चला गया था। वाल्मीकि, खटीक, हिंदू जुलाहा वोटंो के साथ हरिजन वोट भी भाजपा को मिले। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी दलितों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की झोली में गया। जिले में जिस तरह के हालात बनते जा रहे है और भाजपा नेता अदूरदर्शिता के चलते जिस तरह सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, इससे पार्टी को हरिजनों में तो नुकसान उठाना ही पड़ेगा, लेकिन दलित समाज के अपने परंपरागत वोट वाल्मीकि, खटीक, धोबी, हिंदू जुलाहा को रोकना भी मुश्किल हो जाएगा। भाजपा के पुरकाजी विधायक प्रमोद ऊटवाल दलित समाज से ही है। हाल ही में कैराना लोकसभा का और नूरपुर विधानसभा का उपचुनाव हैे, यदि दलित वोट बीजेपी के खिलाफ एकजुट हो गया तो पार्टी के लिए विकट स्थिति बन जायेगी। हालाकि पार्टी हाईकमान ने दलितों को लेकर कोई स्टेटमेंट नहीं दिया है।
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