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डॉक्टरों को नहीं मिला इंजीनियर, पुलिस पर भरोसा
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:18 AM IST
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मुजफ्फरनगर।
शामली रोड पर पकड़ी गई अल्ट्रासाउंड की नई तकनीक की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को टेक्निकल इंजीनियर नहीं मिल सका है। जिसके माध्यम से सॉफ्टवेयर की तह तक पहुंचा जा सके। स्वास्थ्य विभाग अब पुलिस-प्रशासन पर निर्भर है।
हरिद्वार (उत्तराखंड) की पीसीपीएनडीटी टीम ने शहर के शामली रोड पर हिमालयन चैरिटेबिल अस्पताल के निकट मकान पर छापा मारा था। यहां टीम ने टैबलेट और वायरलेस पोर्टेबल के माध्यम से अल्ट्रासाउंड की नई तकनीक पड़ती है। यहां पर एक विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण किया जा रहा था। हरिद्वार के साथ विभागीय अफसरों की टीम ने मौके से मिले मोबाइल, टैबलेट और अन्य सामान को जब्त किया था। जिसमें सॉफ्टवेयर की जांच के लिए टेक्निकल इंजीनियर तलाशा जा रहा था। दस दिन बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सॉफ्टवेयर की जांच के लिए इंजीनियर नहीं ढूंढ सका है। इससे नई तकनीक की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है। उधर, विभागीय अधिकारियों ने पुलिस पर भरोसा जताया है।
पुलिस डॉ. रुपेश गौतम, हिमालयन चैरिटेबिल अस्पताल के स्वामी डॉ. गौतम, अल्ट्रासाउंड कर्ता महिला शबाना को नहीं पकड़ सकी है। इनकी गिरफ्तारी से ही इस तकनीक का पर्दाफाश होगा। पीसीपीएनडीटी के जिला नोडल प्रभारी डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि विभाग अपने स्तर से भी जांच-पड़ताल में लगा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी तरह से इस मामले का राज खुलेगा। पुलिस अपना कार्य कर रही है।
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शामली रोड पर पकड़ी गई अल्ट्रासाउंड की नई तकनीक की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को टेक्निकल इंजीनियर नहीं मिल सका है। जिसके माध्यम से सॉफ्टवेयर की तह तक पहुंचा जा सके। स्वास्थ्य विभाग अब पुलिस-प्रशासन पर निर्भर है।
हरिद्वार (उत्तराखंड) की पीसीपीएनडीटी टीम ने शहर के शामली रोड पर हिमालयन चैरिटेबिल अस्पताल के निकट मकान पर छापा मारा था। यहां टीम ने टैबलेट और वायरलेस पोर्टेबल के माध्यम से अल्ट्रासाउंड की नई तकनीक पड़ती है। यहां पर एक विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण किया जा रहा था। हरिद्वार के साथ विभागीय अफसरों की टीम ने मौके से मिले मोबाइल, टैबलेट और अन्य सामान को जब्त किया था। जिसमें सॉफ्टवेयर की जांच के लिए टेक्निकल इंजीनियर तलाशा जा रहा था। दस दिन बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सॉफ्टवेयर की जांच के लिए इंजीनियर नहीं ढूंढ सका है। इससे नई तकनीक की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है। उधर, विभागीय अधिकारियों ने पुलिस पर भरोसा जताया है।
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पुलिस डॉ. रुपेश गौतम, हिमालयन चैरिटेबिल अस्पताल के स्वामी डॉ. गौतम, अल्ट्रासाउंड कर्ता महिला शबाना को नहीं पकड़ सकी है। इनकी गिरफ्तारी से ही इस तकनीक का पर्दाफाश होगा। पीसीपीएनडीटी के जिला नोडल प्रभारी डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि विभाग अपने स्तर से भी जांच-पड़ताल में लगा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी तरह से इस मामले का राज खुलेगा। पुलिस अपना कार्य कर रही है।
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