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सर्दी शुरु होते ही रेलवे ट्रैक के दुरुस्त का काम शुरु
Updated Wed, 01 Nov 2017 12:54 AM IST
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रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने का काम शुरू
खतौली (मुजफ्फरनगर)। सर्दी का मौसम प्रारंभ होते ही रेल महकमा रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। मंगलवार को ट्रैक मैनों ने रेलवे ट्रैक के ढीले पड़े नट व बोल्टों को कसने का काम शुरू किया।
कर्मचारियों की लापरवाही से ही 19 अगस्त को जगत कालोनी के सामने उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसा हुआ था। इस हादसे में 26 यात्रियों की जान चली गई थी, जबकि 150 से अधिक यात्री घायल हुए थे। दुर्घटनास्थल पर रेलवे विभाग के अधिकारियों ने नया रेलवे ट्रैक बनवाया था। इस हादसे के बाद से रेल मंत्रालय पूरी तरह से सतर्क हो गया था। इंजीनियर साजिद ने बताया कि सर्दी प्रारंभ हो चुकी है। इसलिए रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। मंगलवार को ट्रैकमैनों ने जिस जगह पर ट्रेन हादसा हुआ था, उस जगह पर बनाए गए नए रेलवे ट्रैक के ढीले पड़े नट व बोल्टों को कसने का काम शुरू किया। इंजीनियर के मुताबिक यह कार्य प्रतिदिन प्रारंभ होगा। सर्दी व गरमी के मौसम में अक्सर रेलवे ट्रैक के नट व बोल्ट ढीले होने लगते हैं। इनसे ट्रेन के गुजरने का कोई खतरा नहीं है। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से नट व बोल्टों को समय समय पर कसवाया जाता है।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। सर्दी का मौसम प्रारंभ होते ही रेल महकमा रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। मंगलवार को ट्रैक मैनों ने रेलवे ट्रैक के ढीले पड़े नट व बोल्टों को कसने का काम शुरू किया।
कर्मचारियों की लापरवाही से ही 19 अगस्त को जगत कालोनी के सामने उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसा हुआ था। इस हादसे में 26 यात्रियों की जान चली गई थी, जबकि 150 से अधिक यात्री घायल हुए थे। दुर्घटनास्थल पर रेलवे विभाग के अधिकारियों ने नया रेलवे ट्रैक बनवाया था। इस हादसे के बाद से रेल मंत्रालय पूरी तरह से सतर्क हो गया था। इंजीनियर साजिद ने बताया कि सर्दी प्रारंभ हो चुकी है। इसलिए रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। मंगलवार को ट्रैकमैनों ने जिस जगह पर ट्रेन हादसा हुआ था, उस जगह पर बनाए गए नए रेलवे ट्रैक के ढीले पड़े नट व बोल्टों को कसने का काम शुरू किया। इंजीनियर के मुताबिक यह कार्य प्रतिदिन प्रारंभ होगा। सर्दी व गरमी के मौसम में अक्सर रेलवे ट्रैक के नट व बोल्ट ढीले होने लगते हैं। इनसे ट्रेन के गुजरने का कोई खतरा नहीं है। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से नट व बोल्टों को समय समय पर कसवाया जाता है।
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