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अंजान शहर में भटकते फिरते रहे ट्रेन यात्री
Updated Sun, 20 Aug 2017 02:23 AM IST
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अंजान शहर में भटकते रहे ट्रेन यात्री
खतौली। ट्रेन हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों की घंटों तक प्रशासन ने सुध नहीं ली। अचानक हुए हादसे के बाद अंजान शहर में सैकड़ों यात्री भटकते रहे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे अब कैसे गंतव्य तक जाए।
ट्रेन हादसे के बाद पुलिस ने कस्बे में आने वाले वाहनों की अंदर एंट्री बंद कर दी थी। नतीजतन छोटे बच्चों और महिलाओं को लेकर यात्री कस्बे में भटकते रहे। यात्रियों की मदद के लिए कस्बे के लोग आगे आए। उन्हें अपने वाहनों से बाईपास हाईवे पर ले जाकर रोडवेज बसों में बैठाया। रात नौ बजे रोडवेज को इन यात्रियों की सुध आई। बाईपास हाईवे पर कर्मचारियों को खड़ा करके हरिद्वार जाने वाले रोडवेज बसों को कसबे के अंदर की ओर भेजना शुरू किया। इसके बाद यहां से बसों में हरिद्वार के लिए यात्रियों को सवार किया गया। खतौली डिपो के एआरएम रणजीत सिंह ने बताया कि डिपो की 18 बसों को स्पेशल हरिद्वार के लिए भेजा गया। इसके अलावा अन्य डिपो की बसों को भी खतौली से होकर निकाला गया। यहां से करीब 1400 यात्रियों को हरिद्वार बिना टिकट के भेजा गया।
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खतौली। ट्रेन हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों की घंटों तक प्रशासन ने सुध नहीं ली। अचानक हुए हादसे के बाद अंजान शहर में सैकड़ों यात्री भटकते रहे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे अब कैसे गंतव्य तक जाए।
ट्रेन हादसे के बाद पुलिस ने कस्बे में आने वाले वाहनों की अंदर एंट्री बंद कर दी थी। नतीजतन छोटे बच्चों और महिलाओं को लेकर यात्री कस्बे में भटकते रहे। यात्रियों की मदद के लिए कस्बे के लोग आगे आए। उन्हें अपने वाहनों से बाईपास हाईवे पर ले जाकर रोडवेज बसों में बैठाया। रात नौ बजे रोडवेज को इन यात्रियों की सुध आई। बाईपास हाईवे पर कर्मचारियों को खड़ा करके हरिद्वार जाने वाले रोडवेज बसों को कसबे के अंदर की ओर भेजना शुरू किया। इसके बाद यहां से बसों में हरिद्वार के लिए यात्रियों को सवार किया गया। खतौली डिपो के एआरएम रणजीत सिंह ने बताया कि डिपो की 18 बसों को स्पेशल हरिद्वार के लिए भेजा गया। इसके अलावा अन्य डिपो की बसों को भी खतौली से होकर निकाला गया। यहां से करीब 1400 यात्रियों को हरिद्वार बिना टिकट के भेजा गया।
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