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शहीद वीरों की गाथा का मौन गवाह है सूलीवाला बाग
Updated Tue, 15 Aug 2017 01:04 AM IST
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शहीद वीरों की गाथा का मौन गवाह है सूलीवाला बाग
पुरकाजी(मुजफ्फरनगर)। कस्बे में बाहरी छोर पर हाईवे पर स्थित सूली वाला बाग वीरों की गाथा का गवाह है। अंग्रेजों ने इस बाग में क्रांतिवीर वीरों को सूली पर लटकाया था। जानकारों का कहना है इस बाग में सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया गया था।
वर्ष 1857 में जब भारत माता को आजाद कराने के लिए पूरा देश आंदोलन में कूद पड़ा था, तब आंदोलन की चिंगारी मेरठ से सुलगकर जनपद मुजफ्फरनगर में पहुंची था। जनपद के लोगों ने उसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कस्बा पुरकाजी का गौरवशाली इतिहास रहा है। बुजुर्गों के अनुसार सूली वाला बाग में करीब 500 क्रांतिकारियों को सूली पर लटकाकर फांसी दी गई थी। शहीद वीरों की गाथा का उक्त बाग आज भी मौन गवाह है। जनपद के क्रांतिकारियों ने अंग्रेज शासकों का डटकर मुकाबला कर उन्हें नाकों चने चबवा कर उल्टे पैरों भागने पर मजबूर किया था। कलेक्टर मिस्टर वरफोर्ट की हत्या कर दी थी। उसके उपरांत आए नए कलेक्टर मिस्टर एडवर्ड ने क्रांतिकारियों को रोकने के लिए सेना को बुलाया था। सेना ने लोगों पर जमकर अत्याचार किए और लोगों को बंधक बनाकर सूली पर लटकाकर फांसी दी, जिस पेड़ पर क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया था। वो पेड़ आज भी सूली वाला बाग में है। बाग में एक मजार भी है, जहां पर काफी लोग जाकर प्रसाद आदि चढ़ाते हैं। कस्बेवासियों का दर्द है कि सूली वाला बाग और शहीद स्मारक शासन प्रशासन द्वारा की जा रही अनदेखी के चलते अपनी पहचान खोता जा रहा है। हालांकि कस्बे के लोग इसे शहीद स्मारक का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। गत वर्ष 15 अगस्त व इस वर्ष 26 जनवरी को यहां पर ध्वजारोहण कर सूली वाला बाग को शहीद स्मारक बनाने का बिगुल फूंका गया। मंगलवार 15 अगस्त को भारी संख्या में लोगों द्वारा यहां पर ध्वजारोहण किया जाएगा।
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पुरकाजी(मुजफ्फरनगर)। कस्बे में बाहरी छोर पर हाईवे पर स्थित सूली वाला बाग वीरों की गाथा का गवाह है। अंग्रेजों ने इस बाग में क्रांतिवीर वीरों को सूली पर लटकाया था। जानकारों का कहना है इस बाग में सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया गया था।
वर्ष 1857 में जब भारत माता को आजाद कराने के लिए पूरा देश आंदोलन में कूद पड़ा था, तब आंदोलन की चिंगारी मेरठ से सुलगकर जनपद मुजफ्फरनगर में पहुंची था। जनपद के लोगों ने उसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कस्बा पुरकाजी का गौरवशाली इतिहास रहा है। बुजुर्गों के अनुसार सूली वाला बाग में करीब 500 क्रांतिकारियों को सूली पर लटकाकर फांसी दी गई थी। शहीद वीरों की गाथा का उक्त बाग आज भी मौन गवाह है। जनपद के क्रांतिकारियों ने अंग्रेज शासकों का डटकर मुकाबला कर उन्हें नाकों चने चबवा कर उल्टे पैरों भागने पर मजबूर किया था। कलेक्टर मिस्टर वरफोर्ट की हत्या कर दी थी। उसके उपरांत आए नए कलेक्टर मिस्टर एडवर्ड ने क्रांतिकारियों को रोकने के लिए सेना को बुलाया था। सेना ने लोगों पर जमकर अत्याचार किए और लोगों को बंधक बनाकर सूली पर लटकाकर फांसी दी, जिस पेड़ पर क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया था। वो पेड़ आज भी सूली वाला बाग में है। बाग में एक मजार भी है, जहां पर काफी लोग जाकर प्रसाद आदि चढ़ाते हैं। कस्बेवासियों का दर्द है कि सूली वाला बाग और शहीद स्मारक शासन प्रशासन द्वारा की जा रही अनदेखी के चलते अपनी पहचान खोता जा रहा है। हालांकि कस्बे के लोग इसे शहीद स्मारक का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। गत वर्ष 15 अगस्त व इस वर्ष 26 जनवरी को यहां पर ध्वजारोहण कर सूली वाला बाग को शहीद स्मारक बनाने का बिगुल फूंका गया। मंगलवार 15 अगस्त को भारी संख्या में लोगों द्वारा यहां पर ध्वजारोहण किया जाएगा।
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