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शिक्षा ऋषि का जीवन अनुकरणीय: टिकैत
Updated Sun, 15 Jul 2018 12:53 AM IST
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मोरना। वीतराग स्वामी कल्याणदेव की समाधि पर भाकियू के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। किसानों के साथ श्रद्धांजलि सभा से पूर्व शुकदेव आश्रम पहुंचे टिकैत ने स्वामी ओमानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। अक्षय वट की परिक्रमा और शुकदेव मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऋषि का जीवन समाज और देश के लिए अनुकरणीय है। ग्रामोत्थान के लिए उन्होंने गांव-गांव शिक्षा की ज्योति जगाई। श्री विश्वकर्मा धीमान सेवा संघ के अध्यक्ष मास्टर निर्मल सिंह के नेतृत्व में आये प्रतिनिधि मंडल ने संत को नमन किया। सेवा राम धीमान, सरदार सुलक्खन सिंह नामधारी, नरेश विश्वकर्मा, बाबूराम पांचाल, मांगेराम पांचाल आदि ने श्रद्धांजलि दी।
चरणाभिषेक के बाद हुई यज्ञ की पूर्णाहूति
मोरना। भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम स्थित संत के समाधि मंदिर में प्रात: सात बजे आचार्यो, पुरोहितों और ब्रहमचारियों ने वेद पाठ के बीच चरणाभिषेक कराया। वैदिक मंत्रों से यज्ञ की आहूतियां दी गई। आचार्य गिरीशचंद उप्रेति, कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, सुमन शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री ने विधि विधान से पूजन कराया। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह एवं कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने यज्ञ की पूर्ण आहूती दी। गुरु वंदना से समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
भागवत कथा के बाद निकली कलश विसर्जन यात्रा
शुक्रताल। संत की पावन स्मृति में डोंगरे भागवत भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विराम के बाद श्रद्धालु महिलाओं ने स्थापित कलश का विसर्जन किया। कथा व्यास पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी ने कहा कि शुकतीर्थ की पावन भूमि शांति और कल्याण की प्रेरक है। परमात्मा संपूर्ण और परम तृप्त है। अहंकार का त्याग करे और दूसरों को आदर दे। ज्ञान पुरुषार्थ से और भक्ति विश्वास से मिलती है। श्री हरि सत्संग मंडल जावद मध्य प्रदेश से आये यज्ञमान रामजस, रामरतन, डाक्टर ओझा परिवार ने भाग लिया। हर्ष मणि, राजू, दीपक, ठाकुर, श्यामाचार्य, हरीश शर्मा, विजय शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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तीर्थ के संतों ने किया पावन स्मरण
शुक्रताल। श्रद्धांजलि सभा में अतिथियों ने शुकतीर्थ संदेश पत्रिका का विमोचन किया। संत-महात्माओं, शिक्षाविदों, समाजसेवी और श्रद्धालुओं ने वीतराग संत के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। स्वामी गोवर्धन दास, स्वामी महानंद, स्वामी कृपाल दास, महामंडलेश्वर गोपालाचार्य, स्वामी मोहनदास आदि ने स्वामी कल्याणदेव का पावन स्मरण किया। स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि महाप्रयाण के बाद शिक्षा ऋषि की स्मृति में 32 शिक्षण संस्थायें स्थापित की गई, जिसमें दस डिग्री कॉलेज हैं। उनकी स्कूलों में 20 प्रतिमायें भी स्थापित कराई गई है।
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चरणाभिषेक के बाद हुई यज्ञ की पूर्णाहूति
मोरना। भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम स्थित संत के समाधि मंदिर में प्रात: सात बजे आचार्यो, पुरोहितों और ब्रहमचारियों ने वेद पाठ के बीच चरणाभिषेक कराया। वैदिक मंत्रों से यज्ञ की आहूतियां दी गई। आचार्य गिरीशचंद उप्रेति, कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, सुमन शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री ने विधि विधान से पूजन कराया। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह एवं कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने यज्ञ की पूर्ण आहूती दी। गुरु वंदना से समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
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भागवत कथा के बाद निकली कलश विसर्जन यात्रा
शुक्रताल। संत की पावन स्मृति में डोंगरे भागवत भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विराम के बाद श्रद्धालु महिलाओं ने स्थापित कलश का विसर्जन किया। कथा व्यास पंडित रुद्रदेव त्रिपाठी ने कहा कि शुकतीर्थ की पावन भूमि शांति और कल्याण की प्रेरक है। परमात्मा संपूर्ण और परम तृप्त है। अहंकार का त्याग करे और दूसरों को आदर दे। ज्ञान पुरुषार्थ से और भक्ति विश्वास से मिलती है। श्री हरि सत्संग मंडल जावद मध्य प्रदेश से आये यज्ञमान रामजस, रामरतन, डाक्टर ओझा परिवार ने भाग लिया। हर्ष मणि, राजू, दीपक, ठाकुर, श्यामाचार्य, हरीश शर्मा, विजय शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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तीर्थ के संतों ने किया पावन स्मरण
शुक्रताल। श्रद्धांजलि सभा में अतिथियों ने शुकतीर्थ संदेश पत्रिका का विमोचन किया। संत-महात्माओं, शिक्षाविदों, समाजसेवी और श्रद्धालुओं ने वीतराग संत के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। स्वामी गोवर्धन दास, स्वामी महानंद, स्वामी कृपाल दास, महामंडलेश्वर गोपालाचार्य, स्वामी मोहनदास आदि ने स्वामी कल्याणदेव का पावन स्मरण किया। स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि महाप्रयाण के बाद शिक्षा ऋषि की स्मृति में 32 शिक्षण संस्थायें स्थापित की गई, जिसमें दस डिग्री कॉलेज हैं। उनकी स्कूलों में 20 प्रतिमायें भी स्थापित कराई गई है।