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भागवत श्रवण से निर्मल होता है ह्दय: दिव्यानंद
Updated Sun, 11 Mar 2018 10:32 PM IST
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भागवत श्रवण से निर्मल होता है हृदय: दिव्यानंद
मोरना। दंडी आश्रम में पूज्य संत विष्णु आश्रम जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित भागवत कथा के विराम अवसर पर कथा व्यास स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि भागवत का श्रवण पुण्यप्रद और मंगलमय है। अपवित्र वासनाएं नष्ट हो जाती है, जबकि हृदय निर्मल हो उठता है।
शुक्रताल स्थित दंडी आश्रम में भागवत भक्तों ने भजन कीर्तन के साथ प्रभु का गुणगान किया। कथा व्यास स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि भागवत के श्रवण से हृदय में प्रभु विराजमान होते हैं। रजोगुण और तमोगुण से उत्पन्न होने वाले काम, क्रोध, लोभ, मोह छूट जाते हैं। सतोगुण की वृद्धि होने से मन आनंद से भर जाता है। तत्व ज्ञान होने से चित्त जड़ की ग्रंथि खुल जाती है। सारे संशय निवृत्त हो जाते हैं। कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपने आप में विश्वास को पैदा करो। विश्वास ही हमें दृढ़ता के साथ तय लक्ष्य की ओर ले जाते हुए आत्मविश्वास का भाव पैदा करता है, जो सफलता की गारंटी है। यज्ञमान पूनम राज व राजकुमार राज रहे। स्वामी गुरुदत्त महाराज, केडी शर्मा, आनंद अवस्थी, मनोहर शर्मा, आचार्य गिरीश, दिनेश पांडेय, उमाकांत द्विवेदी, पुनीत कौशिक, गंगादत्त शर्मा, गोपाल शर्मा आदि मौजूद रहे।
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मोरना। दंडी आश्रम में पूज्य संत विष्णु आश्रम जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित भागवत कथा के विराम अवसर पर कथा व्यास स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि भागवत का श्रवण पुण्यप्रद और मंगलमय है। अपवित्र वासनाएं नष्ट हो जाती है, जबकि हृदय निर्मल हो उठता है।
शुक्रताल स्थित दंडी आश्रम में भागवत भक्तों ने भजन कीर्तन के साथ प्रभु का गुणगान किया। कथा व्यास स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने कहा कि भागवत के श्रवण से हृदय में प्रभु विराजमान होते हैं। रजोगुण और तमोगुण से उत्पन्न होने वाले काम, क्रोध, लोभ, मोह छूट जाते हैं। सतोगुण की वृद्धि होने से मन आनंद से भर जाता है। तत्व ज्ञान होने से चित्त जड़ की ग्रंथि खुल जाती है। सारे संशय निवृत्त हो जाते हैं। कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपने आप में विश्वास को पैदा करो। विश्वास ही हमें दृढ़ता के साथ तय लक्ष्य की ओर ले जाते हुए आत्मविश्वास का भाव पैदा करता है, जो सफलता की गारंटी है। यज्ञमान पूनम राज व राजकुमार राज रहे। स्वामी गुरुदत्त महाराज, केडी शर्मा, आनंद अवस्थी, मनोहर शर्मा, आचार्य गिरीश, दिनेश पांडेय, उमाकांत द्विवेदी, पुनीत कौशिक, गंगादत्त शर्मा, गोपाल शर्मा आदि मौजूद रहे।
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