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धार्मिक स्थलों को निशाने बनाने वालों को दी जाए फांसी की सजा: उलमा
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देवबंद (सहारनपुर)। ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर की पांच मस्जिदों पर हमला कर वहां तोड़फोड़ किए जाने की घटना पर देवबंदी उलमा ने रोष प्रकट करते हुए सरकारों और जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि हो सकता है कि जिन लोगों ने न्यूजीलैंड की मस्जिदों में बेकसूर लोगों का कत्लेआम किया, ब्रिटेन की मस्जिदों पर हमला करने वाले उन्हीं के लोग हों। इसलिए उन लोगों से कड़ाई के साथ पूछताछ होनी चाहिए। क्योंकि अधिक संभावना है कि साजिश के तहत गैंग बनाकर यह काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इबादतगाहों पर हमला होना बेहद अफसोसनाक है। इसमें चाहे मंदिर हो, मस्जिद, चर्च या फिर गुरुद्वारा धर्मस्थल सब बराबर होते हैं। यदि उन पर कोई हमला करता है तो यह बड़े शर्म की बात है। मुफ्ती असद ने कहा कि चिंता की बात है कि आज के दौर में इबादतगाह तक महफूज नहीं है तो आम आदमी खुद को सुरक्षित महसूस कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड ने कहा कि ब्रिटेन की मस्जिदों पर हमला होना निंदनीय है। अफसोस की बात यह है कि धर्मस्थलो को उन देशों में निशाना बनाया जा रहा है जो मजबूती के साथ सेक्यूलरिज्म की बात करते हैं। यह अलगाव का नतीजा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह इसकी निंदा करे और निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को फांसी की सजा दिलाए। इसके साथ ही दहशतगर्दी की पुरजोर मुखालिफत करने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में बयान देना चाहिए और मस्जिदों पर हमला करने वालों को सख्त सजा दिलाए जाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि हो सकता है कि जिन लोगों ने न्यूजीलैंड की मस्जिदों में बेकसूर लोगों का कत्लेआम किया, ब्रिटेन की मस्जिदों पर हमला करने वाले उन्हीं के लोग हों। इसलिए उन लोगों से कड़ाई के साथ पूछताछ होनी चाहिए। क्योंकि अधिक संभावना है कि साजिश के तहत गैंग बनाकर यह काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इबादतगाहों पर हमला होना बेहद अफसोसनाक है। इसमें चाहे मंदिर हो, मस्जिद, चर्च या फिर गुरुद्वारा धर्मस्थल सब बराबर होते हैं। यदि उन पर कोई हमला करता है तो यह बड़े शर्म की बात है। मुफ्ती असद ने कहा कि चिंता की बात है कि आज के दौर में इबादतगाह तक महफूज नहीं है तो आम आदमी खुद को सुरक्षित महसूस कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड ने कहा कि ब्रिटेन की मस्जिदों पर हमला होना निंदनीय है। अफसोस की बात यह है कि धर्मस्थलो को उन देशों में निशाना बनाया जा रहा है जो मजबूती के साथ सेक्यूलरिज्म की बात करते हैं। यह अलगाव का नतीजा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह इसकी निंदा करे और निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को फांसी की सजा दिलाए। इसके साथ ही दहशतगर्दी की पुरजोर मुखालिफत करने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में बयान देना चाहिए और मस्जिदों पर हमला करने वालों को सख्त सजा दिलाए जाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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