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केंद्र सरकार की नाक के नीचे बिन बिल व्यापार
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:22 AM IST
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मुजफ्फरनगर। दिल्ली से ही बिना बिल के व्यापार हो रहा है। जनपद सहित यूपी और देश के अन्य जनपदों में जाने वाला माल दलालों और ट्रांसपोर्टर के माध्यम से निश्चित धनराशि लेकर दुकानदारों तक पहुंचाया जा रहा है। यही नहीं मुजफ्फरनगर से देश के विभिन्न राज्यों में जाने वाला रेडीमेड कपड़ा भी यहां बिना बिल और अंडर बिलिंग के साथ भेजा जा रहा है। लाखों रुपये रोज की चपत सरकार को लगाया जा रहा है।
रेलवे के माध्यम से दिल्ली से ही विभिन्न राज्यों को बिना बिल का माल जा रहा है। शनिवार को वाणिज्यकर विभाग के छापे में करीब 40 लाख रुपये की कीमत का माल पकड़ा गया था। वाणिज्य कर विभाग की टीम ने दो सौ नग ऐसे पकड़े गए हैं, जो बिना बिल के थे। केंद्र सरकार की नाक के नीचे से ही व्यापार बिना जीएसटी के हो रहा है। दुकानदार सीधा पूछता है कि बिल का या बिना बिल का। दलालों के माध्यम से माल रेलवे द्वारा और ट्रांसपोर्टर के माध्यम से सीधे व्यापारी के पास पहुंच जाता है। दिल्ली व्यापार का हब है। दिल्ली में ही केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था नहीं कर पाई है कि बिना बिल के माल दूसरे राज्यों में न जाए। मुजफ्फरनगर में माल पहुंचाने का एक हजार रुपये बोरा अतिरिक्त लेकर दलाल व्यापारी के प्रतिष्ठान तक पहुंचाता है। वाणिज्यकर विभाग के छापे से यह साफ हो गया है कि नंबर दो का व्यापार करने वाले रेलवे का इस्तेमाल किस प्रकार कर रहे हैं। कमाल की बात यह है कि कोलकाता के हावड़ा से रेडीमेड कपड़ा यहां जिले में बिना बिल के आता है। दिल्ली तक आने के बाद ट्रेन भी बदली जाती है। रेलवे के अधिकारियों की भी इसमें मिलीभगत है। दिल्ली से जो व्यापार बिना बिल के हो रहा है, उसमें इलेक्ट्रानिक्स का सामान, कपड़ा, किराना का सामान आदि है। इसी के साथ जिले से देश के सभी बड़े शहरों में बच्चों का रेडीमेड कपड़ा जाता है। शहर इसका हब बन चुका है। बड़ी संख्या में दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया है। शहर की दूरी के हिसाब से एक हजार से लेकर 1800 रुपया बोरा तक में देश के किसी भी शहर में यहां से माल भिजवाया जा सकता है। इस धंधे के माफिया यहां इस व्यापार को संभाल रहे है। माल रेलवे से भेजना है या ट्रांसपोर्टर के जरिये यह फैसला दलाल ही करते हैं।
अफसरों की कट रही चांदी
मुजफ्फरनगर। बिना बिल के रेलवे के माध्यम से जो माल आ और जा रहा है, उसमें रेलवे अफसरों, जीआरपी की लगातार सेटिंग रहती है। ट्रांसपोर्टर के माध्यम से जो माल जाता है, उसमें वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों से सीधा लेन-देन होता है। बोरे के हिसाब से दुकानदारों से पैसा एकत्र होता है। उधर. कई लोगों ने बताया कि वाणिज्यकर विभाग जब कभी भी छापा मारता है, उसकी कीमत बढ़ जाती है।
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रेलवे के माध्यम से हो रहा अवैध व्यापार: शुक्ला
मुजफ्फरनगर। वाणिज्यकर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर शरद शुक्ला का कहना है कि रेलवे के माध्यम से अवैध व्यापार हो रहा है और सरकार के टैक्स की चोरी हो रही है। रेलवे स्टेशन पर छापा मारने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। 2012 के बाद अब छापा लग पाया। इसमें डीआरएम रेलवे और डीएम का सहयोग लेना पडा। ट्रांसपोर्ट के माध्यम से अवैध व्यापार की सूचना मिलती है, तो हम कार्रवाई करते हैं। अब रेग्युलर में अभियान चलाया जाएगा।
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रेलवे के माध्यम से दिल्ली से ही विभिन्न राज्यों को बिना बिल का माल जा रहा है। शनिवार को वाणिज्यकर विभाग के छापे में करीब 40 लाख रुपये की कीमत का माल पकड़ा गया था। वाणिज्य कर विभाग की टीम ने दो सौ नग ऐसे पकड़े गए हैं, जो बिना बिल के थे। केंद्र सरकार की नाक के नीचे से ही व्यापार बिना जीएसटी के हो रहा है। दुकानदार सीधा पूछता है कि बिल का या बिना बिल का। दलालों के माध्यम से माल रेलवे द्वारा और ट्रांसपोर्टर के माध्यम से सीधे व्यापारी के पास पहुंच जाता है। दिल्ली व्यापार का हब है। दिल्ली में ही केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था नहीं कर पाई है कि बिना बिल के माल दूसरे राज्यों में न जाए। मुजफ्फरनगर में माल पहुंचाने का एक हजार रुपये बोरा अतिरिक्त लेकर दलाल व्यापारी के प्रतिष्ठान तक पहुंचाता है। वाणिज्यकर विभाग के छापे से यह साफ हो गया है कि नंबर दो का व्यापार करने वाले रेलवे का इस्तेमाल किस प्रकार कर रहे हैं। कमाल की बात यह है कि कोलकाता के हावड़ा से रेडीमेड कपड़ा यहां जिले में बिना बिल के आता है। दिल्ली तक आने के बाद ट्रेन भी बदली जाती है। रेलवे के अधिकारियों की भी इसमें मिलीभगत है। दिल्ली से जो व्यापार बिना बिल के हो रहा है, उसमें इलेक्ट्रानिक्स का सामान, कपड़ा, किराना का सामान आदि है। इसी के साथ जिले से देश के सभी बड़े शहरों में बच्चों का रेडीमेड कपड़ा जाता है। शहर इसका हब बन चुका है। बड़ी संख्या में दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया है। शहर की दूरी के हिसाब से एक हजार से लेकर 1800 रुपया बोरा तक में देश के किसी भी शहर में यहां से माल भिजवाया जा सकता है। इस धंधे के माफिया यहां इस व्यापार को संभाल रहे है। माल रेलवे से भेजना है या ट्रांसपोर्टर के जरिये यह फैसला दलाल ही करते हैं।
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अफसरों की कट रही चांदी
मुजफ्फरनगर। बिना बिल के रेलवे के माध्यम से जो माल आ और जा रहा है, उसमें रेलवे अफसरों, जीआरपी की लगातार सेटिंग रहती है। ट्रांसपोर्टर के माध्यम से जो माल जाता है, उसमें वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों से सीधा लेन-देन होता है। बोरे के हिसाब से दुकानदारों से पैसा एकत्र होता है। उधर. कई लोगों ने बताया कि वाणिज्यकर विभाग जब कभी भी छापा मारता है, उसकी कीमत बढ़ जाती है।
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रेलवे के माध्यम से हो रहा अवैध व्यापार: शुक्ला
मुजफ्फरनगर। वाणिज्यकर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर शरद शुक्ला का कहना है कि रेलवे के माध्यम से अवैध व्यापार हो रहा है और सरकार के टैक्स की चोरी हो रही है। रेलवे स्टेशन पर छापा मारने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। 2012 के बाद अब छापा लग पाया। इसमें डीआरएम रेलवे और डीएम का सहयोग लेना पडा। ट्रांसपोर्ट के माध्यम से अवैध व्यापार की सूचना मिलती है, तो हम कार्रवाई करते हैं। अब रेग्युलर में अभियान चलाया जाएगा।