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दलित राजनीति में उबाल की तैयारी
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:48 AM IST
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मुजफ्फरनगर। भीम आर्मी ने दो अप्रैल के बवाल में जेल में बंद संगठन के पदाधिकारियों व सदस्यों को जेल से छोड़े जाने की मांग की है। रिहाई न होने पर एक दिसंबर से आंदोलन शुरू करने की भी चेतावनी दी है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद के दौरान व्यापक हिंसा हुई थी। इस दौरान कई जगह दुकानें बंद कराने को लेकर दलितों का व्यापारियों से टकराव होने के साथ ही पथराव की घटनाएं हुईं थीं। वहीं, बवालियों को हिरासत में लिए जाने से भड़की भीड़ ने नई मंडी कोतवाली पर ही सीधा हमला कर दिया था, जिसमें दर्जनों वाहन फूंक डाले गए थे। बवाल में एक युवक की गोली लगने से मौत भी हुई थी। मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भीम आर्मी व उससे जुड़े दलित संगठनों के कई पदाधिकारियों समेत अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इनमें से अधिकांश अभी भी सलाखों के पीछे हैं। मंगलवार को भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने गुपचुप तरीके से जिला कारागार पहुंचकर वहां बंद दलित नेता उपकार बावरा समेत अन्य दलित पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। इसके बाद बुधवार को भीम आर्मी के योगेश कुमार, राजन गौतम, बिजेंद्र गौतम, रोहित गौतम, अनुराग बावरा, विनीत, अजय व प्रवेश ने गांव अल्मासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में जेल में बंद दो अप्रैल के बवाल के आरोपियों को बेकसूर बताते हुए उनकी जल्द से जल्द जेल से रिहाई किए जाने की मांग की। कहा कि रिहाई न होने पर एक दिसंबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
एसपी सिटी ओमवीर सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जेल में बंद बवालियों की रिहाई का निर्णय कोर्ट करती है। यदि कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था से खिलवाड़ की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद के दौरान व्यापक हिंसा हुई थी। इस दौरान कई जगह दुकानें बंद कराने को लेकर दलितों का व्यापारियों से टकराव होने के साथ ही पथराव की घटनाएं हुईं थीं। वहीं, बवालियों को हिरासत में लिए जाने से भड़की भीड़ ने नई मंडी कोतवाली पर ही सीधा हमला कर दिया था, जिसमें दर्जनों वाहन फूंक डाले गए थे। बवाल में एक युवक की गोली लगने से मौत भी हुई थी। मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भीम आर्मी व उससे जुड़े दलित संगठनों के कई पदाधिकारियों समेत अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इनमें से अधिकांश अभी भी सलाखों के पीछे हैं। मंगलवार को भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने गुपचुप तरीके से जिला कारागार पहुंचकर वहां बंद दलित नेता उपकार बावरा समेत अन्य दलित पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। इसके बाद बुधवार को भीम आर्मी के योगेश कुमार, राजन गौतम, बिजेंद्र गौतम, रोहित गौतम, अनुराग बावरा, विनीत, अजय व प्रवेश ने गांव अल्मासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में जेल में बंद दो अप्रैल के बवाल के आरोपियों को बेकसूर बताते हुए उनकी जल्द से जल्द जेल से रिहाई किए जाने की मांग की। कहा कि रिहाई न होने पर एक दिसंबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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एसपी सिटी ओमवीर सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जेल में बंद बवालियों की रिहाई का निर्णय कोर्ट करती है। यदि कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था से खिलवाड़ की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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