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हनुमत के दर्शन को देश भर से आते है श्रद्घालु
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:36 AM IST
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25 मार्च से हनुमत जयंती महोत्सव होगा प्रारंभ
मोरना। भागवत की उद्गम स्थली शुकतीर्थ में हनुमत धाम की देश व्यापी महिमा है। देश भर से बजरंग बली के भक्त शुक्रताल में हनुमत के दर्शन को आते हैं। यहां 77 फुट ऊंची वीर हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा है। कभी देश में यह सबसे ऊंची हनुमान की थी। हनुमत जयंती महोत्सव 25 से 31 मार्च मनाया जाएगा। महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में है। महोत्सव में शंकराचार्य, संत और महात्मा बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में गंगा तट के पास स्थित हनुमत धाम में सात दिवसीय हनुमान जयंती महोत्सव की तैयारियां चल रही है। यहां 77 फुट विशालकाय हनुमान जी की प्रतिमा दर्शनीय है। मूर्ति में सात सौ करोड़ राम नाम हस्तलिखित पांडुलिपि समाहित है। हनुमत धाम में भागवत कथाओं की भी अमृत वर्षा होती है। हनुमत धाम के निर्देशन में गंगा तट पर संचालित नक्षत्र वाटिका में ग्रह राशियों के अनुरूप जीवन लाभ उपयोगी वृक्ष लगाए गए हैं। तत्कालीन राज्यपाल पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने नक्षत्र वाटिका का उद्घाटन किया था। शुकतीर्थ में आने वाले श्रद्धालु वाटिका में प्राकृतिक सौंदर्य को देख कर अभिभूत हो उठते हैं। वाटिका में दुलर्भ प्रजाति का कल्पवृक्ष भी मौजूद है। हनुमत धाम के अधिष्ठाता स्वामी केश्वानंद महाराज ने बताया कि हनुमत जयंती महोत्सव की तैयारी अंतिम चरण में है। 28 मार्च को कैबिनेट मंत्री सतीश महाना कार्यक्रम में शामिल होंगे। महोत्सव में जगदगुरु शकंराचार्य वासुदेव सरस्वती, जगदगुरु शकंराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ, महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद, महामंडलेश्वर दिव्यानंद गिरि, गीतामनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी प्रसन्नाचार्य महाराज, स्वामी भानूदेवाचार्य आदि साधु-संत शामिल होंगे।
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मोरना। भागवत की उद्गम स्थली शुकतीर्थ में हनुमत धाम की देश व्यापी महिमा है। देश भर से बजरंग बली के भक्त शुक्रताल में हनुमत के दर्शन को आते हैं। यहां 77 फुट ऊंची वीर हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा है। कभी देश में यह सबसे ऊंची हनुमान की थी। हनुमत जयंती महोत्सव 25 से 31 मार्च मनाया जाएगा। महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में है। महोत्सव में शंकराचार्य, संत और महात्मा बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में गंगा तट के पास स्थित हनुमत धाम में सात दिवसीय हनुमान जयंती महोत्सव की तैयारियां चल रही है। यहां 77 फुट विशालकाय हनुमान जी की प्रतिमा दर्शनीय है। मूर्ति में सात सौ करोड़ राम नाम हस्तलिखित पांडुलिपि समाहित है। हनुमत धाम में भागवत कथाओं की भी अमृत वर्षा होती है। हनुमत धाम के निर्देशन में गंगा तट पर संचालित नक्षत्र वाटिका में ग्रह राशियों के अनुरूप जीवन लाभ उपयोगी वृक्ष लगाए गए हैं। तत्कालीन राज्यपाल पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने नक्षत्र वाटिका का उद्घाटन किया था। शुकतीर्थ में आने वाले श्रद्धालु वाटिका में प्राकृतिक सौंदर्य को देख कर अभिभूत हो उठते हैं। वाटिका में दुलर्भ प्रजाति का कल्पवृक्ष भी मौजूद है। हनुमत धाम के अधिष्ठाता स्वामी केश्वानंद महाराज ने बताया कि हनुमत जयंती महोत्सव की तैयारी अंतिम चरण में है। 28 मार्च को कैबिनेट मंत्री सतीश महाना कार्यक्रम में शामिल होंगे। महोत्सव में जगदगुरु शकंराचार्य वासुदेव सरस्वती, जगदगुरु शकंराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ, महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद, महामंडलेश्वर दिव्यानंद गिरि, गीतामनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी प्रसन्नाचार्य महाराज, स्वामी भानूदेवाचार्य आदि साधु-संत शामिल होंगे।
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