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आठ और 10 रुपये में किस्मत का फैसला

Tue, 20 Mar 2018 11:53 PM IST
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:53 PM IST
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आठ और 10 रुपये में किस्मत का फैसला
हिंदी और गृह विज्ञान के परीक्षक नहीं मिले
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मुजफ्फरनगर।
यूपी बोर्ड ने मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को प्रति उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का मेहनताना तय कर दिया है। इंटर वर्ग में एक कॉपी पर 10 तथा हाईस्कूल वर्ग में आठ रुपये मिलेंगे। ऐसे में साफ है कि मामूली रकम लेकर गुरुजी विद्यार्थियों का भाग्य तय कर रहे हैं। चौथे दिन मूल्यांकन कार्य की चाल जरूर बढ़ी है, लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी है। परीक्षकों की कमी के आगे मूल्यांकन करना कठिन हो रहा है। हिंदी और गृह विज्ञान के परीक्षकों के नहीं मिलने के कारण कांपियों के जांचने का कार्य प्रभावित है।
यूपी बोर्ड का मूल्यांकन 31 मार्च तक समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में भी मूल्यांकन के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने के लिए दो-दो मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर मूल्यांकन कार्य किया जा रहा है। चार दिन से मूल्यांकन कार्य की शिक्षकों के आंदोलन के कारण चाल बिगड़ी हुई है। मंगलवार को कापियों के मूल्यांकन का कार्य थोड़ा तेज हुआ है, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह से काबू में नहीं है। दिलचस्प यह है कि हाईस्कूल में कापियों के मूल्यांकन के लिए प्रति उत्तर पुस्तिका शिक्षक को आठ रुपये तथा इंटरमीडिएट वर्ग में 10 रुपये एक कॉपी जांचने के दिए जाएंगे। एक शिक्षक दिन में 45 से 50 कापियों का मूल्यांकन कर सकता है। मूल्यांकन प्रभारी जीआईसी के प्राचार्य रमेशचंद शर्मा ने बताया कि मूल्यांकन कार्य तेजी से प्रारंभ हो गया है। हालांकि हिंदी और होम साइंस के परीक्षक नहीं मिल पाए है। जिसके चलते स्थिति थोड़ी बेकाबू है। इसके लिए कालेजों से परीक्षक मांगे गए हैं, ताकि मूल्यांकन कार्य समय से पहले पूर्ण किया जा सके।
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मानदेय नहीं तो मूल्यांकन भी नहीं
मुजफ्फरनगर। मूल्यांकन का बहिष्कार करते हुए वित्तविहीन शिक्षकों का धरना मंगलवार को भी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर जारी रहा। बाद में शिक्षक कलक्ट्रेट पहुंचे और डीएम कार्यालय पर ज्ञापन दिया। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा की जिलाध्यक्ष स्नेहलता मिश्रा के नेतृत्व में माध्यमिक विद्यालयों में वित्तविहीन शिक्षक धरनारत हैं। शिक्षक समान कार्य समान वेतन की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत वित्तविहीन शिक्षक पिछले करीब 30 वर्षों से भेदभाव के शिकार होकर भुखमरी के कगार पर हैं। ज्ञापन देने वालों में स्नेहलता मिश्रा, मासूम त्यागी, शशिपाल सिंह, तिरसपाल पुंडीर, देवेंद्र कुमार, नवीन त्यागी, निर्वेश कुमार सिंह, ईश कुमार, अनुज मित्तल, सुमन लता, कौशर जहां, जयवती आदि मौजूद रहे।
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