{"_id":"5a96f3ad4f1c1be13b8b581f","slug":"121519842221-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेद की ज्योति जलती रहे, ओइम का झंडा ऊंचा रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वेद की ज्योति जलती रहे, ओइम का झंडा ऊंचा रहे
Updated Wed, 28 Feb 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। आर्य समाज नई मंडी का तीन दिवसीय वार्षिक होलिकोत्सव में वेद की ज्योति की जलती रहे, ओम का झंडा ऊंचा रहे, का जयघोष किया गया। आचार्य परमवीर आर्य ने कहा कि परमात्मा सबका पालक और पोषक है।
दयानंद मार्ग स्थित आर्य समाज भवन में कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से इंजीनियर रणवीर सिंह ने किया। वेद मंत्रों से किए गए यज्ञ में ब्रह्मा पंडित राकेश आर्य, यज्ञमान अनिल, मंजू त्यागी, मदनलाल एवं सुशीला आर्य रहीं। प्रवचन में आचार्य परमवीर ने सामवेद के मंत्रों की व्याख्या की और प्रभु की प्रार्थना, उपासना और स्तुति का आह्वान किया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य, पवित्र, मर्यादित और वेदानुकूल आचरण ही धर्म है। धर्म की कसौटी आस्था या विश्वास नहीं, बल्कि आचरण ही है। गुणों को ग्रहण करना और अवगुणों का त्याग करना धर्म है। माता-पिता की सेवा, आज्ञापालन, सदाचार, देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और चरित्र का पालन करना धर्म है। परोपकारी बने, ईमानदार रहें, जीवों पर दया करें, यह भी धर्म है। भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क ने भजनों के माध्यम से वैदिक संस्कृति की अलख जगाई। दोपहर बाद कूकड़ा गांव में वैदिक प्रचार किया गया। राष्ट्रीय आर्य संरक्षिणी सभा के अध्यक्ष आचार्य संजीव आर्य, सोमदत्त जिज्ञासु, स्वामी ज्ञानमुनि, स्वामी भजनानंद, स्वामी योगानंद, स्वामी सत्यवेश आदि ने प्रवचन किया। संचालन कृपाशंकर शर्मा ने किया। नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में आनंद स्वरुप आर्य ने रोगियों को औषधियां वितरित की।
विज्ञापन
दयानंद मार्ग स्थित आर्य समाज भवन में कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से इंजीनियर रणवीर सिंह ने किया। वेद मंत्रों से किए गए यज्ञ में ब्रह्मा पंडित राकेश आर्य, यज्ञमान अनिल, मंजू त्यागी, मदनलाल एवं सुशीला आर्य रहीं। प्रवचन में आचार्य परमवीर ने सामवेद के मंत्रों की व्याख्या की और प्रभु की प्रार्थना, उपासना और स्तुति का आह्वान किया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य, पवित्र, मर्यादित और वेदानुकूल आचरण ही धर्म है। धर्म की कसौटी आस्था या विश्वास नहीं, बल्कि आचरण ही है। गुणों को ग्रहण करना और अवगुणों का त्याग करना धर्म है। माता-पिता की सेवा, आज्ञापालन, सदाचार, देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और चरित्र का पालन करना धर्म है। परोपकारी बने, ईमानदार रहें, जीवों पर दया करें, यह भी धर्म है। भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क ने भजनों के माध्यम से वैदिक संस्कृति की अलख जगाई। दोपहर बाद कूकड़ा गांव में वैदिक प्रचार किया गया। राष्ट्रीय आर्य संरक्षिणी सभा के अध्यक्ष आचार्य संजीव आर्य, सोमदत्त जिज्ञासु, स्वामी ज्ञानमुनि, स्वामी भजनानंद, स्वामी योगानंद, स्वामी सत्यवेश आदि ने प्रवचन किया। संचालन कृपाशंकर शर्मा ने किया। नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में आनंद स्वरुप आर्य ने रोगियों को औषधियां वितरित की।
विज्ञापन