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घर के एक-एक जीव को ईश्वर का स्वरुप मनाना चाहिए-साध्वी
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घर के एक-एक जीव को ईश्वर का स्वरूप मानना चाहिए :साध्वी
मोरना। महाशक्ति सिद्धपीठ शुकतीर्थ में वार्षिकोत्सव में साध्वी माता राजनंदेश्वरी ने कहा कि ज्ञान से शांति मिलती है। घर के एक-एक जीव को ईश्वर का स्वरूप मानना चाहिए। भगवान सर्वव्यापक है, आधार है। जहां धर्म है, वहां धरती सब कुछ देती है। जहां धर्म नहीं है, वहां धरती सबकुछ निगल जाती है। भारत भूमि स्वर्ण भूमि है।
महाशक्ति सिद्धपीठ में दो दिवसीय हनुमत जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है। साध्वी ने कहा कि तप करने से मानव की शक्ति बढ़ती है। मानव को आंख, जीभ, मन का संयम रखना बहुत जरूरी होना चाहिए। साधारण मानव अज्ञानवश शक्ति के विनाश में सुख की कल्पना करता है। शक्ति का संग्रह करना महान सुख है। आपकी आंखों में बहुत शक्ति है। आंखों की शक्तियों का विनाश मत करो। इंद्रियां शक्ति का विनाश ही पाप है। जप करने से वासना का विनाश होता है। इससे पूर्व, योगीराज प्रकाशनंद महाराज के सानिध्य में आयोजित हवन यज्ञ में आहुति देकर बजरंग बली की विशेष उपासना की गई। अध्यक्षता स्वामी भजनानंद महाराज तथा संचालन महानंद महाराज ने किया। मोनी बाबा, बहन प्रवेश, परी आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के आयोजन में सत्यप्रकाश त्यागी, राजीव मलोत्रा, सुनील त्यागी, राजकुमार, सीमा, राजेंद्र, चंदा, नेमचंद कर्णवाल आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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मोरना। महाशक्ति सिद्धपीठ शुकतीर्थ में वार्षिकोत्सव में साध्वी माता राजनंदेश्वरी ने कहा कि ज्ञान से शांति मिलती है। घर के एक-एक जीव को ईश्वर का स्वरूप मानना चाहिए। भगवान सर्वव्यापक है, आधार है। जहां धर्म है, वहां धरती सब कुछ देती है। जहां धर्म नहीं है, वहां धरती सबकुछ निगल जाती है। भारत भूमि स्वर्ण भूमि है।
महाशक्ति सिद्धपीठ में दो दिवसीय हनुमत जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है। साध्वी ने कहा कि तप करने से मानव की शक्ति बढ़ती है। मानव को आंख, जीभ, मन का संयम रखना बहुत जरूरी होना चाहिए। साधारण मानव अज्ञानवश शक्ति के विनाश में सुख की कल्पना करता है। शक्ति का संग्रह करना महान सुख है। आपकी आंखों में बहुत शक्ति है। आंखों की शक्तियों का विनाश मत करो। इंद्रियां शक्ति का विनाश ही पाप है। जप करने से वासना का विनाश होता है। इससे पूर्व, योगीराज प्रकाशनंद महाराज के सानिध्य में आयोजित हवन यज्ञ में आहुति देकर बजरंग बली की विशेष उपासना की गई। अध्यक्षता स्वामी भजनानंद महाराज तथा संचालन महानंद महाराज ने किया। मोनी बाबा, बहन प्रवेश, परी आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के आयोजन में सत्यप्रकाश त्यागी, राजीव मलोत्रा, सुनील त्यागी, राजकुमार, सीमा, राजेंद्र, चंदा, नेमचंद कर्णवाल आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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