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हिंदी साहित्य के शिखर पर पहुंचे प्रभाकर
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:40 AM IST
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हिंदी साहित्य के शिखर पर पहुंचे विष्णु प्रभाकर
मीरापुर। विश्व के साहित्यिक पटल पर हिंदी का परचम लहराने वाले साहित्यकारों में मीरापुर में जन्में पद्मभूषण विष्णु प्रभाकर का विशेष स्थान है। देश के महान साहित्यकार शरतचंद्र चटोपाध्याय के जीवन पर लिखा उपन्यास आवारा मसीहा, प्रभाकर को हिंदी साहित्य के शिखर पर ले गया। उन्होंने विद्यार्थी जीवन से ही लिखना शुरू कर दिया था, वह 97 वर्ष तक जीये।
मीरापुर निवासी पिता दुर्गा प्रसाद तथा माता महादेवी द्वारा बचपन से ही बालक विष्णु को संस्कारित किया गया। प्राइमरी शिक्षा मीरापुर में पूर्ण करने के बाद पढ़ाई के लिए वे अपने मामा के घर हिसार चले गए। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ प्राइवेट नौकरी भी की और हिंदी में प्रभाकर उपाधि के साथ संस्कृत में प्रज्ञा तथा अंग्रेजी में बीए की डिग्री प्राप्त की। विष्णु प्रभाकर के जीवन पर महात्मा गांधी के दर्शन का गहरा असर पड़ा और स्वतंत्रता संग्राम में अपनी लेखनी के माध्यम से आजादी के लिए लेख लिखे। देश के वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमचंद, यशपाल, जयनेंद्र आदि के साथ रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनई। विष्णु प्रभाकर ने पहला नाटक ‘हत्या के बाद’ लिखा और उसे स्वयं अनेक शहरों में मंचित किया। अपने एक मित्र नाथुराम शर्मा के कहने पर विष्णु जी बंगला साहित्यकार शरद चन्द्र के जीवन पर ‘‘आवारा मसीहा ’’ लिख कर अमर हो गये। उन्होंने कहानी, आत्मकथा, जीवनी, यात्रा व्रतान्त, उपन्यास, नाटक आदि समस्त विधाओं में लिखकर हिन्दी साहित्य में चार चांद लगाए।
दान में दी जन्मभूमि पर प्रतिमा स्थापित होगी
मीरापुर। साहित्यकार विष्णु प्रभाकर ने मीरापुर में अपनी जन्मभूमि को समाज के हित में दान कर दी थी। करीब 30 वर्ष पूर्व दान की गयी इस भूमि पर आज एक सत्संग भवन व दुर्गा मंदिर स्थापित है। इस स्थल पर कस्बे के अधिकांश धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। सत्संग भवन की व्यवस्था देख रहे विपिन गोयल ने बताया कि जल्द ही विष्णु जी की एक प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
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शिवचंद्र नागर ने भी दी पहचान
मीरापुर। कस्बे में ही जन्मे पंडित शिव चन्द्र नागर भी ख्याति प्राप्त साहित्यकार रहे हैं। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सरकारों द्वारा सम्मानित महाराष्ट्र में अपनी लेखनी से हिंदी का परचम फहराने वाले साहित्यकार रहे। अपनी लेखन विधाओं के माध्यम से लौकिक प्रेम के साथ आध्यात्मिक स्नेह एवं अलौकिक सत्ता का अहसास कराया। 24 सितम्बर 2008 को अपने डाक्टर बेटे हेमन्त के पास मुंबई में रहते हुए स्वर्ग सिधारने वाले साहित्यकार पं. शिवचन्द नागर भी मीरापुर की एक पहचान है।
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मीरापुर। विश्व के साहित्यिक पटल पर हिंदी का परचम लहराने वाले साहित्यकारों में मीरापुर में जन्में पद्मभूषण विष्णु प्रभाकर का विशेष स्थान है। देश के महान साहित्यकार शरतचंद्र चटोपाध्याय के जीवन पर लिखा उपन्यास आवारा मसीहा, प्रभाकर को हिंदी साहित्य के शिखर पर ले गया। उन्होंने विद्यार्थी जीवन से ही लिखना शुरू कर दिया था, वह 97 वर्ष तक जीये।
मीरापुर निवासी पिता दुर्गा प्रसाद तथा माता महादेवी द्वारा बचपन से ही बालक विष्णु को संस्कारित किया गया। प्राइमरी शिक्षा मीरापुर में पूर्ण करने के बाद पढ़ाई के लिए वे अपने मामा के घर हिसार चले गए। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ प्राइवेट नौकरी भी की और हिंदी में प्रभाकर उपाधि के साथ संस्कृत में प्रज्ञा तथा अंग्रेजी में बीए की डिग्री प्राप्त की। विष्णु प्रभाकर के जीवन पर महात्मा गांधी के दर्शन का गहरा असर पड़ा और स्वतंत्रता संग्राम में अपनी लेखनी के माध्यम से आजादी के लिए लेख लिखे। देश के वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमचंद, यशपाल, जयनेंद्र आदि के साथ रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनई। विष्णु प्रभाकर ने पहला नाटक ‘हत्या के बाद’ लिखा और उसे स्वयं अनेक शहरों में मंचित किया। अपने एक मित्र नाथुराम शर्मा के कहने पर विष्णु जी बंगला साहित्यकार शरद चन्द्र के जीवन पर ‘‘आवारा मसीहा ’’ लिख कर अमर हो गये। उन्होंने कहानी, आत्मकथा, जीवनी, यात्रा व्रतान्त, उपन्यास, नाटक आदि समस्त विधाओं में लिखकर हिन्दी साहित्य में चार चांद लगाए।
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दान में दी जन्मभूमि पर प्रतिमा स्थापित होगी
मीरापुर। साहित्यकार विष्णु प्रभाकर ने मीरापुर में अपनी जन्मभूमि को समाज के हित में दान कर दी थी। करीब 30 वर्ष पूर्व दान की गयी इस भूमि पर आज एक सत्संग भवन व दुर्गा मंदिर स्थापित है। इस स्थल पर कस्बे के अधिकांश धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। सत्संग भवन की व्यवस्था देख रहे विपिन गोयल ने बताया कि जल्द ही विष्णु जी की एक प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
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शिवचंद्र नागर ने भी दी पहचान
मीरापुर। कस्बे में ही जन्मे पंडित शिव चन्द्र नागर भी ख्याति प्राप्त साहित्यकार रहे हैं। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सरकारों द्वारा सम्मानित महाराष्ट्र में अपनी लेखनी से हिंदी का परचम फहराने वाले साहित्यकार रहे। अपनी लेखन विधाओं के माध्यम से लौकिक प्रेम के साथ आध्यात्मिक स्नेह एवं अलौकिक सत्ता का अहसास कराया। 24 सितम्बर 2008 को अपने डाक्टर बेटे हेमन्त के पास मुंबई में रहते हुए स्वर्ग सिधारने वाले साहित्यकार पं. शिवचन्द नागर भी मीरापुर की एक पहचान है।