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आतंकवाद से पूरी दुनिया में इंसानियत को खतरा
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:39 AM IST
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आतंकवाद से पूरी दुनिया में इंसानियत को खतरा
मुजफ्फरनगर। मुहर्रम को लेकर शिया समुदाय में सोग छा गया है। मजलिस में मौलाना ने खिताब फरमाया कि 1400 साल से अब तक मानसिक विकृति के लोग आतंक का खेल खेल रहे हैं। आतंकवाद से पूरी दुनिया में इंसानियत को खतरा है। कर्बला का वाक्या सुनकर सोगवारों की आंखें जार-जार हो उठी। मजलिस में मातम पुर्सी की गई।
कटैहड़ा सैय्यदान में हजरत इमाम बारगाह में सैय्यद नदीम जाफर जैदी ने खिताब फरमाया कि यजीद ने अपना आतंक कायम रखने और दीन-ए-इस्लाम पर हुकूमत के लिए पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार समेत तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा। यहां पर हजरत इमाम हुसैन ने अपने छह के पुत्र अली असगर समेत 72 लोगों के साथ कुर्बानी दी। मजलिस में हजरत इमाम हुसैन का गम मनाया गया। मजलिस में खिताब फरमाया गया कि 1400 साल से मानसिक विकृति के लोग आतंक का खेल खेल रहे हैं। आतंकवाद पूरी दुनिया में इंसानियत के लिए खतरा है। आज भी यजीद जैसे आतंकी दुनिया में आतंक मचा रहे हैं। इनके खात्मे के लिए हजरत इमाम हुसैन के तरीकों को अपनाना पड़ेगा। इस दौरान मजलिस में मातमपुर्सी की गई। सैय्यद रजा, शबी रजा, हसन रजा, बाबर अली, अजहर अली, शहदाब आलम आदि मौजूृद रहे।
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मुजफ्फरनगर। मुहर्रम को लेकर शिया समुदाय में सोग छा गया है। मजलिस में मौलाना ने खिताब फरमाया कि 1400 साल से अब तक मानसिक विकृति के लोग आतंक का खेल खेल रहे हैं। आतंकवाद से पूरी दुनिया में इंसानियत को खतरा है। कर्बला का वाक्या सुनकर सोगवारों की आंखें जार-जार हो उठी। मजलिस में मातम पुर्सी की गई।
कटैहड़ा सैय्यदान में हजरत इमाम बारगाह में सैय्यद नदीम जाफर जैदी ने खिताब फरमाया कि यजीद ने अपना आतंक कायम रखने और दीन-ए-इस्लाम पर हुकूमत के लिए पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार समेत तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा। यहां पर हजरत इमाम हुसैन ने अपने छह के पुत्र अली असगर समेत 72 लोगों के साथ कुर्बानी दी। मजलिस में हजरत इमाम हुसैन का गम मनाया गया। मजलिस में खिताब फरमाया गया कि 1400 साल से मानसिक विकृति के लोग आतंक का खेल खेल रहे हैं। आतंकवाद पूरी दुनिया में इंसानियत के लिए खतरा है। आज भी यजीद जैसे आतंकी दुनिया में आतंक मचा रहे हैं। इनके खात्मे के लिए हजरत इमाम हुसैन के तरीकों को अपनाना पड़ेगा। इस दौरान मजलिस में मातमपुर्सी की गई। सैय्यद रजा, शबी रजा, हसन रजा, बाबर अली, अजहर अली, शहदाब आलम आदि मौजूृद रहे।
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