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निजी स्कूलों का शिक्षा विभाग पर 32 लाख बकाया
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निजी स्कूलों का शिक्षा विभाग पर 32 लाख बकाया
मुजफ्फरनगर। अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की फीस का करीब 32 लाख रुपया बकाया है। बीते तीन वर्षों में मात्र नौ माह की ही फीस का भुगतान मिल सका है। स्कूलों ने आगे प्रवेश लेने से आनाकानी करनी शुरू कर दी है।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बच्चों को निशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया गया है। 14 साल तक के बच्चों को कक्षा एक से आठवीं तक निशुल्क शिक्षा दी जाती है। इस अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को भी शामिल किया गया है। निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत प्रवेश आरटीई के तहत लेने होंगे। जनपद में तीन वर्षों से निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश तो हुए, लेकिन शासन ने उनकी फीस का भुगतान नहीं किया। स्कूलों का करीब 32 लाख रुपया शिक्षा विभाग पर बकाया है। बीते तीन शिक्षा सत्र में लगभग 422 छात्र-छात्राओं ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लिया है। इनकी यूनिफार्म और कोर्स का भुगतान तो सीधे अभिभावकों के खातों में दे दिया गया, लेकिन स्कूलों को मिलने वाली फीस नहीं दी जा सकी। अब नए शिक्षा सत्र के लिए प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। पहली फीस नहीं मिलने से परेशान स्कूलों ने नए प्रवेश को लेकर आनाकानी करनी शुरू कर दी है।
शासन को वापस हो गई धनराशि
मुजफ्फरनगर। वित्तीय वर्ष 2018-19 के आखिरी दिन शासन ने आरटीई के तहत फीस के भुगतान की धनराशि जिले को भेजी थी, लेकिन इसका भुगतान नहीं हो सका। बिल तो ट्रेजरी पहुंच गए थे, लेकिन साइट बंद हो गई। इसके चलते शासन से मिली धनराशि वापस हो गई।
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तीन शिक्षा सत्रों में हुए प्रवेश और फीस का भुगतान
शिक्षा सत्र प्रवेश फीस भुगतान
2016-17 62 चार माह
2017-18 222 दो माह
2018-19 138 तीन माह
इन्होंने कहा...
फीस भुगतान का मामला शासन स्तर का है। इस संबंध में उच्च स्तर पर अवगत कराया जा चुका है - योगेश शर्मा, बीएसए।
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मुजफ्फरनगर। अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की फीस का करीब 32 लाख रुपया बकाया है। बीते तीन वर्षों में मात्र नौ माह की ही फीस का भुगतान मिल सका है। स्कूलों ने आगे प्रवेश लेने से आनाकानी करनी शुरू कर दी है।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बच्चों को निशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया गया है। 14 साल तक के बच्चों को कक्षा एक से आठवीं तक निशुल्क शिक्षा दी जाती है। इस अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को भी शामिल किया गया है। निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत प्रवेश आरटीई के तहत लेने होंगे। जनपद में तीन वर्षों से निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश तो हुए, लेकिन शासन ने उनकी फीस का भुगतान नहीं किया। स्कूलों का करीब 32 लाख रुपया शिक्षा विभाग पर बकाया है। बीते तीन शिक्षा सत्र में लगभग 422 छात्र-छात्राओं ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लिया है। इनकी यूनिफार्म और कोर्स का भुगतान तो सीधे अभिभावकों के खातों में दे दिया गया, लेकिन स्कूलों को मिलने वाली फीस नहीं दी जा सकी। अब नए शिक्षा सत्र के लिए प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। पहली फीस नहीं मिलने से परेशान स्कूलों ने नए प्रवेश को लेकर आनाकानी करनी शुरू कर दी है।
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शासन को वापस हो गई धनराशि
मुजफ्फरनगर। वित्तीय वर्ष 2018-19 के आखिरी दिन शासन ने आरटीई के तहत फीस के भुगतान की धनराशि जिले को भेजी थी, लेकिन इसका भुगतान नहीं हो सका। बिल तो ट्रेजरी पहुंच गए थे, लेकिन साइट बंद हो गई। इसके चलते शासन से मिली धनराशि वापस हो गई।
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तीन शिक्षा सत्रों में हुए प्रवेश और फीस का भुगतान
शिक्षा सत्र प्रवेश फीस भुगतान
2016-17 62 चार माह
2017-18 222 दो माह
2018-19 138 तीन माह
इन्होंने कहा...
फीस भुगतान का मामला शासन स्तर का है। इस संबंध में उच्च स्तर पर अवगत कराया जा चुका है - योगेश शर्मा, बीएसए।