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आयुर्वेद के अनुसार बनायें दिनचर्या: डीएम
Updated Fri, 22 Jun 2018 12:48 AM IST
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आयुर्वेद के अनुसार बनाएं दिनचर्या : डीएम
मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी राजीव शर्मा ने कहा कि बड़ी संख्या में अस्पताल, नर्सिंगहोम, निजी चिकित्सक आदि है किंतु बीमारियां बढ़ रही है। अस्वस्थ होने का असली कारण हमारी अनियमित दिनचर्या एवं लाइफ स्टाइल है। आयुर्वेद की बताई दिनचर्या अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं।
जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी पंडाल में जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आयुष परिचर्चा में उपस्थित जनसमूह एवं चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथिक तथा आईएमए के चिकित्सकों को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि 75 से 90 प्रतिशत रोग मन की अशांति के कारण ही उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि योग को जीवन का एक हिस्सा बनाएं। अनियमित जीवनशैली जनितरोगों को योग के माध्यम से निजात पाई जा सकती है। सूर्य नमस्कार, मंडूकासन, शीर्षासन, नाड़ी शोधन नमस्कार के द्वारा मधुमेह से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि भुुजंगासन, धनुरासन एवं वीरासन करके दमा रोगी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पद्मासन, पश्चिमोतानासन, पवन मुक्तासन एवं चंद्रभेदी प्राणायम उच्च रक्तचाप के लिए रामबाण है। इसी प्रकार संर्वागासन, उत्तानपादासन, पाद हस्तासन, भस्त्रिका एवं भ्रामरी प्राणायाम करके स्मरण शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इसके पूर्व, विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी इलाज के बारे में बताते हुए कहा कि ये पद्धतियां कोई नई नही बल्कि प्राचीन हैं। भारत में इन विधियों के द्वारा इलाज किया जाता रहा है। पद्मश्री बालेंद्र प्रकाश ने बताया कि आयुर्वेद रसों के द्वारा किस प्रकार ब्लड कैंसर और अन्य दूसरी घातक बीमारियों से निजात पायी जा सकती है। इस अवसर पर अध्यक्ष भारतीय चिकित्सा परिषद डॉ सुभाषचंद शर्मा ने भी अपना अध्यक्षीय संबोधन दिया। एडीएम प्रशासन हरीशचंद्र, नगर पालिका अध्यक्ष अंजू अग्रवाल सहित चिकित्सा विभाग के सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी राजीव शर्मा ने कहा कि बड़ी संख्या में अस्पताल, नर्सिंगहोम, निजी चिकित्सक आदि है किंतु बीमारियां बढ़ रही है। अस्वस्थ होने का असली कारण हमारी अनियमित दिनचर्या एवं लाइफ स्टाइल है। आयुर्वेद की बताई दिनचर्या अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं।
जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी पंडाल में जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आयुष परिचर्चा में उपस्थित जनसमूह एवं चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथिक तथा आईएमए के चिकित्सकों को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि 75 से 90 प्रतिशत रोग मन की अशांति के कारण ही उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि योग को जीवन का एक हिस्सा बनाएं। अनियमित जीवनशैली जनितरोगों को योग के माध्यम से निजात पाई जा सकती है। सूर्य नमस्कार, मंडूकासन, शीर्षासन, नाड़ी शोधन नमस्कार के द्वारा मधुमेह से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि भुुजंगासन, धनुरासन एवं वीरासन करके दमा रोगी लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पद्मासन, पश्चिमोतानासन, पवन मुक्तासन एवं चंद्रभेदी प्राणायम उच्च रक्तचाप के लिए रामबाण है। इसी प्रकार संर्वागासन, उत्तानपादासन, पाद हस्तासन, भस्त्रिका एवं भ्रामरी प्राणायाम करके स्मरण शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इसके पूर्व, विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी इलाज के बारे में बताते हुए कहा कि ये पद्धतियां कोई नई नही बल्कि प्राचीन हैं। भारत में इन विधियों के द्वारा इलाज किया जाता रहा है। पद्मश्री बालेंद्र प्रकाश ने बताया कि आयुर्वेद रसों के द्वारा किस प्रकार ब्लड कैंसर और अन्य दूसरी घातक बीमारियों से निजात पायी जा सकती है। इस अवसर पर अध्यक्ष भारतीय चिकित्सा परिषद डॉ सुभाषचंद शर्मा ने भी अपना अध्यक्षीय संबोधन दिया। एडीएम प्रशासन हरीशचंद्र, नगर पालिका अध्यक्ष अंजू अग्रवाल सहित चिकित्सा विभाग के सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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