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सर्दी के सितम ने बढ़ा दी ब्रोंकल एलर्जी
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:21 AM IST
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मुजफ्फरनगर। हाड़ कंपा देने वाली ठंड सेहत पर भारी पड़ रही है। सर्दी के सितम ने ब्रोंकल एलर्जी के मरीजों में इजाफा कर दिया है। धूल, धुआं और धुंध ने बीमारियां बढ़ा दी हैं। बच्चे और बुजुर्ग ब्रोंकल एलर्जी की चपेट में आ गए हैं। इससे सांस लेने की नलियों में सूजन, फेफड़ों, दिल की नसें सिकुड़ रही हैं। अस्थमा बढ़ने का अधिक खतरा मंडरा रहा है। ब्रोंकल एलर्जी मरीजों में टीबी की जांच कराई जा रही है।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के फिजिशियन विभाग में सर्दी की मार से पीड़ित रोगियों संख्या बढ़ गई है। गर्मी में जहां यह आंकड़ा 100 के पार भी नहीं होता है, वहीं हाड़ कंपा देने वाली ठंड में यह संख्या 350 के पार पहुंच गई है। इनमें 80 फीसदी लोग ब्रोंकल एलर्जी पीड़ित के निकल रहे हैं। खास कर बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में जल्द आते हैं। इसके अलावा 12 से 14 मरीजों की क्षय रोग विभाग पर रोजाना जांच की जा रही है। इनमें वह मरीज हैं, जो सांस के साथ टीबी होने की संभावना से डरे हुए हैं। हालांकि में करीब पांच से छह रोगियों में प्रथम चरण की टीबी सामने आ रही है।
यह ब्रोंकल एलर्जी का कारण
ब्रोंकल एलर्जी फैलने के पीछे सर्दी का मौसम 90 फीसदी जिम्मेदार है। ठंड में तापमान कम होने के कारण प्रदूषण के कण जमीन पर बैठते हैं, जो ऊपर नहीं उठ पाते हैं। धूल और धुएं के कण कोहरे के साथ ठंडी हवाओं के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। जो दिल, फेफड़ों की सबसे बारीक सांस कोशिका पर कब्जा कर लेते हैं। साथ ही शरीर में बनने वाला बलगम और खून भी गाढ़ा हो जाता है, जो कोशिकाओं में फंस जाता है।
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भट्ठियों का धुआं अधिक घातक
गली-मोहल्लों के साथ कालोनियों में चाय-पकौड़े तलने के लिए रखी भट्ठियों से निकलने वाला धुआं अधिक घातक है। यह धुआं हवा में मिलता है, जो कोहरे-धुंध के कारण आसमान नहीं पहुंचता है, जो आसपास के वातावरण को जल्द चपेट में लेता है।
एलर्जी से ऐसे करें बचाव
- बच्चों, बुजुर्गों को धूल, धुएं से बचाएं।
- सुबह-शाम घर से कम बाहर निकलें।
- गर्म वातावरण में रहे और गर्म पानी पीएं।
- खट्टी चीजों और ठंडे पानी से दूरी बनाएं।
- सांस के रोगियों को समय पर दवाईयां दे।
- हरी सब्जियों का प्रयोग करें।
चिकित्सक बोले...
ब्रोंकल एलर्जी के मरीज 80 फीसदी पहुंच रहे हैं। इनमें सांस लेेने में दिक्कतें और हार्ट की समस्याएं अधिक हैं। ब्रोंकल एलर्जी सर्दी में अधिक प्रभावी होती है। जिसमें दिल, फेफड़ों के साथ स्वांस नली प्रभावित होती है। इसका समय पर उपचार जरूरी है। - डॉ. योगेंद्र त्रिखा, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।
------------
क्षय रोग विभाग पर रोजाना ऐसे मरीजों की जांच हो रही है, जिनमें संभावित टीबी के लक्षण हों। इनमें ब्रोंकल एलर्जी से पीड़ित भी है। सर्दी में इस बीमारी पीड़ित लोगों में टीबी की संभावना अधिक होती है। रोजाना 10 से 12 लोगों की जांच हो रही है। - डॉ. लोकेश कुमार, डीटीओ, जिला क्षय रोग विभाग।
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स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के फिजिशियन विभाग में सर्दी की मार से पीड़ित रोगियों संख्या बढ़ गई है। गर्मी में जहां यह आंकड़ा 100 के पार भी नहीं होता है, वहीं हाड़ कंपा देने वाली ठंड में यह संख्या 350 के पार पहुंच गई है। इनमें 80 फीसदी लोग ब्रोंकल एलर्जी पीड़ित के निकल रहे हैं। खास कर बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में जल्द आते हैं। इसके अलावा 12 से 14 मरीजों की क्षय रोग विभाग पर रोजाना जांच की जा रही है। इनमें वह मरीज हैं, जो सांस के साथ टीबी होने की संभावना से डरे हुए हैं। हालांकि में करीब पांच से छह रोगियों में प्रथम चरण की टीबी सामने आ रही है।
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यह ब्रोंकल एलर्जी का कारण
ब्रोंकल एलर्जी फैलने के पीछे सर्दी का मौसम 90 फीसदी जिम्मेदार है। ठंड में तापमान कम होने के कारण प्रदूषण के कण जमीन पर बैठते हैं, जो ऊपर नहीं उठ पाते हैं। धूल और धुएं के कण कोहरे के साथ ठंडी हवाओं के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। जो दिल, फेफड़ों की सबसे बारीक सांस कोशिका पर कब्जा कर लेते हैं। साथ ही शरीर में बनने वाला बलगम और खून भी गाढ़ा हो जाता है, जो कोशिकाओं में फंस जाता है।
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भट्ठियों का धुआं अधिक घातक
गली-मोहल्लों के साथ कालोनियों में चाय-पकौड़े तलने के लिए रखी भट्ठियों से निकलने वाला धुआं अधिक घातक है। यह धुआं हवा में मिलता है, जो कोहरे-धुंध के कारण आसमान नहीं पहुंचता है, जो आसपास के वातावरण को जल्द चपेट में लेता है।
एलर्जी से ऐसे करें बचाव
- बच्चों, बुजुर्गों को धूल, धुएं से बचाएं।
- सुबह-शाम घर से कम बाहर निकलें।
- गर्म वातावरण में रहे और गर्म पानी पीएं।
- खट्टी चीजों और ठंडे पानी से दूरी बनाएं।
- सांस के रोगियों को समय पर दवाईयां दे।
- हरी सब्जियों का प्रयोग करें।
चिकित्सक बोले...
ब्रोंकल एलर्जी के मरीज 80 फीसदी पहुंच रहे हैं। इनमें सांस लेेने में दिक्कतें और हार्ट की समस्याएं अधिक हैं। ब्रोंकल एलर्जी सर्दी में अधिक प्रभावी होती है। जिसमें दिल, फेफड़ों के साथ स्वांस नली प्रभावित होती है। इसका समय पर उपचार जरूरी है। - डॉ. योगेंद्र त्रिखा, वरिष्ठ फिजिशियन, जिला अस्पताल।
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क्षय रोग विभाग पर रोजाना ऐसे मरीजों की जांच हो रही है, जिनमें संभावित टीबी के लक्षण हों। इनमें ब्रोंकल एलर्जी से पीड़ित भी है। सर्दी में इस बीमारी पीड़ित लोगों में टीबी की संभावना अधिक होती है। रोजाना 10 से 12 लोगों की जांच हो रही है। - डॉ. लोकेश कुमार, डीटीओ, जिला क्षय रोग विभाग।