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वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मांगा जनसहयोग
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:26 AM IST
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वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मांगा जनसहयोग
मुजफ्फरनगर। गंगा के किनारे और वन्य जीव सेंक्चुरी में साइबेरियन पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। सेंक्चुरी में चार माह तक प्रवासी पक्षी निवास करेंगे। सर्दी का मौसम शुरू होने के कारण शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं। वन्य जीवों और वन्य विहार की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने भी पहल प्रारंभ कर दी है। इसके लिए जन सहयोग मांगा गया है।
वन्य जीव विहार का जनपद में तकरीबन 4826.501 हेक्टेयर हिस्सा आता है। यह क्षेत्र पूरी तरह से वन रिजर्व है। सेंक्चुरी का मोरना, शुक्रताल, जानसठ रेंज में सबसे अधिक क्षेत्र है। यहां पर आमतौर पर वन्य जीवों के साथ अनेक दुर्घटना होती है। सेंक्चुरी पूरी तरह से यहां पर कस्बों, गांवों से घिरी है, जिसके चलते वन विभाग को व्यवस्था बनाने में अधिक समय लगता है। सेंक्चुरी के पांच किलोमीटर के दायरे में चहल-पहल अधिक होने से वन्य जीवों का भी खतरा रहता है। इस मौसम में गंगा के किनारे विदेशी पक्षियों की चहचाहट से गूंजने लगते हैं। साइबेरियन पक्षी नवंबर के प्रथम सप्ताह से सेंक्चुरी पहुंचने लगते हैं, जो फरवरी माह के अंत में स्वदेश लौटते हैं। ऐसे में इन पक्षियों का शिकार करने के लिए भी शिकारी सक्रिय होते हैं। शिकारियों पर नजर रखने और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने जन सहयोग मांगा है। मुख्य रूप से जानसठ, मोरना रेंज के लोगों से सहयोग की अपील की गई है। डीएफओ सूरज ने बताया कि वन्य जीवों की सुरक्षा, पेड़-पौधों की रक्षा के लिए जनसहयोग मांगा गया है। इसके लिए सार्वजनिक रूप से पत्र चस्पा किए गए हैं। साथ ही रेंज के अधिकारियों को भी आगाह किया गया है।
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मुजफ्फरनगर। गंगा के किनारे और वन्य जीव सेंक्चुरी में साइबेरियन पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। सेंक्चुरी में चार माह तक प्रवासी पक्षी निवास करेंगे। सर्दी का मौसम शुरू होने के कारण शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं। वन्य जीवों और वन्य विहार की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने भी पहल प्रारंभ कर दी है। इसके लिए जन सहयोग मांगा गया है।
वन्य जीव विहार का जनपद में तकरीबन 4826.501 हेक्टेयर हिस्सा आता है। यह क्षेत्र पूरी तरह से वन रिजर्व है। सेंक्चुरी का मोरना, शुक्रताल, जानसठ रेंज में सबसे अधिक क्षेत्र है। यहां पर आमतौर पर वन्य जीवों के साथ अनेक दुर्घटना होती है। सेंक्चुरी पूरी तरह से यहां पर कस्बों, गांवों से घिरी है, जिसके चलते वन विभाग को व्यवस्था बनाने में अधिक समय लगता है। सेंक्चुरी के पांच किलोमीटर के दायरे में चहल-पहल अधिक होने से वन्य जीवों का भी खतरा रहता है। इस मौसम में गंगा के किनारे विदेशी पक्षियों की चहचाहट से गूंजने लगते हैं। साइबेरियन पक्षी नवंबर के प्रथम सप्ताह से सेंक्चुरी पहुंचने लगते हैं, जो फरवरी माह के अंत में स्वदेश लौटते हैं। ऐसे में इन पक्षियों का शिकार करने के लिए भी शिकारी सक्रिय होते हैं। शिकारियों पर नजर रखने और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने जन सहयोग मांगा है। मुख्य रूप से जानसठ, मोरना रेंज के लोगों से सहयोग की अपील की गई है। डीएफओ सूरज ने बताया कि वन्य जीवों की सुरक्षा, पेड़-पौधों की रक्षा के लिए जनसहयोग मांगा गया है। इसके लिए सार्वजनिक रूप से पत्र चस्पा किए गए हैं। साथ ही रेंज के अधिकारियों को भी आगाह किया गया है।
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