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पालिकाध्यक्ष को लेकर दलों की स्थिति साफ नहीं
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:46 AM IST
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सपा अपनी सूची से पहले भाजपा का कर रही इंतजार
मुजफ्फरनगर। नगर पालिकाध्यक्ष पद पर प्रत्याशी को लेकर दलों की स्थिति अभी तक साफ नहीं है। सभी दल एक दूसरे का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा में ब्राह्मण लड़ाए या वैश्य इस पर मंथन हो रहा है। सपा के सामने पाल और वैश्य प्रत्याशी है। कांग्रेस सपा और भाजपा का इंतजार कर रही है। बसपा मुस्लिम को लड़ाने का मन बना चुकी है।
निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी राजनीतिक दलों ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। भाजपा में इस पर मंथन खत्म नहीं हुआ है कि टिकट वैश्य को देना है या ब्राह्मण और पंजाबी में से किसी एक को। पार्टी ब्राहमण को चुनाव लड़ाना तो चाहती है, लेकिन इस बात से डर रही है कि कहीं वैश्य मत नाराज न हो जाए। शहर में वैश्य मतों की संख्या हिंदू में सर्वाधिक है। सपा में भी भाजपा का इंतजार किया जा रहा है। भाजपा यदि वैश्य को चुनाव लड़ाती है तो सपा पाल को मैदान में उतार सकती है। यदि ब्राह्मण को टिकट मिलता है तो वह वैश्य पर दांव चलेगी। कांग्रेस इन दोनों दलों का इंतजार कर रही है। कांग्रेस बीते चुनाव को दोहराने के प्रयास में जुटी है। यदि दोनो दलों से वैश्य नहीं आया तो कांग्रेस वैश्य पर दांव लगाएगी। बसपा में मंथन के बाद मुस्लिम को चुनाव लड़ाने की तैयारी है। दो दिन में सभी दलों की स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिकाध्यक्ष पद पर प्रत्याशी को लेकर दलों की स्थिति अभी तक साफ नहीं है। सभी दल एक दूसरे का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा में ब्राह्मण लड़ाए या वैश्य इस पर मंथन हो रहा है। सपा के सामने पाल और वैश्य प्रत्याशी है। कांग्रेस सपा और भाजपा का इंतजार कर रही है। बसपा मुस्लिम को लड़ाने का मन बना चुकी है।
निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी राजनीतिक दलों ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। भाजपा में इस पर मंथन खत्म नहीं हुआ है कि टिकट वैश्य को देना है या ब्राह्मण और पंजाबी में से किसी एक को। पार्टी ब्राहमण को चुनाव लड़ाना तो चाहती है, लेकिन इस बात से डर रही है कि कहीं वैश्य मत नाराज न हो जाए। शहर में वैश्य मतों की संख्या हिंदू में सर्वाधिक है। सपा में भी भाजपा का इंतजार किया जा रहा है। भाजपा यदि वैश्य को चुनाव लड़ाती है तो सपा पाल को मैदान में उतार सकती है। यदि ब्राह्मण को टिकट मिलता है तो वह वैश्य पर दांव चलेगी। कांग्रेस इन दोनों दलों का इंतजार कर रही है। कांग्रेस बीते चुनाव को दोहराने के प्रयास में जुटी है। यदि दोनो दलों से वैश्य नहीं आया तो कांग्रेस वैश्य पर दांव लगाएगी। बसपा में मंथन के बाद मुस्लिम को चुनाव लड़ाने की तैयारी है। दो दिन में सभी दलों की स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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