फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   101 year old bike standing proudly in Khatauli

खतौली में शान से खड़ी है 101 साल पुरानी बाइक

Fri, 17 Jun 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2022 11:39 PM IST
विज्ञापन
101 year old bike standing proudly in Khatauli
मुजफ्फरनगर : खतौली में खड़ी ट्राइअम्फ कंपनी की 101 साल पुरानी बाइक। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। नए दौर में बाइक के रोज नए मॉडल बाजार में उतरते हैं और गुम हो जाते हैं। पुराने होते ही दुपहिया वाहनों को बेचकर नए वाहन लेने का चलन भी लोगों के बीच बढ़ा है। एक जमाना ऐसा भी था, जब लोग वाहन खरीदते और उसे सालोंसाल संभालकर और सहेजकर रखते थे। खतौली के होटल व्यवसायी शारिक राना के पास ब्रिटिश कंपनी की 101 साल पुरानी बाइक है, जिसे उनके परदादा खान बहादुर हाजी न्याज मोहम्मद खान ने खरीदा था। बाइक आज भी सही स्थिति में है। इंजन चालू स्थिति में है। राना ने बाइक की मरम्मत कराकर अपने होटल पर खड़ा किया तो यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनीं हुई है।
विज्ञापन

कभी बाजार में उतरते ही छा गया था मॉडल
ब्रिटिश ट्राइअम्फ बाइक कंपनी ने 1902 में व्यवसाय शुरू किया था। 1921 में 498सीसी की सोलो मॉडल बनाया गया, जिसे वाहन के शौकीनों ने खूब पसंद किया। तब देश में अंग्रेजी राज था। अंग्रेज अधिकारियों के अलावा स्थानीय वाहन के शौकीनों ने भी इस मॉडल को खूब खरीदा था।
विज्ञापन

58 साल पहले आकर बस गए थे खतौली
होटल व्यवसायी शारिक राना के परदादा खान बहादुर हाजी न्याज मोहम्मद खान मूल रूप से उत्तराखंड में रानीखेत के पास मजखाली के जमींदार थे। कभी उनकी न्याज स्टेट थी। जमींदार परिवार ने 1974 में खतौली आकर होटल का व्यवसाय शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। चीतल ग्रांड खतौली के एमडी शारिक राना ने बताया कि उनके परदादा ने यह बाइक खरीदी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

कबाड़ में मिली बाइक, फिर नए सिरे से कराई तैयार
शारिक राना बताते हैं कि उन्हें घर के स्टोर में कबाड़ में यह बाइक मिली। उन्होंने इसे ठीक कराया, शौक के तौर पर चलाया भी।
एक घंटे में जाती थी करीब 15 किमी
दिलचस्प बात यह है कि बाइक एक घंटे में करीब 15 किमी ही जाती थी। पेट्रोल से यह स्टार्ट होती थी और इसके बाद यह केरोसिन से चलती थी।
इनाम भी जीते और पहचान दिलाई
शारिक राना बताते हैं कि करीब 30 साल पहले तक वह बाइक को प्रदर्शनी में ले जाते थे। इनाम भी मिले और पहचान भी दिलाई, लेकिन अब कहीं नहीं ले जाते। बाइक दिल्ली-देहरादून रोड स्थित अपने होटल के एक कोने में खड़ी कर दी है। यहां आने वाले लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed