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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Waking up from sleep at two in the night son asked when will the mother come

रात के दो बजे नींद से उठकर पापा से पूछता है बेटा, मम्मी कब आएंगी...

Sat, 22 May 2021 03:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 22 May 2021 03:03 AM IST
सार

  • चुनाव ड्यूटी के बाद कोरोना से जंग हारने वाले शिक्षकों के परिजन बोले चुनाव ने तो हमारा घर ही उजाड़ दिया

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Waking up from sleep at two in the night son asked when will the mother come
अपने परिवार के साथ नीलम... फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

बड़ी मन्नतों से विवाह के 17 वर्ष बाद बेटा हुआ तो खुशी का ठिकाना न था। लेकिन सपनों को अधूरा छोड़ नीलम इस दुनिया से विदा हो गईं। बेटे को इंजीनियर बनाने का उनका सपना अधूरा रह गया। डीआरएम कार्यालय में तैनात उनके पति कहते हैं कि नीलम के जाने से मेरा घर ही उजड़ गया। बेटा रात में दो बजे उठकर पूछता है मम्मी कब आएंगी।

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पंचायत चुनाव में भगतपुर टांडा ब्लॉक में ड्यूटी करने वाली उच्च प्राथमिक विद्यालय मजरा दुपेड़ा की शिक्षिका नीलम सक्सेना (50) की कोरोना संक्रमित होने से मृत्यु हो गई थी। उनके पति अनुराग रेलवे के डीआरएम कार्यालय में हैं। रामपुर निवासी अनुराग ने रुंधती आवाज में बताया कि पंचायत चुनावों ने तो उनकी दुनिया ही उजाड़ दी है। 26 मई को मतदान कराने के बाद नीलम आईं तो बुखार था। 
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पहले रेलवे अस्पताल फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। कोरोना संक्रमित बताया गया था। इलाज के दौरान ही 2 मई को नीलम ने दम तोड़ दिया। शव भी घर नहीं लाया जा सका और बाहर ही अंतिम संस्कार हुआ। बेटे को भी नहीं बताया। बेटे से यही कहा कि मम्मी अस्पताल में हैं लेकिन अब कई बार रात के दो-दो बजे उठकर बेटा सवाल करने लगता है कि पापा, मम्मी कब आएंगी तो उन पर कोई जवाब नहीं बनता।
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बेटी को इंजीनियर बनाने का निशीबाला का सपना पूरा करेंगे प्रवीण
बुद्धि विहार निवासी प्रवीण कुमार की पत्नी निशीबाला (41) प्राथमिक विद्यालय मंसूरपुर कुंदरकी में प्रधानाध्यापिका थीं। प्रवीण ने बताया कि 12 अप्रैल को उन्होंने पंचायत चुनाव
की ट्रेनिंग की थी, उसके बाद ही उन्हें खांसी और हल्के बुखार की शिकायत होनी शुरू हो गई थी। इस वजह से मतदान कराने नहीं गईं, लेकिन उनकी तबीयत खराब होती गई। 29 अप्रैल कोहालत बिगड़ी तो निजी अस्पताल ले गए लेकिन जान नहीं बची।


परिवार में दो बेटी कर्णिका और अन्नया हैं। छह साल का बेटा आरव है। बड़ी बेटी कर्णिका आईआईटी की तैयारी कर रही है। निशिबाला बड़ी बेटी कर्णिका को इंजीनियर बनाना चाहती थी लेकिन उससे पहले ही परिवार छोड़ र्गइं। प्रवीण कुमार का कहना है कि वह निशीबाला का सपना जरूर पूरा करेंगे। हालांकि मां के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी कर्णिका ही संभाल रही है। मां की मौत के बाद से बच्चे गुमसुम हैं।

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