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UP: मुरादाबाद में 100 लोगों की जान पर भारी पड़ी थी अफवाह, 1979 में हुए हादसे को याद कर कांप उठते हैं पीड़ित

Thu, 04 Jul 2024 10:46 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 04 Jul 2024 10:46 AM IST
सार

मुरादाबाद के लोग वर्ष 1979 में हाथरस जैसा हादसा झेल चुके हैं। जब लाइनपार इलाके को जोड़ने वाले कपूर कंपनी पुल पर दशहरे के दिन भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। 

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UP: Rumour cost lives 100 people in Moradabad, incident like Hathras happened in 1979
मुरादाबाद का कपूर कंपनी पुल - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस जैसा हादसा मुरादाबाद के लोग भी झेल चुके हैं। लाइनपार क्षेत्र को शहर से जोड़ने वाले कपूर कंपनी पुल पर 45 साल पहले अफवाह के कारण दशहरा वाले दिन भगदड़ मची थी। जिसमें 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। उस भयावह मंजर को याद कर आज भी पीड़ित और चश्मदीद सिहर उठते हैं। 

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इस हादसे की चश्मदीद आशियाना कॉलोनी की 82 वर्षीय आशा जैमिनी बताती हैं कि एक अक्तूबर 1979 की बात है। तब हमारा परिवार शहर के खालसा सराय मोहल्ले में रहता था। मैं अपने पति डॉ. शिव अवतार जैमिनी के साथ दशहरा मेला दिखने गई थी। पांच वर्षीय बेटा काव्य सौरभ जैमिनी हमारे साथ मौजूद था।
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शाम करीब साढ़े छह बजे मेला देखने के बाद घर लौट रहे थे। कपूर कंपनी पुल के बीचों बीच पहुंच गए थे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एक एक इंच आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। इसी दौरान किसी ने पुल टूटने की अफवाह फैला दी थी, जिससे भीड़ बेकाबू हो गई।

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डॉ. शिव अवतार जैमिनी ने बेटे काव्य सौरभ को कंधे पर बैठा लिया था। हम किसी तरह रेलिंग पकड़ते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान रेलवे सिक लाइन के पास पुल से एक जीना दिखा। जिसके एक तरफ साइकिल के लिए रनवे बना हुआ था। मैंने और मेरे पति ने रनवे पर सरकना शुरू कर दिया था।

जैसे ही हम लाइन के पास पहुंचे। इसी दौरान रेलिंग टूट कर नीचे गिर गई थी। जिसमें हम बाल-बाल बच गए थे। दिल्ली रोड मिलन विहार निवासी अशोक मल्होत्रा ने बताया कि उस वक्त हम बारादरी मोहल्ले में रहते थे। मैं मेला देखकर घर लौट रहा था। इसी दौरान पुल पर भगदड़ मच गई थी।

वो हादसा आज भी याद कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जीलाल स्ट्रीट  मोहल्ला निवासी मनोज रस्तोगी ने बताया कि मुझे और मेरे छोटे भाई अतुल, विपुल को ताऊ मेला दिखाने ले गए थे। जिस वक्त भगदड़ मची थी, उस वक्त हम पुल पार कर चुके थे।

पीछे मुड़कर देखा तो चीख पुकार मच रही थी। वो मंजर बहुत भयावह था। किसी ने पुल टूटने की अफवाह फैला दी थी। सुभाष गुप्ता ने बताया कि उस दिन ख्याली राम शास्त्री उत्तर प्रदेश की हेमवती नंदन बहुगुणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने थे।

वो शहर में पहुंचते थे कि हादसे की जानकारी मिल गई थी। उस वक्त मैं उनके साथ ही था। हम लोग मौके पर पहुंचे और अफसरों से जानकारी की तो पता चला कि पुल टूटने की अफवाह की वजह से भगदड़ मची थी।

संभल की दो और महिलाओं की मौत
हाथरस में सत्संग के दौरान मची भगदड़ में बनियाठेर के गांव अफजलपुर डरौली निवासी कमला (60) और ओरछी गांव निवासी कमला (45) की भी मौत हो गई। देर रात दोनों की मौत की पुष्टि हुई। जबकि गुन्नौर के गांव उदयभानपुर निवासी पिंकी शर्मा की मौत की पुष्टि हादसे के बाद ही हो गई थी।

हादसे में अब तक संभल की तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है। बनियाठेर थाना क्षेत्र के गांव अफजलपुर डरौली निवासी कमला पत्नी रामभरोसे मंगलवार को बिलारी कोतवाली इलाके के गांव चिड़िया भवन से अपने भतीजे सोनू के साथ हाथरस सत्संग में शामिल होने गई थीं। जबकि उसकी बेटी रेखा गांव के लोगों के साथ गई थी। सभी लोग सत्संग में पहुंचे। दोपहर में सत्संग के बाद वहां भगदड़ मच गई।

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