UP: ट्रेन के बंद बैग में मिला नवजात बना 'वीर', अब गोद लेने के लिए 40 से ज्यादा परिवारों ने किया आवेदन
मुरादाबाद में पटना-चंडीगढ़ स्पेशल ट्रेन में बैग में बंद मिले नवजात को गोद लेने के लिए 40 से ज्यादा आवेदन मिले हैं। अब नवजात की हालत में सुधार है। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट से भी हटा दिया गया है। महिला स्टाफ ने बच्चे का नाम वीर रखा है।
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मुरादाबाद में 22 जून को पटना-चंडीगढ़ स्पेशल ट्रेन में बैग में बंद मिले नवजात को गोद लेने के लिए कतार लगने लगी है। कारा की वेबसाइट पर 40 से ज्यादा नए आवेदन आ गए हैं। दूसरी ओर नवजात की सेहत में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। ऑक्सीजन सपोर्ट हटा दिया गया है, अब वह खुलकर सांस ले पा रहा है।
हालांकि दूध पीने में अभी उसे समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। इसलिए डॉक्टर ड्रिप से ही उसे पोषण दे रहे हैं। नवजात की मुस्कान पर एसएनसीयू की सभी महिला स्टाफ की ममता उमड़ पड़ती है। स्टाफ ने उसका नाम वीर रख दिया है। स्टाफ का कहना है कि ट्रेन के एसी कोच में बच्चा जिस तरह घंटों बैग में बंद रहा।
इसके बाद चार दिन तक अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच जूझता रहा, उसे वीर न कहें तो क्या कहें। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक का कहना है कि बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत थी।
उसे टीएमयू रेफर करने की तैयारी चल रही थी लेकिन उसकी हालत में सुधार होने लगा। अब उसे ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत नहीं है। फीडिंग शुरू होने के कुछ दिन बाद उसे चाइल्ड लाइन को सौंप देंगे। 10 दिन में डॉक्टरों व स्टाफ को वीर से स्नेह हो गया है।
एसी कोच में मिले नवजात के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो गई थी। करीब 10 घंटे तक बैग में बंद रहने के कारण ऐसा हुआ है। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में डॉक्टरों ने उसे सी-पैप मशीन के सपोर्ट पर रखा ताकि सांस लेने में आसानी हो। डाॅक्टरों के अनुसार 72 घंटे तक बच्चे को सी-पैप के सहारे रखा गया इसके बाद सामान्य ऑक्सीजन दी गई।
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि यदि दो घंटे और उसे बैग से नहीं निकाला जाता तो बचाना मुश्किल हो जाता। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक ने बताया कि बच्चे को हाईपॉक्सिया हो गया था। उसका रेस्पिरेटरी रेट सामान्य से बहुत ज्यादा था। इसलिए उसे मशीन के सहारे पर भर्ती रखा गया।
दूसरी ओर आरपीएफ कमांडेंट उत्कर्ष नारायन ने बताया कि इस घटना में आरपीएफ व जीआरपी की टीमें संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। जिस बैग में बच्चे को बंद करके ट्रेन के एसी कोच में रखा गया था, उसमें एक सिम मिला है। इसके जरिये पुलिस बच्चे को रखने वाले तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
लक्ष्मी को चेन्नई के डॉक्टर दंपती ने लिया गोद
धनतेरस के मौके पर थाना मैनाठेर में गागन तिराह के पास झाड़ियों में मिली बच्ची लक्ष्मी को चेन्नई के डॉक्टर दंपती ने गोद ले लिया है। लक्ष्मी के कूल्हे पर कुत्तों ने बुरी तरह जख्म कर दिया था। उसे भी डेढ़ माह महिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखा गया था।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसकी प्लास्टिक सर्जरी कराई। करीब तीन माह बाल आश्रय गृह में दुलार पाने के बाद लक्ष्मी को गोद लिया गया। अब वह चेन्नई में डॉक्टर दंपति के साथ स्वस्थ व सुरक्षित जीवन जी रही है।