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25 फीसदी बुजुर्ग डिप्रेंशन के शिकार : डा. श्रीवास्तव

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2020 01:15 AM IST
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twenty five percent old age people are depressed
मुरादाबाद। बच्चों की बेरुखी बुजुर्गों को इंटरनेट की लत लगा रही है। इसका परिणाम यह है कि बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ के जीरियाटिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डा. श्रीकांत श्रीवास्तव ने कहा कि पारिवारिक तनाव, बच्चों की बेरुखी और अकेलेपन में इंटरनेट की लत बुजुर्गों के लिए घातक है। वे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। दिमाग के सोचने और समझने की क्षमता कम होने से बुजुर्ग बच्चों जैसा व्यवहार करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक एवं पारिवारिक परिवेश में 25 फीसदी बुजुर्ग इसके शिकार हैं।
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डा. श्रीवास्तव रविवार को मुरादाबाद में आईएमए की सीएमई में व्याख्यान देने आए थे। उन्होंने कहा अभिभावक अपने लिए कभी नहीं सोचते हैं। बच्चों की परवरिश, पढ़ाई लिखाई और उनका घर बसाने में उनकी जिंदगी गुजर जाती है। बुढ़ापे में वहीं बच्चे अभिभावकों को पुराने सामान की तरह अलग कर देते हैं। ऐसे में बुजुर्ग अकेलापन महसूस करते हैं। खुद को व्यस्त रखने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं होता है। मानसिक रूप से टूटने से बीमारियां भी शरीर को जकड़ने लगती हैं। इंटरनेट बुजुर्गों का साथी बन रहा है। इसकी लत उनको और अधिक मानसिक बीमारी बना रही है। दिमाग सिकुड़ने लगता है। भूलने की बीमारी हो जाती है। 25 फीसदी बुजुर्ग आज मानसिक तनाव के शिकार हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को 50 साल की उम्र से ही खुद के लिए सोचने की जरूरत है। शारीरिक रूप से खुद को स्वस्थ रखने के लिए नियमित वॉक करने की जरूरी है। इससे नकारात्मक सोच नहीं आती है।
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