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Moradabad News: जीएसटी की समस्याओं से परेशान व्यापारियों ने पीएम व सीएम को भेजा ज्ञापन
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मुरादाबाद। जीएसटी की समस्याओं से परेशान व्यापारी सुरक्षा फोरम संस्थान ने प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री से कठिनाइयों को दूर करने की मांग की है। इस मामले में फोरम की तरफ से जीएसटी नियमों में व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए 16 सूत्री ज्ञापन भेजा है।
फोरम के अध्यक्ष विजय मदान ने बकाया कि जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष 2017-18, 2018-19 में जब व्यापारी, अधिवक्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट जीएसटी के नियमों को पूर्ण रूप से समझ नहीं पाए थे। उस समय सभी व्यापारियों के पास जीएसटी रिटर्न अपलोड करने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं थे। उस समय जीएसटी फार्मों को अपलोड करने में गलतियां हुईं | सरकार ने भी समय-समय पर बयान जारी कर भूलवश हुई गलतियों के लिए व्यापारियों को तंग न करने की अपील की थी। यह भी कहा गया कि यदि व्यापारी ने जीएसटी रिटर्न में सेल विवरण नहीं भी भरा है और वह क्रेता व्यापारी को इस बात का प्रमाण पत्र दे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 के अपलोड किए गए जीएसटी रिटर्न मिलान करने में अधिकारियों के सामने कुछ गलतियां आई हैं। कुछ व्यापारियों ने अपने फॉर्म जीएसटीआर -1 विलंब से अपलोड किए थे। अपलोड करते समय पूरा टैक्स जमा कर दिया है, लेकिन अधिकारी उस आईटीसी को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने रिटर्न विलंब से अपलोड किया है। अध्यक्ष विजय मदान ने बताया कि बकाया कि क्रेता व्यापारी से विक्रेता द्वारा जमा किए गए टैक्स को दोबारा 18 प्रतिशत ब्याज सहित मांग कर रहे हैं। जिससे व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। व्यापारी को उस अपराध के लिए दंडित किया जा रहा है, जो उसने किया ही नहीं है। व्यापारी से सप्लाई चेन मांगा जाना अनुचित एवं अव्यवहारिक है। धारा 73 के तहत नोटिस में, धारा 73(9) के तहत कर की मांग से अलग न्यूनतम जुर्माना 20,000 है। यहां तक कि 100 रुपये की एक छोटे कर पर 20,000 रुपये जुर्माना लगता है । यह डीलरों के लिए बहुत कठोर प्रताड़ना है। करदाताओं पर लगाए गए ब्याज और जुर्माने के संबंध में एक माफी योजना की घोषणा की जानी चाहिए।करदाता कर का भुगतान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उस पर लगाए गए ब्याज और जुर्माने का भुगतान देने में दिक्कतें होगी। एक वित्तीय वर्ष में धारा 61, 73 और 74 के तहत नोटिस कई बार दिया जाता है।
एक विशिष्ट वित्तीय वर्ष के मामले को एक साथ फाइनल करने की व्यवस्था होनी चाहिए। पहले से दाखिल रिटर्न में किसी भी त्रुटि या चूक को ठीक करने के लिए जीएसटी रिटर्न को संशोधित करने की व्यवस्था होनी चाहिए। वैट के प्रावधानों के समान जीएसटी में एक पक्षीय मूल्यांकन को फिर खोला जाना चाहिए। आयकर की तरह जीएसटी में फेसलेस असेसमेंट योजना शुरू होना चाहिए। एसआईबी में, डीलरों को डीआरसी-3 के माध्यम से कर का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है और अधिकारी ऐसे कर के भुगतान होने तक निर्धारित परिसर को नहीं छोड़ता है। इस स्थिति में कर जमा करने की एक व्यवस्था होनी चाहिए, जिसे कर निर्धारण अधिकारी ही अंतिम रूप दे। यदि एसआईबी के दौरान डीआरसी -3 द्वारा कर का भुगतान किया गया है। बाद में मूल्यांकन अधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि की गई है तो कोई डीलर अपील दायर नहीं कर सकता है। क्योंकि उस स्थिति में कोई मांग उत्पन्न नहीं होगी। जीएसटीआर-9 में आईटीसी के प्रारंभिक शेष का उल्लेख करने का कोई प्रावधान नहीं है। आपूर्तिकर्ता ने गलती से ईवे बिल पर गलत तारीख दर्ज कर दी तो भारी जुर्माना लगता है।जीएसटी रिटर्न में खरीदार द्वारा खरीद की सूची अपलोड करने का विकल्प होना चाहिए। जीएसटी की इन कमियों के चलते व्यापारियों में रोष व्याप्त है।
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कोरोना काल के केस वापस करने की मांग
संगठन के राष्ट्रीय संयोजक अशोक कुमार गोयल ने कहा है व्यापारी समाज का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कोरोना कल में व्यापारियों पर हुए मुकदमे वापस होने चाहिए। व्यापारी समाज को पेंशन दिलवाने के लिए कार्य कर रहा है गोयल साहब ने कहा उनके जीवन का हर पल देश एवं व्यापारी समाज की सेवा के लिए न्योछावर है
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फोरम के अध्यक्ष विजय मदान ने बकाया कि जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष 2017-18, 2018-19 में जब व्यापारी, अधिवक्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट जीएसटी के नियमों को पूर्ण रूप से समझ नहीं पाए थे। उस समय सभी व्यापारियों के पास जीएसटी रिटर्न अपलोड करने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं थे। उस समय जीएसटी फार्मों को अपलोड करने में गलतियां हुईं | सरकार ने भी समय-समय पर बयान जारी कर भूलवश हुई गलतियों के लिए व्यापारियों को तंग न करने की अपील की थी। यह भी कहा गया कि यदि व्यापारी ने जीएसटी रिटर्न में सेल विवरण नहीं भी भरा है और वह क्रेता व्यापारी को इस बात का प्रमाण पत्र दे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 के अपलोड किए गए जीएसटी रिटर्न मिलान करने में अधिकारियों के सामने कुछ गलतियां आई हैं। कुछ व्यापारियों ने अपने फॉर्म जीएसटीआर -1 विलंब से अपलोड किए थे। अपलोड करते समय पूरा टैक्स जमा कर दिया है, लेकिन अधिकारी उस आईटीसी को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने रिटर्न विलंब से अपलोड किया है। अध्यक्ष विजय मदान ने बताया कि बकाया कि क्रेता व्यापारी से विक्रेता द्वारा जमा किए गए टैक्स को दोबारा 18 प्रतिशत ब्याज सहित मांग कर रहे हैं। जिससे व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। व्यापारी को उस अपराध के लिए दंडित किया जा रहा है, जो उसने किया ही नहीं है। व्यापारी से सप्लाई चेन मांगा जाना अनुचित एवं अव्यवहारिक है। धारा 73 के तहत नोटिस में, धारा 73(9) के तहत कर की मांग से अलग न्यूनतम जुर्माना 20,000 है। यहां तक कि 100 रुपये की एक छोटे कर पर 20,000 रुपये जुर्माना लगता है । यह डीलरों के लिए बहुत कठोर प्रताड़ना है। करदाताओं पर लगाए गए ब्याज और जुर्माने के संबंध में एक माफी योजना की घोषणा की जानी चाहिए।करदाता कर का भुगतान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उस पर लगाए गए ब्याज और जुर्माने का भुगतान देने में दिक्कतें होगी। एक वित्तीय वर्ष में धारा 61, 73 और 74 के तहत नोटिस कई बार दिया जाता है।
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एक विशिष्ट वित्तीय वर्ष के मामले को एक साथ फाइनल करने की व्यवस्था होनी चाहिए। पहले से दाखिल रिटर्न में किसी भी त्रुटि या चूक को ठीक करने के लिए जीएसटी रिटर्न को संशोधित करने की व्यवस्था होनी चाहिए। वैट के प्रावधानों के समान जीएसटी में एक पक्षीय मूल्यांकन को फिर खोला जाना चाहिए। आयकर की तरह जीएसटी में फेसलेस असेसमेंट योजना शुरू होना चाहिए। एसआईबी में, डीलरों को डीआरसी-3 के माध्यम से कर का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है और अधिकारी ऐसे कर के भुगतान होने तक निर्धारित परिसर को नहीं छोड़ता है। इस स्थिति में कर जमा करने की एक व्यवस्था होनी चाहिए, जिसे कर निर्धारण अधिकारी ही अंतिम रूप दे। यदि एसआईबी के दौरान डीआरसी -3 द्वारा कर का भुगतान किया गया है। बाद में मूल्यांकन अधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि की गई है तो कोई डीलर अपील दायर नहीं कर सकता है। क्योंकि उस स्थिति में कोई मांग उत्पन्न नहीं होगी। जीएसटीआर-9 में आईटीसी के प्रारंभिक शेष का उल्लेख करने का कोई प्रावधान नहीं है। आपूर्तिकर्ता ने गलती से ईवे बिल पर गलत तारीख दर्ज कर दी तो भारी जुर्माना लगता है।जीएसटी रिटर्न में खरीदार द्वारा खरीद की सूची अपलोड करने का विकल्प होना चाहिए। जीएसटी की इन कमियों के चलते व्यापारियों में रोष व्याप्त है।
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कोरोना काल के केस वापस करने की मांग
संगठन के राष्ट्रीय संयोजक अशोक कुमार गोयल ने कहा है व्यापारी समाज का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कोरोना कल में व्यापारियों पर हुए मुकदमे वापस होने चाहिए। व्यापारी समाज को पेंशन दिलवाने के लिए कार्य कर रहा है गोयल साहब ने कहा उनके जीवन का हर पल देश एवं व्यापारी समाज की सेवा के लिए न्योछावर है