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Moradabad: ताऊ-भतीजे की हत्या में बाप-बेट समेत तीन को आजीवन कारावास, 16 साल पहले हुआ था दोहरा हत्याकांड

Wed, 21 Sep 2022 01:12 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 21 Sep 2022 01:12 PM IST
सार

अदालत ने दोहरे हत्याकांड में बाप-बेटे समेत चार मुलजिमों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

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Three people sentenced to life imprisonment in Moradabad double murder
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

मूंढापांडे के सोलह साल पुराने दोहरे हत्याकांड में एडीजे (चार) की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने बाप-बेटे समेत चार मुलजिमों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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मूंढापांडे थानाक्षेत्र के नाजरपुर भारत सिंह गांव निवासी यशपाल ने 8 नवंबर 2006 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कहा गया कि उसके पिता जमुना प्रसाद ने गांव के उत्तर पश्चिमी दिशा की ओर जंगल बराबर कर करीब ढाई बीघा जमीन खेती योग्य बनाई थी। इस जमीन को वादी के रिश्ते के ताऊ महावीर सिंह अपनी बताते थे। 8 नवंबर की सुबह करीब साढ़े आठ बजे वादी अपने पिता जमुना प्रसाद और भाई गिरिराज को साथ लेकर जमीन जोतने गए थे। तभी महावीर, महेश, ताहर, दिनेश, सियाराम, प्रेमपाल, ईश्वर दयाल, अर्जुन, हरिओम, रतिराम और चंद्रपाल आ गए।
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जिनके हाथों में लाठी डंडे और हथियार थे। इन लोगों ने आते ही जुताई कर रहे पक्ष पर हमलाकर दिया। शोर मचाने पर हमारे ताऊ बदन सिंह, ओमपाल, छत्रपाल, केदार किशन पाल और बहन जयदेई, बट्टू आ गए। इनको आता देख आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। फायरिंग में जुताई कर रहे पक्ष से गिरिराज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ताऊ बदन सिंह की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। परिवार के अन्य लोग घायल हो गए थे।
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पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ शैलेंद्र सचान की अदालत में पेश हुआ। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह और दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि मुकदमे के दौरान आरोपी ताहर सिंह, रतिराम, महावीर और चंद्रपाल की मौत हो चुकी है। जबकि गिरीश पाल, महेश, दिनेश, प्रेमपाल, और हरिओम के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें दोष मुक्त किया गया। मुकदमे के अन्य आरोपी ईश्वर दयाल, उसके बेटे अर्जुन और भतीजे सियारा को दोहरे हत्याकांड का दोषी करार देते हुए। आजीवन कारावास की सजा के साथ प्रत्येक पर पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सुनवाई के दौरान चार अभियुक्तों की हो चुकी है मौत
मूंढापांडे थाने में वादी यशपाल सिंह की तहरीर बारह लोगों के खिलाफ हत्या, जान लेवा हमला, बलवा समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मुकदमे की दौरान आरोपी ताहर सिंह, रतिराम, महावीर और चंद्रपाल की मौत हो चुकी है। वहीं, हत्याकांड में आरोपी रहे गिरीश पाल, महेश, दिनेश, प्रेमपाल, और हरिओम  के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें दोष मुक्त किया गया।

केस के वादी यशपाल को भी हो चुकी उम्रकैद की सजा
2006 में यशपाल के ताऊ बदन सिंह और भाई गिरिराज सिंह की हत्या की गई थी। इस हत्याकांड के तीन साल बाद दूसरे पक्ष के महावीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में यशपाल सिंह, महेंद्र, ओमपाल, मुलायम सिंह, जमुना प्रसाद व शीशपाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत ने महावीर सिंह की हत्या में महेंद्र, ओमपाल और यशपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जबकि बाकी तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। यशपाल और ओमपाल आगरा की जेल में बंद हैं, जबकि महेंद्र बरेली में जेल में बंद है।

55 पेज का आदेश, मुकदमे में 16 गवाह ने दिए बयान
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि इस मुकदमे में सोलह लोगों ने अदालत में आकर अपने बयान अंकित कराए। जिसमें गवाह ओमवती के साथ अन्य मौके पर मौजूद गवाहों ने अपनी गवाही दी जबकि इन्हीं गवाह मे से पांच गवाहों ने गिरीशपाल, महेश,दिनेश हरिओम और प्रेम पाल के खिलाफ गवाही नहीं दी। जिन्हें पूरे मामले में निर्दोष माना गया । जिसके बाद अदालत ने मामले के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए अपना 55 पेज का फैसला सुनाया। जिसमें तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और चार आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया ।

विवादित जमीन के अभिलेखों से भी साफ नहीं हुआ जमीन किसकी
जिस जमीन को हासिल करने के लिए दो लोगों का मर्डर हुआ। वो जमीन किसकी थी इस बात की पुष्टि हल्का लेखपाल भी नहीं कर पाया। अदालत ने ग्राम के लेखपाल को इस बात की पुष्टि के लिए तलब किया था कि विवादित जमीन के अभिलेखों मे किसका नाम दर्ज है, लेकिन लेखपाल भी इस बात का सही जवाब देने में असमर्थ रहा।

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