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मुरादाबाद में भी दो डाक्टर समेत तीन कोरोना वारियर्स गंवा चुके हैं जान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2020 02:39 AM IST
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three corona varis have died in moradabad
मुरादाबाद। कोरोना की रोकथाम के लिए कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों के डाक्टर और मेडिकल स्टाफ फ्रंट लाइन में खड़े होकर संक्रमण से जंग लड़ रहे हैं। देशभर में कई डाक्टर और मेडिकल स्टाफ कर्मचारी अपनी जान गंवा भी चुके हैं। बीते दिनों संसद में जान गंवाने वाले वारियर्स का मुद्दा उठने के बाद प्रदेश सरकार ने जिलेवार रिपोर्ट मांगी है। मुरादाबाद में भी तीन वारियर्स की कोविड ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से मौत हुई है। तीन सौ से अधिक डाक्टर और स्टाफ कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
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संसद में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य राज्यमंत्री के बयान के बाद से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुरादाबाद आईएमए इकाई ने भी सरकार की आलोचना की है। आईएमए की पूर्व अध्यक्ष डा. बबीता गुप्ता ने कहा कि जान गंवाने वाले वारियर्स को शहीद का दर्जा दिया जाए। केंद्र सरकार को जान गंवाने वाले वारियर्स के आंकड़े जनता को बताने चाहिए। सीएमओ डा. एमसी गर्ग के मुताबिक जान गंवाने वाले वारियर्स की जानकारी शासन को भेज दी है। आमतौर पर यह रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन संसद में सवाल उठने के बाद सरकार ने आंकड़े मांगे हैं।
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- मुरादाबाद में कोविड ड्यूटी के दौरान संक्रमण की चपेट में आने से दो डाक्टर और एक वार्ड ब्वाय ने जान गंवाई है। सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों के करीब तीन सौ से अधिक डाक्टर और मेडिकल स्टाफ संक्रमण की चपेट में आ चुका है। जान गंवाने वाले वारियर्स का डेटा सरकार को भेज दिया है। - डा. एमसी गर्ग, सीएमओ
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- फ्रंट लाइन में काम करने वाले डाक्टर और मेडिकल स्टाफ के लिए सरकार कतई संवेदनशील नहीं है। मेडिकल स्टाफ जान दांव पर लगाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं और संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। देशभर में करीब 382 डाक्टर जान गंवा चुके हैं। केंद्र सरकार के पास इनका कोई डेटा नहीं होना बेहद शर्मनाक है। जान गंवाने वाले मेडिकल स्टाफ को शहीद का दर्जा दिया जाए। - डा. अजय अरोड़ा, अध्यक्ष आईएमए

- कोरोना ड्यूटी करने वाले स्टाफ के साथ प्रदेश के कई जिलों में अभद्रता की घटनाएं सामने आईं हैं। डाक्टर और मेडिकल स्टाफ भी बार्डर पर बहादुर सैनिकों की तरह अस्पतालों में कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। देशभर में सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों के करीब पांच सौ डाक्टर और स्टाफ कर्मचारी शहीद हो चुके हैं। इसके बाद भी किसी को फर्क नहीं पड़ा है। - डा. संजीव बेलवाल, सचिव, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ
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