{"_id":"63eb3e0c39c1a5b6800e8fda","slug":"the-wall-of-religion-did-not-come-in-the-way-anoop-farha-s-love-won-2023-02-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"आड़े नहीं आई मजहब की दीवार जीता अनूप-फरहा का प्यार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आड़े नहीं आई मजहब की दीवार जीता अनूप-फरहा का प्यार
Tue, 14 Feb 2023 01:23 PM IST
ranjeett ranjeett
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
Published by: ranjeett ranjeett
Updated Tue, 14 Feb 2023 01:23 PM IST
विज्ञापन
मुरादाबाद
- फोटो : अमर उजाला
मुरादाबाद। फूल पर बैठी तितली ने समझाया है, प्यार दिलों पर अपनेपन का साया है। मजहब ने पहरे हैं बिठाए जिस्मों पर, इश्क ने लेकिन रूहों को मिलवाया है। शहर के मशहूर शायर जिया जमीर की यह पंक्ति शहर के निर्यातक अनूप शंखधार और उनकी पत्नी फरहा खान की प्रेम कहानी पर पर सटीक बैठती है। कोरियर कंपनी में साथ नौकरी के दौरान के प्यार परवान चढ़ा था तो दोनों को न सिर्फ नौकरी से हाथ धोना पड़ा था बल्कि परिवार वालों ने भी घर से निकाल दिया था। तमाम दिक्कत और मुश्किलों से लड़ दोनों ने 12 मार्च 1990 को कोर्ट मैरिज की। काफी समय घर वालों से अलग किराये के मकान में रहे। दोनों खुशहाल हैं। अब शहर के बड़े निर्यातकों में अनूप शंखधार की गिनती होती है।
खास बात यह है कि दोनों में से किसी ने न अपना नाम बदला है न ही धर्म। अनूप घर में नियमित पूजा-पाठ करते हैं तो फरहा उसी घर में पांचों वक्त की नमाज अदा करती हैं। दोनों ईद और दिवाली साथ मिल कर मनाते हैं। प्यार की जीत का असर यह है कि अब दोनों के परिवार वाले एक दूसरे के घर आते-जाते हैं। ब्यूरो
विज्ञापन
खास बात यह है कि दोनों में से किसी ने न अपना नाम बदला है न ही धर्म। अनूप घर में नियमित पूजा-पाठ करते हैं तो फरहा उसी घर में पांचों वक्त की नमाज अदा करती हैं। दोनों ईद और दिवाली साथ मिल कर मनाते हैं। प्यार की जीत का असर यह है कि अब दोनों के परिवार वाले एक दूसरे के घर आते-जाते हैं। ब्यूरो
विज्ञापन