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पुलिस शुरू से ही खेल करने में लगी रही, तहरीर भी बदल दी थी
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पुलिस शुरू से ही खेल करने में लगी रही, तहरीर भी बदल दी थी
मां और भाई का आरोप- 41 दिन में तीन बार ही गांव में आई पुलिस, बस आरोपियों के ही संपर्क में थी
चंदौसी (संभल)। थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव में दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में पुलिस शुरू से ही खेल करने में लगी थी। पीड़िता की मां की ओर से दी गई पहली तहरीर को पुलिस ने बदलवा दिया था और एक ही आरोपी सोवेंद्र को नामजद कराया था। दुष्कर्म और मौत के बीच 41 दिनों में मात्र तीन बार ही पुलिस गांव में आई। जबकि अब पुलिस दौड़ लगा रही है।
मृतका की मां ने बताया कि 12 जुलाई की रात की घटना के बाद 13 जुलाई को हमने थाना पुलिस को तहरीर दी थी। उसमें सही व पूरी घटना बताई थी। थानाध्यक्ष व एसएसआई ने कहा कि आप अपनी तहरीर बदल दो। न्यायालय में बयान देते समय आप भूल जाओगे। इसके बाद पुलिस ने अपनी मर्जी से तहरीर लिखा ली थी और घटना के तीन दिन के बाद एक आरोपी सोवेंद्र को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने उनकी बेटी को बयान दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया था। वहां सही बात बताने पर बयान के आधार पर पुलिस ने बाद में मुकदमे में वीरेश, होलू व जीनेश तीनों भाइयों के नाम शामिल किए थे। बताया कि 41 दिन में कई बार थाने में शिकायत की गई, तीन बार सीओ चंदौसी, एक बार बहजोई में एसपी और एक बार मुरादाबाद में डीआईजी से मिलकर शिकायत की थी। जिन आरोपियों को पुलिस 41 दिन में ढूंढ नहीं पाई, किशोरी के मरने के चार से पांच घंटे में सभी आरोपियों को पकड़ लिया।
ग्रामीणों में आक्रोश, आरोपियों के प्रति हमदर्दी नहीं
दुष्कर्म पीड़िता की मौत की घटना को लेकर ग्रामीणों में आरोपियों व पुलिस के प्रति आक्रोश है। परिजन व ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस अपना काम ईमानदारी से करती है तो उनकी बेटी की जान न जाती। आज उनके साथ घटना हुई है, कल कोई ओर शिकार हो सकती है। पुलिस व आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। एसओ के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण का कहना है कि पुलिस शुरू से ही आरोपियों से हमसाज थी। पीड़िता की मां गरीब व विधवा है। इस कारण ही पुलिस ने उसकी सुनवाई नहीं की। बच्चों को लेकर कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाती रही लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। घटना हुई तो आरोपियों को जरूर सजा मिलनी चाहिए। जो अन्य लोगों के लिए सबक होगा। वहीं गांव की महिला का कहना है कि जो पुलिस आज चक्कर लगा रही है। वह पहले चक्कर लगाती तो किशोरी की जान न जाती। पुलिस ने ही आरोपियों के साथ मिलकर उसकी जान ली है। आरोपियों व पुलिस के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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मां और भाई का आरोप- 41 दिन में तीन बार ही गांव में आई पुलिस, बस आरोपियों के ही संपर्क में थी
चंदौसी (संभल)। थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव में दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में पुलिस शुरू से ही खेल करने में लगी थी। पीड़िता की मां की ओर से दी गई पहली तहरीर को पुलिस ने बदलवा दिया था और एक ही आरोपी सोवेंद्र को नामजद कराया था। दुष्कर्म और मौत के बीच 41 दिनों में मात्र तीन बार ही पुलिस गांव में आई। जबकि अब पुलिस दौड़ लगा रही है।
मृतका की मां ने बताया कि 12 जुलाई की रात की घटना के बाद 13 जुलाई को हमने थाना पुलिस को तहरीर दी थी। उसमें सही व पूरी घटना बताई थी। थानाध्यक्ष व एसएसआई ने कहा कि आप अपनी तहरीर बदल दो। न्यायालय में बयान देते समय आप भूल जाओगे। इसके बाद पुलिस ने अपनी मर्जी से तहरीर लिखा ली थी और घटना के तीन दिन के बाद एक आरोपी सोवेंद्र को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने उनकी बेटी को बयान दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया था। वहां सही बात बताने पर बयान के आधार पर पुलिस ने बाद में मुकदमे में वीरेश, होलू व जीनेश तीनों भाइयों के नाम शामिल किए थे। बताया कि 41 दिन में कई बार थाने में शिकायत की गई, तीन बार सीओ चंदौसी, एक बार बहजोई में एसपी और एक बार मुरादाबाद में डीआईजी से मिलकर शिकायत की थी। जिन आरोपियों को पुलिस 41 दिन में ढूंढ नहीं पाई, किशोरी के मरने के चार से पांच घंटे में सभी आरोपियों को पकड़ लिया।
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ग्रामीणों में आक्रोश, आरोपियों के प्रति हमदर्दी नहीं
दुष्कर्म पीड़िता की मौत की घटना को लेकर ग्रामीणों में आरोपियों व पुलिस के प्रति आक्रोश है। परिजन व ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस अपना काम ईमानदारी से करती है तो उनकी बेटी की जान न जाती। आज उनके साथ घटना हुई है, कल कोई ओर शिकार हो सकती है। पुलिस व आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। एसओ के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण का कहना है कि पुलिस शुरू से ही आरोपियों से हमसाज थी। पीड़िता की मां गरीब व विधवा है। इस कारण ही पुलिस ने उसकी सुनवाई नहीं की। बच्चों को लेकर कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाती रही लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। घटना हुई तो आरोपियों को जरूर सजा मिलनी चाहिए। जो अन्य लोगों के लिए सबक होगा। वहीं गांव की महिला का कहना है कि जो पुलिस आज चक्कर लगा रही है। वह पहले चक्कर लगाती तो किशोरी की जान न जाती। पुलिस ने ही आरोपियों के साथ मिलकर उसकी जान ली है। आरोपियों व पुलिस के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।