{"_id":"608f12618ebc3ecfc918a3a4","slug":"the-last-ashra-will-be-saved-from-the-fire-of-the-world-city-news-mbd3880224124","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहन्नुम की आग से बचाएगा आखिरी अशरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहन्नुम की आग से बचाएगा आखिरी अशरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद। माह-ए-रमजान का आखिरी अशरा आज (सोमवार) शाम से शुरू हो जाएगा। खुदा ने आखिरी दस रातें जहन्नुम की आग से रिहाई और निजात के लिए बख्शा है। मस्जिदों में रोजेदार रतजगा करेंगे। सारी रात इबादत करेंगे और खास नमाज अदा करेंगे। वहीं घरों में महिलाएं इबादत करने में मशगूल रहेंगी।
रहमत और बरकत का महीना रमजान अपने ढलान पर है। रहमत का अशरा गुजर चुका है। जबकि मगफिरत का अशरा सोमवार शाम खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही आखिरी अशरे की शुरुआत हो जाएगी। मुकद्दस रमजान की आखिरी दस रातों में खुदा की खास रहमत है। खुदा ने शब-ए-कद्र की इन रातों को मगफिरत के लिए बख्शा है। शब-ए-कद्र की पहली रात अल्लाह के बंदे इबादत में गुजारेंगे। जामा मस्जिद सहित मुगलपुरा, नागफनी, तहसील स्कूल, करुला, असालपपुरा, जिगर कालोनी, हरथला सहित अन्य मोहल्लों की मस्जिदों में अकीदतमंद रातभर कुरान-ए-पाक की तिलावत करेंगे। वहीं महिलाएं घरों में ही खुदा की बंदगी करेंगी।
युवा भी बैठेंगे एतकाफ में
मुरादाबाद। आमतौर पर देखा गया है कि बुजुर्ग ही एतकाफ में बैठते हैं। मगर खुदा की इबादत में नौजवान भी पीछे नहीं है। कई मस्जिदों में युवा भी एतकाफ में बैठने को तैयार हैं। एक रिवायत के मुताबिक एतकाफ में बैठ कर की गई इबादत का सवाब मोहल्ले वालों को भी मिलता है। 21 रमजान से मस्जिदों में रोजेदार एतकाफ में बैठते हैं। ये लोग चांद रात तक मस्जिद में ही रहते हैं। रात दिन सिर्फ खुदा की इबादत करते हैं। इनकी इबादत से पूरा मोहल्ला सवाब का हकदार बनता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रहमत और बरकत का महीना रमजान अपने ढलान पर है। रहमत का अशरा गुजर चुका है। जबकि मगफिरत का अशरा सोमवार शाम खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही आखिरी अशरे की शुरुआत हो जाएगी। मुकद्दस रमजान की आखिरी दस रातों में खुदा की खास रहमत है। खुदा ने शब-ए-कद्र की इन रातों को मगफिरत के लिए बख्शा है। शब-ए-कद्र की पहली रात अल्लाह के बंदे इबादत में गुजारेंगे। जामा मस्जिद सहित मुगलपुरा, नागफनी, तहसील स्कूल, करुला, असालपपुरा, जिगर कालोनी, हरथला सहित अन्य मोहल्लों की मस्जिदों में अकीदतमंद रातभर कुरान-ए-पाक की तिलावत करेंगे। वहीं महिलाएं घरों में ही खुदा की बंदगी करेंगी।
विज्ञापन
युवा भी बैठेंगे एतकाफ में
मुरादाबाद। आमतौर पर देखा गया है कि बुजुर्ग ही एतकाफ में बैठते हैं। मगर खुदा की इबादत में नौजवान भी पीछे नहीं है। कई मस्जिदों में युवा भी एतकाफ में बैठने को तैयार हैं। एक रिवायत के मुताबिक एतकाफ में बैठ कर की गई इबादत का सवाब मोहल्ले वालों को भी मिलता है। 21 रमजान से मस्जिदों में रोजेदार एतकाफ में बैठते हैं। ये लोग चांद रात तक मस्जिद में ही रहते हैं। रात दिन सिर्फ खुदा की इबादत करते हैं। इनकी इबादत से पूरा मोहल्ला सवाब का हकदार बनता है।
विज्ञापन