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Moradabad News: गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्रों के लिए जमीन नहीं खोज पा रहा विभाग
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मुरादाबाद। जिले के गांवों में लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए उपकेंद्र खोलने की योजना है। विडंबना है कि विभाग पिछले एक साल में इनके लिए जमीन नहीं खोज पाया है। जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 102 सबसेंटर के लक्ष्य के सापेक्ष महज 27 पर ही जमीन उपलब्ध हो सकी है, यानी सिर्फ 26 फीसदी उपलब्धि। हालत यह है कि कई ब्लॉकों में तो काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
सबसे खराब स्थिति कुंदरकी की है। यहां 28 उपकेंद्रों का निर्माण विभाग को कराना है लेकिन एक भी सबसेंटर के लिए जमीन नहीं मिल सकी। मूंढापांडे और भगतपुर में भी हाल बदतर है। मूंढापांडे में आठ और भगतपुर टांडा में नौ उपकेंद्र बनने हैं लेकिन भगतपुर टांडा में सिर्फ एक स्थान पर जमीन मिली है, मूंढापांडे में वह भी नहीं।
बिलारी और ठाकुरद्वारा की स्थिति कुछ ठीक है। ठाकुरद्वारा में नौ में से आठ और बिलारी में 13 में से छह स्थानों पर जमीन मिल गई है। कांठ में उपकेंद्रों की स्थिति पर नजर डालें तो नौ में से पांच स्थानों पर जमीन मिली है। वहीं डिलारी में 18 में से सात उपकेंद्रों के लिए ही स्थान चिह्नित किया गया है। डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से उपकेंद्रों के लिए जमीन चिह्नित की जा रही है।
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सबसे खराब स्थिति कुंदरकी की है। यहां 28 उपकेंद्रों का निर्माण विभाग को कराना है लेकिन एक भी सबसेंटर के लिए जमीन नहीं मिल सकी। मूंढापांडे और भगतपुर में भी हाल बदतर है। मूंढापांडे में आठ और भगतपुर टांडा में नौ उपकेंद्र बनने हैं लेकिन भगतपुर टांडा में सिर्फ एक स्थान पर जमीन मिली है, मूंढापांडे में वह भी नहीं।
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बिलारी और ठाकुरद्वारा की स्थिति कुछ ठीक है। ठाकुरद्वारा में नौ में से आठ और बिलारी में 13 में से छह स्थानों पर जमीन मिल गई है। कांठ में उपकेंद्रों की स्थिति पर नजर डालें तो नौ में से पांच स्थानों पर जमीन मिली है। वहीं डिलारी में 18 में से सात उपकेंद्रों के लिए ही स्थान चिह्नित किया गया है। डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से उपकेंद्रों के लिए जमीन चिह्नित की जा रही है।
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