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Moradabad News: अंग्रेजी की चकाचौंध...फिर भी बढ़ी हिंदी की ललक
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मुरादाबाद। अंग्रेजी की आज हर ओर चकाचौंध है, लेकिन हिंदी के प्रति धारणा व नजरिया भी तेजी से बदल रहा है। अब इसे केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि रोजगार की भाषा के रूप में देखा जाने लगा है। यही कारण है कि मुरादाबाद के महाविद्यालयों में स्नातक और परास्नातक में हिंदी विषय में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में इजाफा हुआ है।
कभी एमए हिंदी में 20-22 दाखिलों तक सिमटने वाली संख्या अब 60 तक पहुंच गई है। बीए में तो कैपिंग के बाद भी सीटें पूरी तरह भर गई हैं। शिक्षकों का मानना है कि टीजीटी-पीजीटी, प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्य हिंदी, अनुवाद और विदेशों में हिंदी की बढ़ती मांग ने छात्रों को आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर हिंदी के बढ़ते प्रयोग ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।
रिक्तियां निकलने के साथ हो रही हैं भर्तियां
हिंदू कॉलेज में इस बार कैपिंग व्यवस्था लागू की गई थी और सभी विषयों की सीटें निर्धारित थीं। हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो. उन्मेश सिन्हा ने बताया कि बीए में हिंदी विषय में छात्र संख्या बहुत अधिक हो जाती थी, इसलिए कैपिंग में हिंदी की सीटें तय की गईं। कॉलेज में बीए में 450 दाखिले हुए हैं। एमए हिंदी में 80 सीटों के सापेक्ष 60 दाखिले हुए हैं। जबकि 2022 तक एमए में 20 से 22 दाखिले ही होते थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 35 हो गई, 2025 में 50 दाखिले हुए और इस बार 60 तक पहुंच गई है। इसकी बड़ी वजह हिंदी भाषा में रोजगार की संभावनाएं बढ़ना है। कोई भी प्रतियोगी परीक्षा ऐसी नहीं है, जिसमें सामान्य हिंदी का प्रश्नपत्र न होता हो। अब यह सीधे जीविका से जुड़ा विषय बन गया है। शिक्षा के क्षेत्र में लगातार भर्तियां निकलने के साथ नियुक्तियां भी हो रही हैं, इससे संदेश जा रहा है कि हिंदी विषय में रोजगार बढ़ रहा है। साथ ही सोशल मीडिया में हिंदी के प्रयोग ने भी कोर्स के प्रति आकर्षण पैदा किया है।
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हिंदी का वैश्विक महत्व बढ़ा
केजीके कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मीरा कश्यप ने बताया कि बीए में 530 दाखिले हुए हैं। परास्नातक में 80 सीटें हैं, जिनमें 32 दाखिले हुए हैं। पिछले साल भी 30 दाखिले हुए थे, जबकि उससे पहले केवल नौ से दस दाखिला ही होते थे। पिछले साल से संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में हिंदी शिक्षकों के अलावा अनुवादक के रूप में रोजगार बढ़ा है। विदेशों में हिंदी की मांग बढ़ी है। मेरे परिचित कनाडा में शिक्षक हैं। वह बताते हैं कि वहां उन्हें बहुत महत्व दिया जाता है और उस सम्मान को पाकर वे गदगद रहते हैं। वैश्विक दृष्टि से देखें तो हिंदी संपन्न हो रही है, भले ही भारत में अंग्रेजी को ज्यादा महत्व दिया जाता हो। हालांकि अब यहां भी हिंदी पनप रही है। यह हमारी रोजी-रोटी है और कभी पीछे नहीं रहेगी।
हिंदी विषय में बन रही उम्मीद
एमएच कॉलेज की हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रो. प्रियंका गुप्ता ने बताया कि एमए हिंदी में 60 सीटें हैं, जिनमें 12 दाखिले हुए हैं। पिछली बार सिर्फ 7 दाखिले हुए थे। भविष्य के लिए उम्मीद है। भले ही कुछ ही दाखिला बढ़े हैं, लेकिन इस बार एक उम्मीद दिखाई दे रही है। हम चाहते हैं कि सभी सीटें भर जाएं।
इनसेट
विभिन्न कॉलेजों में हिंदी में दाखिले
कॉलेज सीट दाखिला
हिंदू कॉलेज 80 60
केजीके कॉलेज 80 32
दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय 80 13
एमएच कॉलेज 60 12
गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज 60 08
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कभी एमए हिंदी में 20-22 दाखिलों तक सिमटने वाली संख्या अब 60 तक पहुंच गई है। बीए में तो कैपिंग के बाद भी सीटें पूरी तरह भर गई हैं। शिक्षकों का मानना है कि टीजीटी-पीजीटी, प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्य हिंदी, अनुवाद और विदेशों में हिंदी की बढ़ती मांग ने छात्रों को आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर हिंदी के बढ़ते प्रयोग ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।
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रिक्तियां निकलने के साथ हो रही हैं भर्तियां
हिंदू कॉलेज में इस बार कैपिंग व्यवस्था लागू की गई थी और सभी विषयों की सीटें निर्धारित थीं। हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो. उन्मेश सिन्हा ने बताया कि बीए में हिंदी विषय में छात्र संख्या बहुत अधिक हो जाती थी, इसलिए कैपिंग में हिंदी की सीटें तय की गईं। कॉलेज में बीए में 450 दाखिले हुए हैं। एमए हिंदी में 80 सीटों के सापेक्ष 60 दाखिले हुए हैं। जबकि 2022 तक एमए में 20 से 22 दाखिले ही होते थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 35 हो गई, 2025 में 50 दाखिले हुए और इस बार 60 तक पहुंच गई है। इसकी बड़ी वजह हिंदी भाषा में रोजगार की संभावनाएं बढ़ना है। कोई भी प्रतियोगी परीक्षा ऐसी नहीं है, जिसमें सामान्य हिंदी का प्रश्नपत्र न होता हो। अब यह सीधे जीविका से जुड़ा विषय बन गया है। शिक्षा के क्षेत्र में लगातार भर्तियां निकलने के साथ नियुक्तियां भी हो रही हैं, इससे संदेश जा रहा है कि हिंदी विषय में रोजगार बढ़ रहा है। साथ ही सोशल मीडिया में हिंदी के प्रयोग ने भी कोर्स के प्रति आकर्षण पैदा किया है।
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हिंदी का वैश्विक महत्व बढ़ा
केजीके कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मीरा कश्यप ने बताया कि बीए में 530 दाखिले हुए हैं। परास्नातक में 80 सीटें हैं, जिनमें 32 दाखिले हुए हैं। पिछले साल भी 30 दाखिले हुए थे, जबकि उससे पहले केवल नौ से दस दाखिला ही होते थे। पिछले साल से संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में हिंदी शिक्षकों के अलावा अनुवादक के रूप में रोजगार बढ़ा है। विदेशों में हिंदी की मांग बढ़ी है। मेरे परिचित कनाडा में शिक्षक हैं। वह बताते हैं कि वहां उन्हें बहुत महत्व दिया जाता है और उस सम्मान को पाकर वे गदगद रहते हैं। वैश्विक दृष्टि से देखें तो हिंदी संपन्न हो रही है, भले ही भारत में अंग्रेजी को ज्यादा महत्व दिया जाता हो। हालांकि अब यहां भी हिंदी पनप रही है। यह हमारी रोजी-रोटी है और कभी पीछे नहीं रहेगी।
हिंदी विषय में बन रही उम्मीद
एमएच कॉलेज की हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रो. प्रियंका गुप्ता ने बताया कि एमए हिंदी में 60 सीटें हैं, जिनमें 12 दाखिले हुए हैं। पिछली बार सिर्फ 7 दाखिले हुए थे। भविष्य के लिए उम्मीद है। भले ही कुछ ही दाखिला बढ़े हैं, लेकिन इस बार एक उम्मीद दिखाई दे रही है। हम चाहते हैं कि सभी सीटें भर जाएं।
इनसेट
विभिन्न कॉलेजों में हिंदी में दाखिले
कॉलेज सीट दाखिला
हिंदू कॉलेज 80 60
केजीके कॉलेज 80 32
दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय 80 13
एमएच कॉलेज 60 12
गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज 60 08