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Moradabad News: मुख्यमंत्री से की निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने की मांग

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 02:29 AM IST
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The Chief Minister has been urged to put a stop to the fee hikes by private schools.
मुरादाबाद। मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने की मांग की। इस संबंध में डीएम और सीएम के नाम दो ज्ञापन भी दिए।
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अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 में ऐसी व्यवस्था है कि स्कूल हर साल लगभग 10 प्रतिशत फीस बढ़ा सकते हैं। इसका लाभ उठाते हुए उत्तर प्रदेश के समस्त प्राइवेट स्कूल हर वर्ष फीस बढ़ा रहे हैं और पिछले चार सालो में लगभग 45 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी कर चुके हैं। निजी स्कूलों द्वारा अलग अलग फीस के स्लैब भी बना रखे हैं। जैसे ही छात्र/छात्रा अगली कक्षा में आता है तो उसकी फीस एक ही वर्ष में 30-40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। हर वर्ष फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाई जाए और 2-3 सालो में एक बार बढ़ोतरी हो, जिससे अभिभावकों पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े। फीस बढ़ाने के लिए बैलेंस शीट की जांच, निजी स्कूलों के ऑडिट आदि का भी मानक होना चाहिए। इस दौरान अंकित अग्रवाल एडवोकेट, राजदीप गोयल एडवोकेट, कविता सचदेवा, कुमार रोबिन, प्रशांत शर्मा एडवोकेट आदि अभिभावक मौजूद रहे।
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एनसीईआरटी की किताबों से हो पढ़ाई

उन्होंने मांग की कि कक्षा नर्सरी से 12 तक के लिए शत प्रतिशत एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही स्कूलों में पढ़ाई करवाई जानी चाहिए। साथ ही जो पुस्तकें एनसीईआरटी के द्वारा नहीं छापी जाती हैं, केवल उसी विषय की साइड बुक्स स्कूलों द्वारा लगाई जाए। अभिभावकों को विशेष दुकानों-विक्रेताओं से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। उन्होंने खुले बाजार में किताबें उपलब्ध करवाने की मांग की।
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इन बिंदुओं पर की मांग
- जिन विषयों में एनसीईआरटी द्वारा पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं और पुस्तकें नहीं लगाई जा रही हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और अर्थदंड लगाया जाए।


- उपलब्ध सूची से विगत वर्षों की तुलना में पाठ्यक्रम या पुस्तकों में बदलाव की जांच की जाए। यदि किया गया है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

- सभी निजी विद्यालयों को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व पुस्तकों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं।
- अभिभावकों की समस्याओं, शिकायतों के निवारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था/हेल्पलाइन बनाई जाए।- मासिक/तिमाही शुल्क जमा करने का विकल्प अभिभावक/विद्यार्थी को देने के निर्देश।
- शैक्षिक सत्र शुरू होने से 60 दिन पूर्व शुल्क विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें और सूचना पट पर भी प्रकाशित करने के निर्देश।
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