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Moradabad News: विवादित धर्मस्थल पर गेट लगाने को लेकर दो समुदाय में तनाव
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बहजोई। गांव बिसारू में विवादित धर्म स्थल को लेकर दोनों समुदाय के बीच तनाव की स्थिति बन गई। टकराव के हालात बृहस्पतिवार की रात करीब 9 बजे उस समय बन गए, जब धर्मस्थल पर लोहे के गेट लगाने का काम किया जा रहा था। हिंदू पक्ष के लोगों ने विरोध जताया और पुलिस को सूचना दी। एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी ने फोर्स के साथ फ्लैगमार्च किया। उन्होंने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है। गेट हटवा दिया गया है। इस मामले में पांच लोग हिरासत में लिए गए हैं। एहतियातन पुलिस के साथ पीएसी भी लगाई गई है।
गांव बिसारू में 2012 में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक जमीन पर निर्माण किया था। उस समय यह बरातघर होने का दावा किया गया था लेकिन बाद में इसको मदरसे का रूप देना शुरू कर दिया गया। इससे हिंदू पक्ष भड़क गया और नई परंपरा डालने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मुस्लिम पक्ष अब भी इसमें धार्मिक कार्य करता है।
बृहस्पतिवार की रात को धर्मस्थल पर गेट लगाने का काम किया जा रहा था। इसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने विरोध जताया। साथ ही पुलिस-प्रशासन को सूचना दी। मौके पर भाजपा की राज्यमंत्री गुलाब देवी के प्रतिनिधि चंद्रसेन दिवाकर छोटू, विशाल चौहान, विजय यादव और मुकेश कुमार भी पहुंच गए। इन प्रतिनिधियों से पुलिस ने सहयोग के लिए कहा। साथ ही ग्रामीणों से शांति व्यवस्था बनाने में सहयोग की अपील की।
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2012 में निर्माण करने पर 25-30 लोग भेजे गए थे जेल
गांव निवासी नेत्रपाल सिंह ने बताया कि 2012 में बरातघर के नाम पर निर्माण किया गया था लेकिन बाद में नमाज पढ़ने लगे और मदरसा होने का दावा करने लगे। इस दौरान टकराव की स्थिति बन गई थी और पुलिस ने 25-30 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा था। उस समय मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में भी बयान दर्ज कराया था कि उनका गांव में कोई धर्मस्थल नहीं है और न वह बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि गांव के लोगों को बरातघर बनने पर एतराज नहीं है लेकिन धर्मस्थल बनाने पर पूरा एतराज है।
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एसडीएम ने कहा तहसील में करेंगे वार्ता, ग्रामीण बोले- मौके पर हो समाधान
गांव में हिंदू पक्ष का रोष देखते हुए एसडीएम चंदौसी आशुतोष तिवारी ने शुक्रवार को ग्रामीणों को तहसील परिसर में बुलाकर वार्ता करने के लिए कहा लेकिन ग्रामीणों ने मौके पर ही समाधान करने की मांग की। एसडीएम और सीओ स्तुति सिंह ने ग्रामीणों को भरोसा दिया है कि कोई निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। जो गेट लगाया जा रहा था, वह हटा दिया गया है। कोई प्रयास करेगा तो सख्ती से निपटा जाएगा। इसके बाद एसडीएम और सीओ ने गांव में पैदल मार्च किया और शांति बनाए रखने की अपील की।
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गांव बिसारू में 2012 में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक जमीन पर निर्माण किया था। उस समय यह बरातघर होने का दावा किया गया था लेकिन बाद में इसको मदरसे का रूप देना शुरू कर दिया गया। इससे हिंदू पक्ष भड़क गया और नई परंपरा डालने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मुस्लिम पक्ष अब भी इसमें धार्मिक कार्य करता है।
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बृहस्पतिवार की रात को धर्मस्थल पर गेट लगाने का काम किया जा रहा था। इसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने विरोध जताया। साथ ही पुलिस-प्रशासन को सूचना दी। मौके पर भाजपा की राज्यमंत्री गुलाब देवी के प्रतिनिधि चंद्रसेन दिवाकर छोटू, विशाल चौहान, विजय यादव और मुकेश कुमार भी पहुंच गए। इन प्रतिनिधियों से पुलिस ने सहयोग के लिए कहा। साथ ही ग्रामीणों से शांति व्यवस्था बनाने में सहयोग की अपील की।
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2012 में निर्माण करने पर 25-30 लोग भेजे गए थे जेल
गांव निवासी नेत्रपाल सिंह ने बताया कि 2012 में बरातघर के नाम पर निर्माण किया गया था लेकिन बाद में नमाज पढ़ने लगे और मदरसा होने का दावा करने लगे। इस दौरान टकराव की स्थिति बन गई थी और पुलिस ने 25-30 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा था। उस समय मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में भी बयान दर्ज कराया था कि उनका गांव में कोई धर्मस्थल नहीं है और न वह बनाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि गांव के लोगों को बरातघर बनने पर एतराज नहीं है लेकिन धर्मस्थल बनाने पर पूरा एतराज है।
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एसडीएम ने कहा तहसील में करेंगे वार्ता, ग्रामीण बोले- मौके पर हो समाधान
गांव में हिंदू पक्ष का रोष देखते हुए एसडीएम चंदौसी आशुतोष तिवारी ने शुक्रवार को ग्रामीणों को तहसील परिसर में बुलाकर वार्ता करने के लिए कहा लेकिन ग्रामीणों ने मौके पर ही समाधान करने की मांग की। एसडीएम और सीओ स्तुति सिंह ने ग्रामीणों को भरोसा दिया है कि कोई निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। जो गेट लगाया जा रहा था, वह हटा दिया गया है। कोई प्रयास करेगा तो सख्ती से निपटा जाएगा। इसके बाद एसडीएम और सीओ ने गांव में पैदल मार्च किया और शांति बनाए रखने की अपील की।