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Moradabad News: किसानों को खाद वितरित करने में फेल हुआ सिस्टम
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मुरादाबाद। किसानों को खाद वितरित करने में जिले का सिस्टम फेल हो गया है। इसी कारण मूंढापांडे क्षेत्र में दो दिन लाइन लगाने के बाद भी एनपीके खाद किसानों को नहीं मिल सकी। बिलारी क्षेत्र में भी किसान खाद के लिए परेशान हैं, जबकि अधिकारियों का दावा है कि गोदामों में खाद उपलब्ध है।
मूंढापांडे क्षेत्र के बिसाहट किसान सहकारी समिति के लिए 400 बोरी खाद भेेजी गई थी। कुछ ही देर में खाद समाप्त होने पर सचिव को कार्यालय छोड़कर भागना पड़ा। गुस्साए लोगों ने एक सहायक को पीट दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आना पड़ा। किसानों का कहना है कि गेहूं बोने से पहले एनपीके खाद, फास्फोरस और पोटाश की जरूरत पड़ती है। समय से खाद नहीं मिलने पर गेहूं की बुआई प्रभावित हो रही है।
भाकियू के जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी ने बताया कि बिलारी क्षेत्र में कई दिनों से खाद मौजूद नहीं है। अब खाद आने पर समिति में किसानों को दिनभर लाइन लगाना पड़ रहा है। हालत बहुत खराब हैं। अधिकारी कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। एआर कोऑपरेटिव से शिकायत करने पर सुनते ही नहीं हैं। गोदामों में खाद मौजूद है, लेकिन वितरण नहीं हो रहा है।
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गोदामों में पांच हजार टन खाद होने का दावा
जिला कृषि अधिकारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि गोदामों में पांच हजार टन एनपीके खाद मौजूद है। इसके अलावा फास्फोरस और पोटाश भी पर्याप्त मात्रा में हैं। वितरण व्यवस्था सही नहीं होने के कारण किसान सहकारी समितियों में लाइन लगाना पड़ रहा है।
जिले में खाद और बीज वितरण के लिए 58 सहकारी समितियां मौजूद हैं। इन समितियों पर भी एनपीके खाद पर्याप्त मात्रा में नहीं दी गई। कुछ दिन पहले एनपीके खाद की रैक आई है। गोदामों में 5000 टन एनपीके खाद मौजूद है। एक दिन पहले भी 334 टन और खाद आई है। गोदामों में 195.75 टन पोटाश और 2644 टन फास्फेट भी है। प्रदेश सरकार ने प्राइवेट दुकानों की 30 प्रतिशत खाद सहकारी समितियों को लेने की इजाजत दे दी है, ताकि किसानों को खाद की कमी न पड़े। एआर कोऑपरेटिव के ऊपर खाद वितरण की जिम्मेदारी होती है।
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मूंढापांडे क्षेत्र के बिसाहट किसान सहकारी समिति के लिए 400 बोरी खाद भेेजी गई थी। कुछ ही देर में खाद समाप्त होने पर सचिव को कार्यालय छोड़कर भागना पड़ा। गुस्साए लोगों ने एक सहायक को पीट दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आना पड़ा। किसानों का कहना है कि गेहूं बोने से पहले एनपीके खाद, फास्फोरस और पोटाश की जरूरत पड़ती है। समय से खाद नहीं मिलने पर गेहूं की बुआई प्रभावित हो रही है।
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भाकियू के जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी ने बताया कि बिलारी क्षेत्र में कई दिनों से खाद मौजूद नहीं है। अब खाद आने पर समिति में किसानों को दिनभर लाइन लगाना पड़ रहा है। हालत बहुत खराब हैं। अधिकारी कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। एआर कोऑपरेटिव से शिकायत करने पर सुनते ही नहीं हैं। गोदामों में खाद मौजूद है, लेकिन वितरण नहीं हो रहा है।
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गोदामों में पांच हजार टन खाद होने का दावा
जिला कृषि अधिकारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि गोदामों में पांच हजार टन एनपीके खाद मौजूद है। इसके अलावा फास्फोरस और पोटाश भी पर्याप्त मात्रा में हैं। वितरण व्यवस्था सही नहीं होने के कारण किसान सहकारी समितियों में लाइन लगाना पड़ रहा है।
जिले में खाद और बीज वितरण के लिए 58 सहकारी समितियां मौजूद हैं। इन समितियों पर भी एनपीके खाद पर्याप्त मात्रा में नहीं दी गई। कुछ दिन पहले एनपीके खाद की रैक आई है। गोदामों में 5000 टन एनपीके खाद मौजूद है। एक दिन पहले भी 334 टन और खाद आई है। गोदामों में 195.75 टन पोटाश और 2644 टन फास्फेट भी है। प्रदेश सरकार ने प्राइवेट दुकानों की 30 प्रतिशत खाद सहकारी समितियों को लेने की इजाजत दे दी है, ताकि किसानों को खाद की कमी न पड़े। एआर कोऑपरेटिव के ऊपर खाद वितरण की जिम्मेदारी होती है।