{"_id":"678ab4484c0524e67e071c12","slug":"stress-is-taking-over-students-experts-give-suggestions-for-exam-preparation-moradabad-news-c-15-1-mbd1005-565339-2025-01-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: विद्यार्थियों पर हावी हो रहा तनाव, विशेषज्ञों ने दिए परीक्षा की तैयारी के सुझाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: विद्यार्थियों पर हावी हो रहा तनाव, विशेषज्ञों ने दिए परीक्षा की तैयारी के सुझाव
विज्ञापन
मुरादाबाद। डॉक्टर साहब जब मैं पढ़ने बैठती हूं तो मुझे बेचैनी होने लगती है और थोड़ी देर में ही चक्कर आने लगते हैं। खाना खाने का मन नहीं करता है। अब मम्मी टोकती हैं तो बहुत बुरा लगता है। मन करता है कि आत्महत्या कर लूं। याद करने पर भी मुझे याद नहीं रहता। कुछ ऐसी ही परेशानियां मनोरोग विशेषाज्ञों के पास ओपीडी में पहुंच रही हैं।
एक माह बाद बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। पहले सीबीएसई और फिर यूपी बोर्ड की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। विद्यार्थियों पर परीक्षा का तनाव इस कदर हावी होने लगा है कि बहुत से बच्चे बेहोश हो रहे हैं तो कुछ ने जिंदगी को खत्म करने का भी प्रयास किया। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से बोर्ड परीक्षा की तैयारी से संबंधित परेशानी वाले मामले बढ़ गए हैं। ओपीडी में प्रतिदिन दस से 15 केस विद्यार्थियों के ही आ रहे हैं। बच्चे पढ़ाई का दबाव इतना ज्यादा महसूस करने लगे हैं कि मानसिक के साथ-साथ शारीरिक समस्याएं भी आ रही हैं। बच्चों की काउंसिलिंग के साथ उनके अभिभावकों को भी सलाह दी जा रही है कि वह अपने बच्चों पर दबाव न बनाएं। उन्हें स्वतंत्र होकर तैयारी करने दें।
केस नंबर एक
हरथला निवासी कक्षा 12 की छात्रा पढ़ने में मेधावी है। काउंसिलिंग में उसने बताया कि पिछले 15 दिन से अचानक महसूस होने लगा कि मैं फेल हो जाऊंगी। पढ़ते समय भी हमेशा यही खयाल मन में रहने लगा। इससे मेरे मम्मी-पापा की बहुत बदनामी होगी। इससे अच्छा है कि मैं अपना जीवन खत्म कर लूं। इसी डर में उसने अपनी मम्मी की नींद की छह-सात गोली एक साथ खा लीं। जब तबीयत खराब हुई तो परिजनों को पता चला और वह मनोरोग विशेषज्ञ के पास लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने बताया कि यदि वह बिना तैयारी के परीक्षा देगी, तब भी पास हो जाएगी। अब छात्रा की काउंसिलिंग की जा रही है।
विज्ञापन
केस नंबर दो
संभल निवासी कक्षा 12 की छात्रा शुक्रवार को मनोरोग विशेषज्ञ के पास पहुंची। उसने बताया कि पिछले एक महीने से उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था। अब एक सप्ताह से जब भी वह पढ़ने बैठती है तो उसे बेचैनी महसूस होने लगती है। अब घबराहट इस कदर बढ़ रही है कि रोज बेहोश हो जाती है। इसकी वजह से वह बिल्कुल नहीं पढ़ पा रही है। एक सप्ताह से पढ़ाई भी छूट गई है। चिकित्सक ने उसे परीक्षा को भूलकर रुटीन की तरह पढ़ने और माता-पिता में से किसी एक को उसके पास बैठने की सलाह दी, ताकि घबराहट महसूस होते ही वह उसका ध्यान भटका सकें।
केस नंबर तीन
प्रकाशनगर निवासी कक्षा दस के छात्र ने चिकित्सक को बताया कि जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आ रहा है तो उसे बेचैनी और घबराहट हो रही है। वह गणित और विज्ञान विषय पढ़ता है। शेष चार विषयों को पढ़ने का मन नहीं करता। इसकी वजह से वह पढ़ाई में पिछड़ रहा है। मम्मी-पापा भी परेशान रहते हैं। चिकित्सक ने उसे शेड्यूल बनाकर पढ़ने और सभी विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
यह हैं लक्षण
एंजाइटी, फोबिया, जी मिचलाना, भूख न लगना, चक्कर आना, नींद न आना, घर छोड़ने की इच्छा होना, सिर में दर्द, सीने में दर्द, बेहोशी, पेट खराब होना, सांस फूलना, चिड़चिड़ाहट।
यह करें अभिभावक और विद्यार्थी
- रात को दस बजे तक सो जाएं और सुबह चार बजे उठें। दो घंटे पढ़े हुए चैप्टर को याद करने के लिए निर्धारित करें।
- जो विद्यार्थी लंबे समय तक एक साथ नहीं पढ़ पाते हैं, उन्हें प्रत्येक एक घंटे बाद दस मिनट का ब्रेक दें।
- प्रतिदिन कम से कम दो घंटे का समय सिर्फ लिखने पर दें।
- यदि कम अंक आने या फेल होने का डर लग रहा है तो खुलकर अपने अभिभावकों व शिक्षकों को बताएं।
- मेधावी विद्यार्थियों के साथ कमजोर बच्चों की तुलना न करें।
- अभिभावक विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानें, अपनी इच्छाएं न थोपें।
- बृहस्पतिवार को ही दो ऐसे बच्चे आए, जिनको आत्महत्या के विचार आ रहे हैं। अवसाद ग्रस्त बच्चे तो प्रतिदिन ही आ रहे हैं। खासकर 12वीं के विद्यार्थियों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। वह खुद से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं रख रहे हैं। इन बच्चों को प्रतिदिन शारीरिक अभ्यास और ध्यान करने की सलाह दी जा रही है। लगातार पढ़ने से ज्यादा बेहतर है कि ब्रेक लेकर पढ़ाई करें। - डॉ. दिशांतर गोयल, मनोराेग विशेषज्ञ
-- -- --
पढ़ने में औसत या कमजोर बच्चों में यह समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे बच्चे अकेले के बजाय ग्रुप स्टडी करेंगे तो बेहतर रहेगा। अब प्रत्येक विषय में थोड़ा-थोड़ा प्रतिदिन बढ़ें। लिखकर और बोलकर पढ़ेंगे तो याद करने की संभावना अधिक रहेगी। किसी विषय में दिक्कत आ रही है तो शिक्षकों से पूछें। इसके अलावा कोई परेशानी है तो माता-पिता को जरूर बताएं। - डॉ. अनंत राणा, मनोरोग विशेषज्ञ
विज्ञापन
एक माह बाद बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। पहले सीबीएसई और फिर यूपी बोर्ड की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। विद्यार्थियों पर परीक्षा का तनाव इस कदर हावी होने लगा है कि बहुत से बच्चे बेहोश हो रहे हैं तो कुछ ने जिंदगी को खत्म करने का भी प्रयास किया। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से बोर्ड परीक्षा की तैयारी से संबंधित परेशानी वाले मामले बढ़ गए हैं। ओपीडी में प्रतिदिन दस से 15 केस विद्यार्थियों के ही आ रहे हैं। बच्चे पढ़ाई का दबाव इतना ज्यादा महसूस करने लगे हैं कि मानसिक के साथ-साथ शारीरिक समस्याएं भी आ रही हैं। बच्चों की काउंसिलिंग के साथ उनके अभिभावकों को भी सलाह दी जा रही है कि वह अपने बच्चों पर दबाव न बनाएं। उन्हें स्वतंत्र होकर तैयारी करने दें।
विज्ञापन
केस नंबर एक
हरथला निवासी कक्षा 12 की छात्रा पढ़ने में मेधावी है। काउंसिलिंग में उसने बताया कि पिछले 15 दिन से अचानक महसूस होने लगा कि मैं फेल हो जाऊंगी। पढ़ते समय भी हमेशा यही खयाल मन में रहने लगा। इससे मेरे मम्मी-पापा की बहुत बदनामी होगी। इससे अच्छा है कि मैं अपना जीवन खत्म कर लूं। इसी डर में उसने अपनी मम्मी की नींद की छह-सात गोली एक साथ खा लीं। जब तबीयत खराब हुई तो परिजनों को पता चला और वह मनोरोग विशेषज्ञ के पास लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने बताया कि यदि वह बिना तैयारी के परीक्षा देगी, तब भी पास हो जाएगी। अब छात्रा की काउंसिलिंग की जा रही है।
विज्ञापन
केस नंबर दो
संभल निवासी कक्षा 12 की छात्रा शुक्रवार को मनोरोग विशेषज्ञ के पास पहुंची। उसने बताया कि पिछले एक महीने से उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था। अब एक सप्ताह से जब भी वह पढ़ने बैठती है तो उसे बेचैनी महसूस होने लगती है। अब घबराहट इस कदर बढ़ रही है कि रोज बेहोश हो जाती है। इसकी वजह से वह बिल्कुल नहीं पढ़ पा रही है। एक सप्ताह से पढ़ाई भी छूट गई है। चिकित्सक ने उसे परीक्षा को भूलकर रुटीन की तरह पढ़ने और माता-पिता में से किसी एक को उसके पास बैठने की सलाह दी, ताकि घबराहट महसूस होते ही वह उसका ध्यान भटका सकें।
केस नंबर तीन
प्रकाशनगर निवासी कक्षा दस के छात्र ने चिकित्सक को बताया कि जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आ रहा है तो उसे बेचैनी और घबराहट हो रही है। वह गणित और विज्ञान विषय पढ़ता है। शेष चार विषयों को पढ़ने का मन नहीं करता। इसकी वजह से वह पढ़ाई में पिछड़ रहा है। मम्मी-पापा भी परेशान रहते हैं। चिकित्सक ने उसे शेड्यूल बनाकर पढ़ने और सभी विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
यह हैं लक्षण
एंजाइटी, फोबिया, जी मिचलाना, भूख न लगना, चक्कर आना, नींद न आना, घर छोड़ने की इच्छा होना, सिर में दर्द, सीने में दर्द, बेहोशी, पेट खराब होना, सांस फूलना, चिड़चिड़ाहट।
यह करें अभिभावक और विद्यार्थी
- रात को दस बजे तक सो जाएं और सुबह चार बजे उठें। दो घंटे पढ़े हुए चैप्टर को याद करने के लिए निर्धारित करें।
- जो विद्यार्थी लंबे समय तक एक साथ नहीं पढ़ पाते हैं, उन्हें प्रत्येक एक घंटे बाद दस मिनट का ब्रेक दें।
- प्रतिदिन कम से कम दो घंटे का समय सिर्फ लिखने पर दें।
- यदि कम अंक आने या फेल होने का डर लग रहा है तो खुलकर अपने अभिभावकों व शिक्षकों को बताएं।
- मेधावी विद्यार्थियों के साथ कमजोर बच्चों की तुलना न करें।
- अभिभावक विद्यार्थियों की क्षमताओं को पहचानें, अपनी इच्छाएं न थोपें।
- बृहस्पतिवार को ही दो ऐसे बच्चे आए, जिनको आत्महत्या के विचार आ रहे हैं। अवसाद ग्रस्त बच्चे तो प्रतिदिन ही आ रहे हैं। खासकर 12वीं के विद्यार्थियों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। वह खुद से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं रख रहे हैं। इन बच्चों को प्रतिदिन शारीरिक अभ्यास और ध्यान करने की सलाह दी जा रही है। लगातार पढ़ने से ज्यादा बेहतर है कि ब्रेक लेकर पढ़ाई करें। - डॉ. दिशांतर गोयल, मनोराेग विशेषज्ञ
पढ़ने में औसत या कमजोर बच्चों में यह समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे बच्चे अकेले के बजाय ग्रुप स्टडी करेंगे तो बेहतर रहेगा। अब प्रत्येक विषय में थोड़ा-थोड़ा प्रतिदिन बढ़ें। लिखकर और बोलकर पढ़ेंगे तो याद करने की संभावना अधिक रहेगी। किसी विषय में दिक्कत आ रही है तो शिक्षकों से पूछें। इसके अलावा कोई परेशानी है तो माता-पिता को जरूर बताएं। - डॉ. अनंत राणा, मनोरोग विशेषज्ञ