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राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही चाचा को भूले.. भतीजा जिंदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Mon, 02 Jan 2017 02:38 AM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
सपा में मचे घमासान के बीच रविवार को लखनऊ में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही अवसरवाद की राजनीति शुरू हो गई है। कल तक शिवपाल के साथ रहने वाले जिले के कुछ सपाइयों ने पाला बदल दिया।
पार्टी का साथ छोड़कर सरकार के खेमे में आ गए। यहीं नहीं कुछ ने मिठाइयां तक बांट डाली। सपा का विवाद पार्ट टू अब अपने चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को समझौते की ओर बढ़े हाथों में फिर से तलवार आ गई। रविवार को सपा की राजनीति में तख्ता पलट हो गया।
लखनऊ अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम प्रस्ताव रखा गया है। जिसका अधिवेशन में मौजूद लोगों ने समर्थन किया। मुलायम सिंह यादव को पार्टी का संरक्षक घोषित कर दिया गया। लखनऊ में हुए इस उलटफेर का असर जिले की राजनीति में देखने को मिली।
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शिवपाल यादव के खेमे सपाइयों के सुर बदल गए। कुछ ने बिना देरी किए पाला ही बदल दिया। मिठाइयां भी बांटी। यहीं नहीं अखिलेश यादव की सरपरस्ती की सराहना भी की। फिलहाल पारिवारिक विवाद में चल रहे शह मात के खेल में अवसरवाद की राजनीति शुरू हो गई है। कुछ दिनों और इसमें और तेजी आ सकती है।
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पार्टी का साथ छोड़कर सरकार के खेमे में आ गए। यहीं नहीं कुछ ने मिठाइयां तक बांट डाली। सपा का विवाद पार्ट टू अब अपने चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को समझौते की ओर बढ़े हाथों में फिर से तलवार आ गई। रविवार को सपा की राजनीति में तख्ता पलट हो गया।
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लखनऊ अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम प्रस्ताव रखा गया है। जिसका अधिवेशन में मौजूद लोगों ने समर्थन किया। मुलायम सिंह यादव को पार्टी का संरक्षक घोषित कर दिया गया। लखनऊ में हुए इस उलटफेर का असर जिले की राजनीति में देखने को मिली।
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शिवपाल यादव के खेमे सपाइयों के सुर बदल गए। कुछ ने बिना देरी किए पाला ही बदल दिया। मिठाइयां भी बांटी। यहीं नहीं अखिलेश यादव की सरपरस्ती की सराहना भी की। फिलहाल पारिवारिक विवाद में चल रहे शह मात के खेल में अवसरवाद की राजनीति शुरू हो गई है। कुछ दिनों और इसमें और तेजी आ सकती है।