बेटा संदिग्ध आतंकी-पिता हिस्ट्रीशीटर: दादा तीन बार रहे गांव के प्रधान, अहमद रजा के परिवार का गांव में था दबदबा
मुरादाबाद के मिलक गुलड़िया गांव मुख्य सड़क और हाईवे से करीब दस किलोमीटर अंदर है। हमेशा शांत रहे वाले दो हजार की आबादी वाले इस गांव में पिछले तीन दिन से सायरन बजाती गाड़ियां और सड़कों पर पुलिस कर्मियों के बूटों की आवाज से ग्रामीण हैरान हैं। इसका कारण संदिग्ध आतंकी अहमद रजा उर्फ शाहरुख का पकड़ा जाना है।
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हिजबुल मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकी अहमद रजा उर्फ शाहरुख के दादा लियाकत हुसैन का गांव में दबदबा रहा है। वह गांव के प्रधान रहते थे या फिर जिसे वह चुनाव लड़ाते वो ही प्रधान चुना जाता था। लियाकत हुसैन तीन बार गुलड़िया ग्राम पंचायत के प्रधान रहे थे लेकिन बेटे फिरासत हुसैन की आपराधिक गतिविधियां में संलिप्तता सामने आने के बाद उनका दबदबा कम होने लगा था। इसके बाद वह दो बार चुनाव हर गए थे। एक बार फिरासत हुसैन ने भी चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं मिली थी।
गुलड़िया और मिलक मुलड़िया गांव एक ही ग्राम पंचायत में आते हैं। दोनों गांवों में करीब दो हजार से अधिक वोट हैं। मिलक गुलडि़या में 500 वोट हैं। इसी गांव में अहमद रजा का परिवार रहता है। अहमद रजा के दादा लियाकत हुसैन बीस साल पहले तक इस गांव में प्रधान थे। दोनों गांवों की सियासत की बागडोर लंबे समय तक लियाकत हुसैन के परिवार के हाथ में रही थी। तीन बार लियाकत हुसैन प्रधान रहे। एक बाद फिरासत हुसैन भी चुनाव मैदान में उतरा लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई थी।
परिवार को लग चुकी थी अहमद रजा के गलत रास्ते पर जाने की भनक
मिलक गुलड़िया गांव मुख्य सड़क और हाईवे से करीब दस किलोमीटर अंदर है। हमेशा शांत रहे वाले दो हजार की आबादी वाले इस गांव में पिछले दो दिन से सायरन बजाती गाड़ियां और सड़कों पर पुलिस कर्मियों के बूटों की आवाज से ग्रामीण हैरान हैं। वह घर के अंदर से ही पुलिस कार्रवाई देख रहे हैं। वो घरों से बाहर आने के लिए परहेज कर रहे हैं कि उनसे कोई पूछताछ न करने लगे। उनका कहना है कि अहमद रजा अधिकांश समय बाहर रहता था। वो मदरसे में पढ़ाता था या फिर कुछ और करता था। इस बारे में तो कुछ नहीं पता लेकिन पिछले तीन साल से अहमद रजा के घर में झगड़ा चल रहा था।
अहमद रजा के आने पर ही झगड़ा होता था। गुलड़िया गांव निवासी फिरासत हुसैन का परिवार भी पहले गांव के अंदर रहता था लेकिन इसके बाद उसने खेत में ही अपना घर बना लिया था। गांव के प्राथमिक विद्यालय के पीछे खेत के एक कोने में फिरासत हुसैन का घर है। फिरासत हुसैन के तीनों बेटे बाहर रहते हैं। बड़ा बेटा पत्नी के साथ रामपुर में रहता है। दूसरे नंबर का बेटा अहमद रजा जयपुर में रहता था जबकि छोटा बेटा जुनैद रामपुर में रहकर तैयारी कर रहा है।
दो बेटियों की शादी हो चुकी है। फिरासत हुसैन, उसकी पत्नी गुड्डो और सबसे छोटी बेटी इस मकान में रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन साल से फिरासत हुसैन के घर में झगड़ा चल रहा था। ये झगड़ा अहमद रजा के आने के बाद ही होता था। परिवार नहीं चाहता था कि अहमद रजा यहां रहे अब झगड़ा होने और उसके बेदखल किए जाने की कहानी समझ में आ रही है। ग्रामीणों का दबी जुबान में कहना है कि हो सकता है परिवार के लोग समझ गए होंगे कि अहमद रजा गल त रास्ते पर चला है। खुद फिरासत हुसैन ने भी कचहरी चार दिसंबर 2020 में शपथ बनवाया था। जिसमें उसने लिखा था कि उसका बेटा गलत संगत में है। अगर वह भविष्य में कुछ गलत करता है तो इसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार होगा।
कर्ज चुकाने और बेटी की शादी के लिए फिरासत ने बेच दी जमीन
अहमद रजा का मकान जंगल से सटा है। जंगली जानवरों को घर में घुसने से रोकने के लिए टीन की चादर से चारदीवारी बना रखी है। फिरासत हुसैन ने कर्ज चुकाने और छोटी बेटी की शादी करने के लिए दस बीघा जमीन बेच दी है। इस जमीन में फिरासत के दो और भाई शामिल हैं। अहमद रजा की पत्नी गुड्डो ने बताया कि अहमद रजा की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च किया था। उससे बाहर पढ़ने के लिए भेजा। जब खुद पढ़ाने लगा और उससे पैसा मिलने लगे तो उसने परिवार की कोई मदद नहीं की।
इतना नहीं उसने परिवार के खिलाफ जाकर मध्य प्रदेश की शादीशुदा महिला से शादी कर ली थी। इसके बाद उससे संबंध खत्म कर लिए थे। बड़ा बेटा अपने परिवार के साथ रामपुर में रहता है। दो बेटियों की भी शादी की जा चुकी है। इन शादियों में काफी पैसा खर्च हुआ था। अहमद रजा के पिता सड़क हादसे में घायल हो गए थे। इनके इलाज पर भी काफी पैसा खर्च हुआ था। जिस कारण फिरासत हुसैन कर्ज में हो गए थे। जिसे चुकाने के लिए उन्होंने अपनी दस बीघा जमीन बेच दी है। बैनामा कराना बाकी है। इसके बाद फिरासत हुसैन के पास छह बीघा जमीन ही बचेगी।