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...कहीं पुलिसिया कहानी ने तो नहीं बदल दी एफआईआर की स्क्रिप्ट
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मुरादाबाद। दिनभर सोशल मीडिया पर निजी अस्पताल के सुपरवाइजर के भाई व पिता के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे। जिसमें वह चीख चीख कर पुलिस कर्मियों पर पिटाई करने का आरोप लगा रहे हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बावजूद इसके एफआईआर में उन पुलिस कर्मियों को आरोपी नहीं बनाया गया है। जिन्हें आरोपी बनाया गया है। उनकी मौके पर मौजूदगी नहीं है। कानून के जानकारों का कहना है कि इस पुलिलिया कहानी से सही आरोपी तो बन ही जाएंगे। उन्हें भी राहत मिल जाएगी। जिन्हें आरोपी बनाया गया है।
भोजपुर के सेहल गांव निवासी भूपेंद्र पांडे के घर सुबह करीब नौ बजे पुलिस पहुंची थी। भूपेंद्र भाई और पिता ने कैमरे के सामने बयान दिया था कि तीन पुलिस कम्रियों ने भूपेंद्र को डंडे से पीटा और गाड़ी में डाल लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस कर्मियों का वीडियो भी बनाया था। जिसमें वह जो सोशल मीडिया पर वायल हो रहा है। इतना ही कांठ रोड पर जाम लगाने के दौरान भी कई लोगों ने पुलिस की बरबरता की कहानी बयां की थी। लेकिन शाम होते ही सभी के बयान बदल गए। ये बयान किसी के दबाव में बदले हैं। या फिर पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए ये कहानी सामने आई है।
पुलिस अफसरों को इस मामले में हर पहलू पर जांच करानी चाहिए। अगर पुलिस कर्मियों की भूमिका रही है तो उन्हें भी बयानों में शामिल किया जाए। सुबह भूपेंद्र के पिता और भाई बयान दे रहे थे कि पुलिस की पिटाई से मौत हुई है तो शाम को उन्होंने तहरीर में बयान क्यों बदल दिए। कहीं किसी के दबाव में आकर बयान तो नहीं बदले हैं।
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आनंद मोहन गुप्ता अधिवक्ता
इन सवालों के जवाब नहीं पुलिस के पास
- सुबह पिता और भाई पुलिस कर्मियों पर पिटाई का आरोप लगा रहे थे। शाम को उनके बयान क्यों बदल गए
- बिना जांच के पुलिस कर्मियों को कैसे क्लीनचिट दे दी गई
- जिन्हें आरोपी बनाया गया है क्या उनकी लोकेशन मौके पर है
- पति पत्नी के घरेलू विवाद में आखिर पुलिस कर्मियों ने डंडे से पिटाई क्यों की
- पुलिस ने घटनास्थल की वीडियो की जांच क्यों नहीं की
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भोजपुर के सेहल गांव निवासी भूपेंद्र पांडे के घर सुबह करीब नौ बजे पुलिस पहुंची थी। भूपेंद्र भाई और पिता ने कैमरे के सामने बयान दिया था कि तीन पुलिस कम्रियों ने भूपेंद्र को डंडे से पीटा और गाड़ी में डाल लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस कर्मियों का वीडियो भी बनाया था। जिसमें वह जो सोशल मीडिया पर वायल हो रहा है। इतना ही कांठ रोड पर जाम लगाने के दौरान भी कई लोगों ने पुलिस की बरबरता की कहानी बयां की थी। लेकिन शाम होते ही सभी के बयान बदल गए। ये बयान किसी के दबाव में बदले हैं। या फिर पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए ये कहानी सामने आई है।
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पुलिस अफसरों को इस मामले में हर पहलू पर जांच करानी चाहिए। अगर पुलिस कर्मियों की भूमिका रही है तो उन्हें भी बयानों में शामिल किया जाए। सुबह भूपेंद्र के पिता और भाई बयान दे रहे थे कि पुलिस की पिटाई से मौत हुई है तो शाम को उन्होंने तहरीर में बयान क्यों बदल दिए। कहीं किसी के दबाव में आकर बयान तो नहीं बदले हैं।
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आनंद मोहन गुप्ता अधिवक्ता
इन सवालों के जवाब नहीं पुलिस के पास
- सुबह पिता और भाई पुलिस कर्मियों पर पिटाई का आरोप लगा रहे थे। शाम को उनके बयान क्यों बदल गए
- बिना जांच के पुलिस कर्मियों को कैसे क्लीनचिट दे दी गई
- जिन्हें आरोपी बनाया गया है क्या उनकी लोकेशन मौके पर है
- पति पत्नी के घरेलू विवाद में आखिर पुलिस कर्मियों ने डंडे से पिटाई क्यों की
- पुलिस ने घटनास्थल की वीडियो की जांच क्यों नहीं की