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यूपीः एसआईटी ने फिर शुरू की आजम खां के खिलाफ जांच, तलब किए अभिलेख
Thu, 27 Dec 2018 09:05 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 27 Dec 2018 09:05 PM IST
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आजम खां
- फोटो : amar ujala
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पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ जांच करने रामपुर पहुंची एसआईटी (विशेष जांच दल) की जांच एक बार फिर शुरू हो गई। जांच से छूटे तथ्यों को तलाशने के आए एसआईटी अफसरों ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के बयान दर्ज किए। साथ ही संबंधित अभिलेख भी तलब किए।
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समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता एवं पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ एसआईटी जांच चल रही है। इसके तहत एक बार पहले भी एसआईटी रामपुर आई थी। तब तीन दिन तक टीम रामपुर रूकी थी, इसके बाद शिकायतकर्ताओं, अधिकारियों समेत तमाम लोगों के बयान दर्ज किए थे। जौहर यूनिवर्सिटी भी गए, जहां जांच की थी। जौहर शोध संस्थान का भी जायजा लिया था लेकिन, इसके बाद भी तमाम तथ्य जांच से छूट गए थे, जिसको लेकर एक बार फिर एसआईटी की रामपुर में दस्तक हुई।
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इंस्पेक्टर वीके शुक्ला एवं आरपी यादव बुधवार देर रात यहां पहुंचे। गुरुवार को टीम ने निरीक्षण भवन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को तलब किया। बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड सचिन कुमार, अधिशासी अभियंता विपुल जैन को बुलाया गया, जहां अधिकारियों ने अपने बयान दर्ज कराए। एसआईटी को विस्तार से तथ्यों की जानकारी दी।
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उन्होंने यह भी बताया कि किसके कार्यकाल में विभाग से जुड़े काम हुए थे। इसके अलावा उपजिलाधिकारी सदर राजेश कुमार ने भी अपने बयान दर्ज कराए। तहसीलदार, लेखपाल, कानून गो ने भी अपनी अपनी बात टीम के समक्ष रखी। लोक निर्माण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारियों ने भी अपने अपने विभाग से संबंधित जानकारियां दीं। बयान दर्ज करने का सिलसिला शाम तक जारी रहा।
पूर्व मंडलायुक्त शिव शंकर सिंह समेत कई पूर्व अधिकारियों पर भी नजर
एसआईटी जांच की आंच कुछ पूर्व अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है। इसमें जमीन आवंटित करने समेत विभिन्न मामले शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो तत्कालीन मंडलायुक्त शिव शंकर सिंह, तत्कालीन उप जिलाधिकारी रमेशचन्द्र शुक्ला शामिल हैं। दोनों ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके अलावा तत्कालीन उप जिलाधिकारी प्रभुदयाल के भी बयान दर्ज होंगे। वह इस समय बतौर उप जिलाधिकारी उन्नाव में तैनात हैं। यही नहीं बिजली विभाग, लोक निर्माण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग के तमाम पूर्व अधिकारियों पर भी एसआईटी की नजर है। इन सभी अधिकारियों के भी बयान दर्ज होंगे।