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विकास में घोटाला : कई कमरे के पक्के मकान वालों को दे दिया पीएम आवास का लाभ
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मुरादाबाद। ग्राम पंचायत भीकनपुर कुलवाड़ा में सिर्फ शवदाह गृह के निर्माण में ही घपला नहीं किया गया बल्कि ग्राम पंचायत में बने आवास, शौचालय आदि के निर्माण कार्य में भी मानकों की अनदेखी व मनमानी कर प्रधान व सचिव ने अपने चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने का काम किया। प्रधान तथा सचिव ने साठगांठ कर 22 ऐसे लोगों को पीएम आवास का लाभ दे दिया जिनके पास पहले से ही पक्के व दो मंजिला मकान हैं। नौ लाभार्थियों के पहले से बने शौचालय के नाम पर धन निकाल लिया गया। लोकायुक्त के आदेश पर कमिश्नर द्वारा संभल के एडीएम (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में गठित तीन अधिकारियों की कमेटी से कराई गई जांच में यह तथ्य सामने आया। जिसे गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ राजेश कुमार ने ग्राम पंचायत सचिव सतीश सागर को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है।
कुंदरकी विकास खंड क्षेत्र की भीकनपुर कुलवाड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। शवदाह गृह के निर्माण में डीपीआरओ द्वारा की गई जांच में घपलेबाजी पाए जाने पर प्रधान और सचिव के खिलाफ एफआईआर कराई जा चुकी है। अन्य विकास कार्यों में भी जमकर धांधले बाजी की की शिकायत थी लेकिन जिला स्तर से उसमे कार्रवाई होती न देख ग्रामीणों ने इसकी शिकायत लोकायुक्त से कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। लोकायुक्त के आदेश पर कमिश्नर ने इसकी जांच संभल के एडीएम (वित्त एवं राजस्व), परियोजना निदेशक डीआरडीए तथा अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण संभल से कराई। जिसमें कई राज खुले हैं। तीन अधिकारियों की इस संयुक्त जांच टीम ने पाया कि पीएम आवास का लाभ 22 ऐसे में अपात्र लोगों को दे दिया गया जिनके पहले से कई कमरों के काफी बड़े पक्के एवं दो मंजिला मकान है।
किसी को दो-दो शौचालय, किसी को बिना दिए दिखा दिया
मुरादाबाद। शौचालय निर्माण में भी इस ग्राम पंचायत में जमकर खेल हुआ। जांच के दौरान 401 शौचालयों के निर्माण के सापेक्ष 205 शौचालयों के लाभार्थियों के संबंध में ग्राम वासियों द्वारा कुछ शौचालय बने व कुछ के नहीं बने होने की पुष्टि की गई। डिजीटल डायरी में अंकित नबी हुसैन का नाम क्रमांक 22 व क्रमांक 441 पर (डबल) अंकित पाया गया। इसी तरह फारूक का नाम क्रमांक 206 व 295 पर तथा डोरी का नाम क्रमांक 320 व 324 पर दो बार अंकित पाया गया। जबकि नौ ऐसे लोगों को लाभार्थी दर्शाया गया है जिन्होंने शौचालय स्वयं बनवाए हैं। सात लाभार्थियों ने बताया कि ईट, सीमेंट आदि प्रधान द्वारा दिया गया है। निर्माण उन लोगों ने स्वयं कराया है।
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78 लाभार्थियों के शौचालय में छत, दरवाजा अथवा प्लास्टर नहीं पाया गया। सात लाभार्थियों का शौचालय टूटा मिला। जिसका प्रयोग नहीं होता पाया गया। 16 लाभार्थियों के शौचालय बने ही नहीं थे। जिससे ग्राम पंचायत सचिव उन्हें टीम को नहीं दिखा सके। कुछ परिवार संयुक्त रूप से एक ही जगह रहते पाए गए, बावजूद इसके उन्हें एक से अधिक शौचालय दिए गए मिले। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीपीआरओ राजेश कुमार ने सचिव सतीश सागर को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। संतोष जनक उत्तर प्राप्त न होने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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कुंदरकी विकास खंड क्षेत्र की भीकनपुर कुलवाड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। शवदाह गृह के निर्माण में डीपीआरओ द्वारा की गई जांच में घपलेबाजी पाए जाने पर प्रधान और सचिव के खिलाफ एफआईआर कराई जा चुकी है। अन्य विकास कार्यों में भी जमकर धांधले बाजी की की शिकायत थी लेकिन जिला स्तर से उसमे कार्रवाई होती न देख ग्रामीणों ने इसकी शिकायत लोकायुक्त से कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। लोकायुक्त के आदेश पर कमिश्नर ने इसकी जांच संभल के एडीएम (वित्त एवं राजस्व), परियोजना निदेशक डीआरडीए तथा अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण संभल से कराई। जिसमें कई राज खुले हैं। तीन अधिकारियों की इस संयुक्त जांच टीम ने पाया कि पीएम आवास का लाभ 22 ऐसे में अपात्र लोगों को दे दिया गया जिनके पहले से कई कमरों के काफी बड़े पक्के एवं दो मंजिला मकान है।
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किसी को दो-दो शौचालय, किसी को बिना दिए दिखा दिया
मुरादाबाद। शौचालय निर्माण में भी इस ग्राम पंचायत में जमकर खेल हुआ। जांच के दौरान 401 शौचालयों के निर्माण के सापेक्ष 205 शौचालयों के लाभार्थियों के संबंध में ग्राम वासियों द्वारा कुछ शौचालय बने व कुछ के नहीं बने होने की पुष्टि की गई। डिजीटल डायरी में अंकित नबी हुसैन का नाम क्रमांक 22 व क्रमांक 441 पर (डबल) अंकित पाया गया। इसी तरह फारूक का नाम क्रमांक 206 व 295 पर तथा डोरी का नाम क्रमांक 320 व 324 पर दो बार अंकित पाया गया। जबकि नौ ऐसे लोगों को लाभार्थी दर्शाया गया है जिन्होंने शौचालय स्वयं बनवाए हैं। सात लाभार्थियों ने बताया कि ईट, सीमेंट आदि प्रधान द्वारा दिया गया है। निर्माण उन लोगों ने स्वयं कराया है।
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78 लाभार्थियों के शौचालय में छत, दरवाजा अथवा प्लास्टर नहीं पाया गया। सात लाभार्थियों का शौचालय टूटा मिला। जिसका प्रयोग नहीं होता पाया गया। 16 लाभार्थियों के शौचालय बने ही नहीं थे। जिससे ग्राम पंचायत सचिव उन्हें टीम को नहीं दिखा सके। कुछ परिवार संयुक्त रूप से एक ही जगह रहते पाए गए, बावजूद इसके उन्हें एक से अधिक शौचालय दिए गए मिले। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीपीआरओ राजेश कुमार ने सचिव सतीश सागर को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। संतोष जनक उत्तर प्राप्त न होने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी है।