फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Sambhal: Six people, including a dismissed SDM, arrested for the allotment of 800 bighas of Ganga land

Sambhal: गंगा की 800 बीघा जमीन आवंटित करने में बर्खास्त SDM समेत छह गिरफ्तार, ऐसे रचा था कर्मियों ने पूरा खेल

Sat, 04 Jul 2026 08:55 PM IST
Vimal Sharma अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: Vimal Sharma Updated Sat, 04 Jul 2026 08:55 PM IST
सार

गंगा किनारे की जमीन को गलत श्रेणी में आवंटित करने के मामले में पुलिस ने बर्खास्त किए गए तत्कालीन एसडीएम समेत अन्य कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। खुलासा हुआ है कि गंगा की भूमि का आवंटन नहीं किया जाता लेकिन अफसरों ने भूमि की श्रेणी बदलकर हेरफेर किया था। इस तरह रचा गया था खेल। 

विज्ञापन
Sambhal: Six people, including a dismissed SDM, arrested for the allotment of 800 bighas of Ganga land
जेल भेज गए आरोपी - फोटो : संवाद

विस्तार

गुन्नौर तहसील क्षेत्र में वर्ष 2019 में गंगा की 800 बीघा से अधिक भूमि दस्तावेजों में हेरफेर कर 162 लोगों को आवंटित करने के मामले में पुलिस ने 2021 में गुन्नौर तहसील से बर्खास्त किए गए तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह (सेवानिवृत) व हरदोई में मौजूदा समय में तैनात चकबंदी कर्ता भीमराव सिंह, सेवानिवृत हो चुके तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर सिंह एवं पूर्व ग्राम प्रधान असदपुर विक्रांत एवं गुन्नौर निवासी अधिवक्ता जय भारद्वाज को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया है।

विज्ञापन


वहीं हाथरस के सहायक चकबंदी अधिकारी मनवीर सिंह, हरदोई में तैनात चकबंदीकर्ता भीमराव सिंह और गुन्नाैर तहसील में तैनात राजस्व लेखपाल अमित को निलंबित कर दिया गया है। जबकि एसडीएम सुल्तानपुर करम सिंह के निलंबन के लिए डीएम ने शासन से संस्तुति की है।
विज्ञापन


बताया जाता है कि गंगा की भूमि का आवंटन नहीं किया जाता लेकिन अफसरों ने भूमि की श्रेणी बदलकर हेरफेर किया। डीएम अंकित खंडेलवाल ने बताया कि जो पट्टे आवंटित किए गए थे उनके स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं। क्योंकि आवंटन गलत है लिहाजा सभी पट्टे निरस्त होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रजपुरा क्षेत्र के गांव बसंतपुर निवासी लेखपाल स्वाति शर्मा ने दो जुलाई को पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह वर्तमान में गांव भौना नंगला असदपुर तहसील गुन्नौर में हल्का लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं। गैर आबाद गांव सुखैला हल्का क्षेत्र भौना नंगला के अंतर्गत आता है। उन्होंने तहरीर में बताया कि 12 मार्च 2007 को गांव में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी।

इस दौरान गंगा की जमीन की श्रेणी बदलकर कृषि भूमि दर्शा दिया। इसके बाद तत्कालीन चकबंदी अधिकारी व कर्मचारियों ने अलग-अलग समय में पट्टे कर दिए। कुल 71.5500 हेक्टेयर गंगा की भूमि की श्रेणी बदली गई। हेरफेर कर यह भूमि रेत के खाते की श्रेणी 5 (3) से श्रेणी 6 (4) में दर्ज कर दी गई।

बताया कि इस फर्जीवाड़े के संज्ञान में आने पर 2018 में थाना गुन्नौर में मुकदमा अपराध संख्या 480/2018 दर्ज हुआ था। तत्कालीन उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सभी पट्टों का आवंटन निरस्त कर दिया गया। हालांकि, 29 जून 2019 को तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह ने फिर से 162 लाभार्थियों के लिए भूमि का आवंटन कर दिया था।

जबकि नियमानुसार गंगा किनारे की भूमि को आवंटित नहीं किया जा सकता था। 19 मार्च 2020 को चकबंदी विभाग ने इसे अंकित किया। 10 अगस्त 2020 को एक रिपोर्ट में 162 के बजाय 140 लाभार्थियों को 56.0820 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित करने की बात कही गई थी।

तहरीर में उन्होंने बताया कि जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व जय भारद्वाज से विधिक परामर्श के बाद 21 जनवरी 2022 को सहायक चकबंदी अधिकारी के हस्ताक्षर से गंगा श्रेणी की भूमियों का अमल दरामद किया था। इस आवंटन में राजस्व संहिता 2006 की धारा 119 से 126 का उल्लंघन हुआ। विशेषकर धारा 125 का पालन नहीं किया गया। 31 मार्च 2023 को 17 अपात्र लाभार्थियों के आवंटन निरस्त हुए। इसके बावजूद 145 लाभार्थियों के नाम अभी भी अभिलेखों में दर्ज हैं।

गंगा की भूमि का भी कर दिया बंदरबांट, अफसरों ने श्रेणी तक बदल डाली
अफसरों ने गंगा की भूमि का भी बंदरबांट कर दिया। रेतीली जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर पट्टे आवंटित कर दिए। एक शिकायत के बाद जब डीएम ने जांच कराई तो 29 जून 2019 को हुए इस भूमि घोटाले का परत दर परत खुलासा होता चला गया। अभी तक चकबंदी विभाग और राजस्व विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों के नाम इस पूरे खेल में सामने आ चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 71.5500 हेक्टेयर भूमि का हेरफेर सामने आया है।

गिरफ्तार किए गए सभी अधिकारियों, कर्मचारियों की थी तहसील क्षेत्र में तैनाती
गंगा की भूमि के मनमर्जी से आवंटन के मामले में पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम ओमवीर, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह व चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर सिंह एवं पूर्व ग्राम प्रधान असदपुर विक्रांत एवं अधिवक्ता जय भारद्वाज को गिरफ्तार किया है। माना जा रहा है कि इन सभी ने कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए यह गोलमाल किया है।

इनको बनाया गया है आरोपी
तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, तहसीलदार करम सिंह, चकबंदी अधिकारी सतीश गुप्ता, सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक राजवीर सिंह, परवाना अमलदरामद जारी करने वाले सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक रक्षपाल सिंह, तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन चकबंदी कर्ता मनवीर सिंह, तत्कालीन ग्राम प्रधान विकांत कुमार, ग्राम पंचायत सदस्य प्रवीन कुमार, संतोष कुमार, जलधारा, मोहरश्री, किशनलाल, देवेंद्र कुमार, लेखपाल सर्वेश कुमारी, लेखपाल अमित कुमार, लेखपाल ओमकार सिंह, प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता आरोपी बनाए गए हैं।

वर्ष 2007 से चल रहा गंगा की भूमि पर कब्जे का खेल
- 12 मार्च 2007 को चकबंदी अधिनियम के प्रकाशन होने के बाद गंगा की भूमि के खाते की कुल 71.5500 हेक्टेयर भूमि को श्रेणी 6 (4) के तहत दर्ज किया गया था।
- वर्ष 2018 में नौ दोषी अधिकारी व कर्मचारी व 58 अपात्र लाभार्थियों के विरुद्ध थाना गुन्नौर में मुकदमा दर्ज कराया गया और फर्जी प्रविष्टियां निरस्त की गईं।
- 29 जून 2019 को उक्त गंगा के खाते की भूमि को तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह द्वारा 162 लाभार्थियों के पक्ष में स्वीकृत किया गया था।
- 19 मार्च 2020 को चकबंदी विभाग ने उक्त भूमि को अपने अभिलेखों में दर्ज की थी।
- 10 अगस्त 2020 को चकबंदी लेखपाल, चकबंदी कर्ता, सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा राजस्व निरीक्षक कार्यालय की रिपोर्ट प्रेषित की गई थी।
- 29 जून 2019 को चकबंदी अधिकारी को अमल दरामद करने के निर्देश दिए गए थे।
- 21 जनवरी 2022 को गंगा श्रेणी की भूमियों का अमल दरामद किया गया था।
- 2018 में उक्त गंगा की भूमि को फर्जी लाभार्थियों को आवंटित होने पर मुकदमा दर्ज होने तथा आवंटन निरस्त होने के बावजूद पुन: कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आवंटन किया गया।
- 31 मार्च 2023 को उक्त 17 अपात्र लाभार्थियों के आवंटन निरस्त करने के बाद भी 145 लाभार्थियों के नाम अभिलेखों में दर्ज हैं। जिनको कभी भी कब्जा नहीं दिलाया गया और न ही कभी किसी लाभार्थी द्वारा इसकी मांग की गई।

फिर भी दो बार आवंटित कर दिया
गंगा किनारे झाऊ और रेत श्रेणी की जमीन का पट्टा नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी पहले वहां की भूमि 58 अपात्रों के नाम दर्ज कर दी गई थी और बाद में 162 लोगों के लिए 800 से ज्यादा बीघा जमीन आवंटित कर दी गई। इसमें आवंटन प्रक्रिया को भी पूरा नहीं किया गया। इस भूमि का आवंटन नहीं किया जा सकता है।

डीएम ने बताया कि 2007 में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान यह गैरआबाद गांव शामिल हुआ था। 58 ऐसे अपात्रों के नाम पट्टे कर दिए गए थे जो गांव में नहीं रहते थे। मामला पकड़ में आया तो तत्कालीन नायब तहसीलदार व चकबंदी विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और पट्टे निरस्त कर दिए गए थे।

इसके बाद यह जमीन मुक्त हो गई थी लेकिन तत्कालीन एसडीएम ने अपने दायरे से आगे बढ़कर श्रेणी बदली और आवंटन प्रक्रिया करा दी। जबकि श्रेणी बदलने का अधिकार एसडीएम को नहीं है। यह शासन स्तर से श्रेणी बदली जा सकती है। गंगा किनारे की जमीन में यह बदलाव हो भी नहीं सकता है।

गुन्नौर एसडीएम रहते हुए बर्खास्त कर दिए गए थे ओमवीर सिंह
2021 में जिस दिन गुन्नौर के एसडीएम रहते हुए ओमवीर सिंह की सेवानिवृत्ति होनी थी, उसी दिन शासन ने अलग-अलग आरोप की जांच पूरी होने के चलते बर्खास्त की कार्रवाई कर दी थी। अब वह जमीन के गलत आवंटन कराने में जेल गए हैं। संभल जिले में करीब तीन वर्ष तक वह तैनात रहे। निकायों का भी प्रभार रहा। इस दौरान वह विवादों में ही घिरे रहे। भ्रष्टाचार के आरोप गुन्नौर तहसील में भी खूब लगे थे।

गंगा किनारे की जमीन पर गलत तरीके से 162 लोगों के पट्टे किए गए, जबकि नियमानुसार यह पट्टे नहीं हो सकते थे। मेरे सामने शिकायत आई थी तो जांच कराई गई। जांच के बाद ही रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। छह आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। जिन लोगों के नाम पट्टे हैं उनको नोटिस दिया जा रहा है और पट्टे निरस्त किए जाएंगे। अंकित खंडेलवाल, डीएम, संभल

गलत तरीके से जमीन का आवंटन करने के मामले में गुन्नौर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसके आधार पर आरोपी हिरासत में लिए गए हैं। पूछताछ के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। जहां से जेल भेज दिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।- कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी, संभल

जिस दिन सेवानिवृति थी उसी दिन बर्खास्त हुए थे ओमवीर सिंह
जमीन के घोटालों में घिरे तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह को वर्ष 2021 में शासन ने बर्खास्त कर दिया था। उन पर जमीन को लेकर कई आरोप लगे थे। जब जांच कराई गई तो सभी आरोप सही पाए गए। इस पर शासन ने बर्खास्त कर दिया। बताया जाता है कि जिस दिन उनकी सेवानिवृति की तिथि थी उसी दिन बर्खास्तगी की गई थी।

आज जब पूरे मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस मामले में उन समेत छह लोगों को जेल भेज दिया गया है। बताया जाता है कि गुन्नौर तहसील में भी तैनाती के दौरान भी कई आरोप ओमवीर सिंह पर लगे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed