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Moradabad News: तीन दिन में पीतल की सिल्ली के दाम 100 रुपये किलो बढ़े, पुराने ऑडरों पर संकट
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मुरादाबाद। पीतल नगरी के हस्तशिल्प उद्योग पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की मार और तेज हो गई है। महज तीन दिन में पीतल की सिल्ली के दाम 100 रुपये प्रति किलो बढ़ गए। एक किलो की पीतल की सिल्ली का दाम अब 820 से बढ़कर 920 रुपये हो गया है। एल्युमिनियम के दामों में भी 30 से 40 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। निर्यातकों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में अचानक आए उछाल से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इससे पुराने ऑर्डर अब घाटे का सौदा बनने लगेंगे।
पश्चिम एशिया के युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर हस्तशिल्प उत्पादों की मांग की चुनौती के बीच कच्चे माल की कीमतों में तेजी ने निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एक्सपोर्टर्स वॉयस एसोसिएशन ने प्रदेश और केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि कच्चे माल के कारोबारियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री और बिलिंग की नियमित निगरानी कराई जाए ताकि जमाखोरी और कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सके।
निर्यातक नबील अहमद ने बताया कि विदेश से ऑर्डर मिलने के बाद उत्पादन और अंतिम शिपमेंट तक दो से तीन महीने का समय लग जाता है। इस दौरान कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़ने पर पहले से तय कीमत पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। खरीदारों से अचानक बढ़ी लागत की भरपाई मांगना भी आसान नहीं रहता है। ऐसे में कम मार्जिन पर ऑर्डर पूरा करना पड़ता है। कहा कि पिछले तीन माह में पीतल की सिल्ली की कीमत में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लागत इतनी बढ़ गई है कई ऑर्डर छोड़ने की स्थिति तक बन गई है।
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निर्यातक बोले...
-तीन दिन में पीतल की सिल्ली 100 रुपये प्रति किलो महंगी होना चिंता की बात है। कीमतें लगातार बढ़ीं तो पुराने भाव के ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होगा। -अनूप शंखधार, चेयरमैन, एक्सपोर्टर्स वॉयस एसोसिएशन
-सरकार को कच्चे माल के कारोबारियों की खरीद-बिक्री और स्टॉक पर निगरानी बढ़ानी चाहिए। कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। -विशाल अग्रवाल, महासचिव, एक्सपोर्टर्स वॉयस एसोसिएशन
-ऑर्डर मिलने से शिपमेंट तक दो-तीन महीने लगते हैं। इस दौरान कच्चे माल के दाम बढ़ने से लागत बढ़ती है और निर्यातकों का मार्जिन प्रभावित होता है। -रजत सिंघल, निर्यातक
-कच्चे माल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की नियमित निगरानी होनी चाहिए। कारोबारियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री और बिलिंग की जांच से जमाखोरी पर रोक लगेगी। -सुमित छाबड़ा, निर्यातक व वाइस चेयरमैन वाइंग एजेंट एसोसिएशन
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पश्चिम एशिया के युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर हस्तशिल्प उत्पादों की मांग की चुनौती के बीच कच्चे माल की कीमतों में तेजी ने निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एक्सपोर्टर्स वॉयस एसोसिएशन ने प्रदेश और केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि कच्चे माल के कारोबारियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री और बिलिंग की नियमित निगरानी कराई जाए ताकि जमाखोरी और कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाया जा सके।
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निर्यातक नबील अहमद ने बताया कि विदेश से ऑर्डर मिलने के बाद उत्पादन और अंतिम शिपमेंट तक दो से तीन महीने का समय लग जाता है। इस दौरान कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़ने पर पहले से तय कीमत पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। खरीदारों से अचानक बढ़ी लागत की भरपाई मांगना भी आसान नहीं रहता है। ऐसे में कम मार्जिन पर ऑर्डर पूरा करना पड़ता है। कहा कि पिछले तीन माह में पीतल की सिल्ली की कीमत में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लागत इतनी बढ़ गई है कई ऑर्डर छोड़ने की स्थिति तक बन गई है।
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निर्यातक बोले...
-तीन दिन में पीतल की सिल्ली 100 रुपये प्रति किलो महंगी होना चिंता की बात है। कीमतें लगातार बढ़ीं तो पुराने भाव के ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होगा। -अनूप शंखधार, चेयरमैन, एक्सपोर्टर्स वॉयस एसोसिएशन
-सरकार को कच्चे माल के कारोबारियों की खरीद-बिक्री और स्टॉक पर निगरानी बढ़ानी चाहिए। कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। -विशाल अग्रवाल, महासचिव, एक्सपोर्टर्स वॉयस एसोसिएशन
-ऑर्डर मिलने से शिपमेंट तक दो-तीन महीने लगते हैं। इस दौरान कच्चे माल के दाम बढ़ने से लागत बढ़ती है और निर्यातकों का मार्जिन प्रभावित होता है। -रजत सिंघल, निर्यातक
-कच्चे माल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की नियमित निगरानी होनी चाहिए। कारोबारियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री और बिलिंग की जांच से जमाखोरी पर रोक लगेगी। -सुमित छाबड़ा, निर्यातक व वाइस चेयरमैन वाइंग एजेंट एसोसिएशन