{"_id":"5d3623268ebc3e6d181029f1","slug":"prayers-in-shiv-temple-on-first-monday-in-shravan-month-city-news-mbd3159793190","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले सोमवार पर बम भोले के जयकारों से गूंज उठे शिवालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले सोमवार पर बम भोले के जयकारों से गूंज उठे शिवालय
विज्ञापन
मुरादाबाद के पाकबडा स्थित महाकालेश्वर धाम मंदिर में सावन के पहले सोमवार को जल चढ़ाते श्रद्वालु
मुरादाबाद। सावन के पहले सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह के समय मौसम साफ होने की वजह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। उन्होंने भगवान भोलेनाथ की दूध, दही, बिल्वपत्र, धतूरा और शहद से पूजा अर्चना की। हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लेकर आए शिवभक्तों के बेड़ों ने जलाभिषेक कर पुण्य कमाया। भोले बाबा के जयघोषों से शिवालय गूंज उठे। देर रात तक मंदिरों में दीपक जलाने के लिए श्रद्धालु पहुंचते रहे। भक्तों ने सोमवार का व्रत रखा और शाम को भगवान शिव को भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण किया। मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना रहा।
हिमगिरी स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर, आशियाना स्थित ढाब वाला मंदिर, खुशहालपुर स्थित ऋणमुक्तेश्वर मंदिर, रामगंगा विहार स्थित शिव शक्ति मंदिर, आवास विकास कालोनी स्थित सत्य श्री शिव मंदिर, रेलवे हरथला कालोनी स्थित मनोकामना मंदिर, कानून गोयान में हाथी वाला मंदिर, लोकोशेड स्थित शिव शक्ति लोक मंदिर के अलावा महानगर के सभी मंदिरों में जलाभिषेक और पूजन किया गया।
मंदिरों में महिलाओं ने पूजा कर शिव की आराधना की। दोपहर में कीर्तन करके शिव की महिमा का गुणगान किया। शिव महापुराण भी पढ़ा गया। मंदिरों को फूलों के अलावा लाइटों से सजाया गया था। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
विज्ञापन
झारखंडी मंदिर
सुबह चार बजे से कांवड़, डाक कांवड़ और झोली में जल (गले में कैन) लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की लाइन लग गई। दिनभर में करीब 125 कांवड़ चढ़ाई गई हैं। मंदिर पर दीपक जलाने की मान्यता है। महंत भोलेनाथ योगीराज ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पंचमी को भंडारा होने के बाद दीपक जलाना शुरू हो गया है, जो सावन की पूर्णिमा तक चलेगा। सावन के माह में झारखंडी बाबा के 40 दिन के दीपक जलाए जाते हैं। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दीपक जलाकर मनौती मांगी गई। रात दस बजे तक शिवभक्तों का तांता लगा रहा। सुबह साढ़े चार बजे मंदिर के पट खुल गए थे और रात 12 बजे तक दर्शनार्थी आए। इसके बाद शयन आरती की गई।
चौरासी घंटा मंदिर :-
तड़के चार बजे से ही जलाभिषेक के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने प्रेम पूर्वक भगवान शिव की आराधना की। यह सिलसिला दोपहर एक बजे तक बना रहा। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ-साथ बाहर भगवान शिव की प्रतिमा पर भी विधि विधान से पूजा अर्चना की गई।
प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर :-
सुबह में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया और शाम को भगवान शिव की आरती की गई। मंदिर के पुजारी पंडित केदारनाथ मिश्र ने विधि विधान से शिव पूजन कराया। हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर से डाक कांवड़ लेकर आए श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। आखिरी सोमवार को कांवड़ की संख्या अधिक रहेगी।
महाकालेश्वर धाम :-
मंदिर में बड़ी संख्या में कांवड़ चढ़ाई गईं। सुबह चार बजे से जलाभिषेक शुरू हो गया था। शाम तक जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। महंत पंडित गणेशानंद ने बताया कि दोपहर में महिलाओं ने भजन गाए।
विज्ञापन
हिमगिरी स्थित अर्धनारीश्वर मंदिर, आशियाना स्थित ढाब वाला मंदिर, खुशहालपुर स्थित ऋणमुक्तेश्वर मंदिर, रामगंगा विहार स्थित शिव शक्ति मंदिर, आवास विकास कालोनी स्थित सत्य श्री शिव मंदिर, रेलवे हरथला कालोनी स्थित मनोकामना मंदिर, कानून गोयान में हाथी वाला मंदिर, लोकोशेड स्थित शिव शक्ति लोक मंदिर के अलावा महानगर के सभी मंदिरों में जलाभिषेक और पूजन किया गया।
विज्ञापन
मंदिरों में महिलाओं ने पूजा कर शिव की आराधना की। दोपहर में कीर्तन करके शिव की महिमा का गुणगान किया। शिव महापुराण भी पढ़ा गया। मंदिरों को फूलों के अलावा लाइटों से सजाया गया था। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
विज्ञापन
झारखंडी मंदिर
सुबह चार बजे से कांवड़, डाक कांवड़ और झोली में जल (गले में कैन) लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की लाइन लग गई। दिनभर में करीब 125 कांवड़ चढ़ाई गई हैं। मंदिर पर दीपक जलाने की मान्यता है। महंत भोलेनाथ योगीराज ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पंचमी को भंडारा होने के बाद दीपक जलाना शुरू हो गया है, जो सावन की पूर्णिमा तक चलेगा। सावन के माह में झारखंडी बाबा के 40 दिन के दीपक जलाए जाते हैं। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दीपक जलाकर मनौती मांगी गई। रात दस बजे तक शिवभक्तों का तांता लगा रहा। सुबह साढ़े चार बजे मंदिर के पट खुल गए थे और रात 12 बजे तक दर्शनार्थी आए। इसके बाद शयन आरती की गई।
चौरासी घंटा मंदिर :-
तड़के चार बजे से ही जलाभिषेक के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने प्रेम पूर्वक भगवान शिव की आराधना की। यह सिलसिला दोपहर एक बजे तक बना रहा। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ-साथ बाहर भगवान शिव की प्रतिमा पर भी विधि विधान से पूजा अर्चना की गई।
प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर :-
सुबह में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया और शाम को भगवान शिव की आरती की गई। मंदिर के पुजारी पंडित केदारनाथ मिश्र ने विधि विधान से शिव पूजन कराया। हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर से डाक कांवड़ लेकर आए श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। आखिरी सोमवार को कांवड़ की संख्या अधिक रहेगी।
महाकालेश्वर धाम :-
मंदिर में बड़ी संख्या में कांवड़ चढ़ाई गईं। सुबह चार बजे से जलाभिषेक शुरू हो गया था। शाम तक जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। महंत पंडित गणेशानंद ने बताया कि दोपहर में महिलाओं ने भजन गाए।