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बारिश के बाद भी शहर का प्रदूषण लाल
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मुरादाबाद। शहर का वायु प्रदूषण लगातार लाल निशान पर बना हुआ है। गुरुवार को सुबह बारिश हुई है। सुबह दस बजे का वायु गुणवत्ता सूचकांक 335 दर्ज किया गया है, जो शाम को बढ़कर 340 हो गया। पर्यावरणविदें का कहना है कि प्रशासन को प्रदूषण के बढ़ने के कारणों को जानने और इसे नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाने होंगे।
नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स वेबसाइट पर पीएम 2.5 का स्तर औसत 340, न्यूनतम 311 और अधिकतम 373 एक्यूआई, पीएम 10 का स्तर औसत 209, न्यूनतम 149, अधिकतम 312 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड औसत 91, न्यूनतम 54, अधिकतम 156 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, कार्बन डाई आक्साइड औसत 78, न्यूनतम 29, अधिकतम 119 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। हिंदू कालेज स्थित नैंप की समन्वयक डॉ. अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि लाजपत नगर शहर का पुरा क्षेत्र हैं। अवैध भट्टियां संचालित होने, खुले में आग लगाने के अलावा ई-कचरा जलने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है। बिना कुछ भी जले इस तरह से वायु प्रदूषण नहीं हो सकता है। जितनी बारिश हुई है, उसके हिसाब से वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से ऊपर नहीं होना चाहिए था। इस हद तक प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से मानव स्वास्थ्य प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। सामान्य तौर पर नाइट्रोजन का स्तर 60 और अधिकतम 80 हो जाता है। बारिश के समय ट्रैफिक रुक जाता है, इस हिसाब से यह गैस बढ़ सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों को सबसे पहले यह जानकारी करनी है कि प्रदूषण बढ़ने की वास्तव में वजह क्या है। इसके बाद प्रदूषण की समस्या के निराकरण के लिए सख्त होना पड़ेगा।
वर्जन...
उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, अनियंत्रित मधुमेह और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मरीजों को ज्यादा ठंड में नहीं घूमना चाहिए। खाने पर नियंत्रण रखना चाहिए। नमक और चिकिनाई वाली चीजें परहेज करना चाहिए। सांस के मरीजों को ऑक्सीजन, इनहेलर और नेबुलाइजर की जरूरत पड़ रही है। कमरे में हीटर चलाते समय परात में पानी रखें, इससे आर्द्रता बनी रहती है। कमरे को हमेशा थोड़ा खुला रखना चाहिए, ताकि हवा का आगमन बना रहे।
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डॉ. नितिन बत्रा, वरिष्ठ फिजिशियन।
इनसेट...
नोट... यह आंकड़े नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स से लिए गए हैं।
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक
मुजफ्फरपुर 393
पटना 357
हावड़ा 349
कोलकाता 346
गाजियाबाद 345
मुरादाबाद 340
नोएडा 331
दिल्ली 323
ग्रेटर नोएडा 310
भोपाल 303
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नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स वेबसाइट पर पीएम 2.5 का स्तर औसत 340, न्यूनतम 311 और अधिकतम 373 एक्यूआई, पीएम 10 का स्तर औसत 209, न्यूनतम 149, अधिकतम 312 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड औसत 91, न्यूनतम 54, अधिकतम 156 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, कार्बन डाई आक्साइड औसत 78, न्यूनतम 29, अधिकतम 119 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। हिंदू कालेज स्थित नैंप की समन्वयक डॉ. अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि लाजपत नगर शहर का पुरा क्षेत्र हैं। अवैध भट्टियां संचालित होने, खुले में आग लगाने के अलावा ई-कचरा जलने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है। बिना कुछ भी जले इस तरह से वायु प्रदूषण नहीं हो सकता है। जितनी बारिश हुई है, उसके हिसाब से वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से ऊपर नहीं होना चाहिए था। इस हद तक प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से मानव स्वास्थ्य प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। सामान्य तौर पर नाइट्रोजन का स्तर 60 और अधिकतम 80 हो जाता है। बारिश के समय ट्रैफिक रुक जाता है, इस हिसाब से यह गैस बढ़ सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों को सबसे पहले यह जानकारी करनी है कि प्रदूषण बढ़ने की वास्तव में वजह क्या है। इसके बाद प्रदूषण की समस्या के निराकरण के लिए सख्त होना पड़ेगा।
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उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, अनियंत्रित मधुमेह और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मरीजों को ज्यादा ठंड में नहीं घूमना चाहिए। खाने पर नियंत्रण रखना चाहिए। नमक और चिकिनाई वाली चीजें परहेज करना चाहिए। सांस के मरीजों को ऑक्सीजन, इनहेलर और नेबुलाइजर की जरूरत पड़ रही है। कमरे में हीटर चलाते समय परात में पानी रखें, इससे आर्द्रता बनी रहती है। कमरे को हमेशा थोड़ा खुला रखना चाहिए, ताकि हवा का आगमन बना रहे।
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डॉ. नितिन बत्रा, वरिष्ठ फिजिशियन।
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नोट... यह आंकड़े नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स से लिए गए हैं।
शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक
मुजफ्फरपुर 393
पटना 357
हावड़ा 349
कोलकाता 346
गाजियाबाद 345
मुरादाबाद 340
नोएडा 331
दिल्ली 323
ग्रेटर नोएडा 310
भोपाल 303